Kundli – Hrelate Astrology https://hrelate.com/astrology Mon, 27 Aug 2018 09:21:48 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.3.21 Ank Jyotish: अंको से जुड़े होते हैं जीवन के तार, जाने अंक ज्योतिष के अनुसार अपना भविष्य https://hrelate.com/astrology/ank-jyotish/ Mon, 27 Aug 2018 09:21:48 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16962 हर कोई चाहता है की उसके भविष्य के बारे में वह जान सके। उसका आने वाला कल कैसा होगा ? उसका जीवन किस प्रकार का होगा ? यह सब लोग जानना चाहते हैं। लोग...

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हर कोई चाहता है की उसके भविष्य के बारे में वह जान सके। उसका आने वाला कल कैसा होगा ? उसका जीवन किस प्रकार का होगा ? यह सब लोग जानना चाहते हैं।

लोग व्यक्ति के जन्म तारीख के आधार पर उसका भविष्य बताते है। इसके लिए कई तरह के विज्ञान की भी मदद ली जाती है जैसे कुंडली देखना, हाथों की रेखाओं द्वारा भविष्य बताना और अंक ज्योतिष आदि। इस तरह ऐसे कई तकनीक है जिसकी मदद से भविष्य का पता लगाया जाता है।

आज हम आपको इस लेख के जरिये अंक ज्योतिष के बारे में बता रहे है। अंक Jyotish में अंको के आधार पर आपके भविष्य के बारे में बताया जाता है। यह विद्या प्राचीन काल से चली आ रही है। जिसमे लोग अंको की गणना कर भविष्य बताते है।

अंक ज्योतिष को अंग्रेजी भाषा में न्यूमेरोलॉजी (Numerology) के नाम से जाना जाता है। आईये आज के इस लेख में जानते है इसी Ank Jyotish विषय के बारे में विस्तार से।

Ank Jyotish: जाने यह क्या है, इसकी उत्पत्ति, महत्व और इसे जानने का तरीका

Ank Jyotish

क्या होती है Ank Jyotish ?

  • अंक ज्योतिष में व्यक्ति अंको की गणना कर लोगो के भविष्य को बताने की कोशिश करते है।
  • अंक ज्योतिष का निर्माण ज्योतिष और अंक शब्द को मिलाकर किया गया है। व्यक्ति के सारे कार्य अंको के आधार पर ही किये जाते है फिर वह किसी महीने की तारिख हो, घंटा या फिर कोई महीना ही क्यों ना हो।
  • हर चीज अंको पर निर्भर करती है। इस लिए अंक शास्त्र भी अंको पर निर्भर रहता है।
  • 1 से लेकर 9 तक के अंको के द्वारा ही पूरे अंक क्षेत्र की गणना की जाती है और साथ ही ग्रह, नक्षत्र और राशियों के आधार पर ज्योतिष का अनुमान लगाया जाता है।

अंक ज्योतिष की उत्पत्ति

  • अंक ज्योतिष का उपयोग प्राचीन काल से किया जाता आ रहा है। इसकी शुरुआत मिश्र से हुयी है।
  • आपको बता दे की इजिप्ट की जिप्सी जनजाति द्वारा इसकी उत्पत्ति हुयी है। इन्होने ही अंक ज्योतिष क्षेत्र को विकसित किया है। शोध की माने तो अंक शास्त्र का इतिहास हज़ारों साल पुराना है।

क्यों किया जाता है अंक शास्त्र का उपयोग

  • अंक शास्त्र का उपयोग किसी व्यक्ति के भविष्य के बारे में जानकारी लेने के लिए किया जाता है ताकि वह अपने आने वाले भविष्य की चौनौतियों से अवगत रह पाए।
  • इसके जरिये आप व्यक्ति के व्यवहार, गुण, अवगुण, उसकी विशेषता और उसकी बुराईयो के बारे में पता लगा सकते है।
  • साथ ही इससे यह भी पता चलता है की आपका वैवाहिक जीवन कैसा होगा, संतान कैसी होगी आदि?
  • इसके अतिरिक्त लोग भवन निर्माण के लिए भी अंक शास्त्र का सहारा लेते है और घर भी उसी के अनुरूप ही बनवाते है। साथ ही गृह प्रवेश, कोई वस्तु को खरीदने आदि के लिए भी इसकी मदद लेते है।
  • कई लोग तो प्रसिद्धि पाने के लिए भी अंको की मदद से अपने नाम में परिवर्तन करवाते है।

ज्योतिष शास्त्र और अंक शास्त्र के सम्बन्ध

  • Jyotish Shastra और अंक शास्त्र दोनों ही बहुत पुरानी विद्या है। यह दोनों एक सिक्के के दो पहलू माने जाते है।
  • ज्योतिष शास्त्र बहुत विस्तृत है परन्तु अंक शास्त्र अभी इतना विस्तृत नहीं हुआ है। अंक ज्योतिष इस विस्तृत ज्योतिष शास्त्र की ही एक शाखा होती है।

कैसे होती है अंको की गणना

यदि आप अपना न्यूमेरोलॉजी नंबर जानना चाहते है तो इस प्रकार जान सकते है।

  • इसके लिए सबसे पहले अपनी जन्म तिथि का नंबर ले। यदि आपकी जन्म डेट दो अंको की है तो उसे तब तक जोड़ते जाये जब तक की वह सिंगल नंबर में परिवर्तित न हो जाए।
  • उदहारण के लिए यदि आपकी जन्म डेट 12 है तो इसे आपको 1+2= 3 जोड़ना होगा।
  • इस आधार पर आप जान सकते है की आपका व्यक्तित्व किस प्रकार का है।

जन्मतिथि को जोड़ने के बाद जब 1 से 9 तक में कोई एक अंक निकल कर आता है तो उसी अंक पर अंक ज्योतिष के अनुसार आपका भविष्य एवं व्यक्तित्व निर्भर जरता है। आइये जानते हैं अंकों के अनुसार आपका व्यक्तित्व कैसा होगा?

यदि नंबर 1 आये

  • इस नंबर वाले लोग बहुत ही कलात्मक होते है।
  • उनमे लीडरशिप होती है।
  • इसके अतिरिक्त ऐसे लोगो में इगो भी बहुत होता है। जिसके कारण उनको कभी कभी नुकसान का सामना भी करना पड़ता है।

यदि 2 नंबर है तो

  • इस नंबर के लोगो में धैर्य नाम की चीज नहीं देखी जाती है। ऐसे लोग हर काम को जल्द से जल्द खत्म करना चाहते है।
  • साथ ही ऐसे लोग सकारात्मक भी होते है और कलात्मक भी होते है।

3 नंबर आने पर

  • इस नंबर वाले लोग बहुत ही ईमानदार होते है साथ ही इनमे आत्मनिर्भरता का गुण भी होता है।
  • इस प्रकार के लोग खुद से बहुत प्यार करते है।

4 नंबर

  • इस प्रकार के लोगो पर भरोसा किया जा सकता है साथ ही ऐसे व्यक्ति बहुत ही मेहनती होते है।
  • इन लोगो को गुस्सा जल्दी आता है।
  • इनकी खास बात यह होती है की जिससे यह एक बार दोस्ती करते है तो उनका साथ कभी भी नहीं छोड़ते है।

5 नंबर आने पर

  • ऐसे लोग बहुत ही बिंदास टाइप के होते है साथ ही वह बहुत ही स्मार्ट और बुद्धिमान भी होते है।
  • लेकिन ऐसे लोगो में घमंड भी बहुत होता है। इनका मूड कभी भी बदल जाता है।

6 नंबर

  • इस नंबर के लोग बहुत ही अट्रैक्टिव पर्सनालिटी के होते है और बहुत अच्छे दोस्त भी होते है।
  • लेकिन ऐसे लोग फालतू की बातों में बहस भी बहुत ही करते है। साथ ही आलसी भी होते है।

7 नंबर

  • ऐसे लोग खुद से कोई फैसला नहीं ले पाते है।
  • यह पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर रहते है। साथ ही ऐसे लोग सपनों में जीना पसंद करते है।

8 नंबर

  • ऐसे लोगो में आत्मविश्वास कूट कूट कर भरा होता है।
  • जिस काम को करने की ठान लेते है उसे पूरा करके ही दम लेते है।

9 नंबर

  • ऐसे लोगो में भी आत्मविश्वास ज्यादा होता है।
  • परन्तु कभी कभी ओवर कॉंफिडेंट हो जाते है। जिसके कारण हानि भी होती है।

इस तरह आप अंको के आधार पर अपने व्यक्तित्व के बारे में जान सकते है।

नोट – आजकल कई लोग अंक ज्योतिष को सीखते है और भविष्य को बताते है। टीवी और ऑनलाइन सभी जगहों पर आपको ऐसे लोग मिल जायेंगे जो आपको आपके भविष्य के बारे में बता सकते है। साथ ही कई लोग अंक ज्योतिष के लिए अपना प्रचार भी करते है।

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इन तीन राशियों की महिलाओं से अट्रैक्ट हुए बिना नहीं रह सकता कोई भी पुरुष https://hrelate.com/astrology/attractive-women-of-the-zodiac/ https://hrelate.com/astrology/attractive-women-of-the-zodiac/#comments Tue, 29 Aug 2017 13:59:26 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16453 आमतौर पर किसी भी सुन्दर महिला या लड़की पर पुरुष मोहित हो ही जाता है। जिस तरह चुंबक अपनी ओर किसी धातु वस्तु को खींचता है| उसी तरह सुन्दर महिलाओ की और पुरुष भी...

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आमतौर पर किसी भी सुन्दर महिला या लड़की पर पुरुष मोहित हो ही जाता है। जिस तरह चुंबक अपनी ओर किसी धातु वस्तु को खींचता है| उसी तरह सुन्दर महिलाओ की और पुरुष भी खींचे चले जाते है|

जब भी वे किसी हसीन महिला को देखते है उस पर आकर्षित हो जाते है। पुरुषो को महिला की खूबसूरत आँखें, बाल, स्टाइल, फिगर या फिर उनकी चाल ही घायल करने के लिए काफी होती है|

आपने यदि गौर किया हो पुरुष कुछ हसीन महिलाओं पर बहुत ही आकर्षित होते चले जाते है। वही कुछ महिलाओ के अच्छे होने के बावजूद ही उनमे उन्हें बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं होती|

क्या आपने कभी सोचा है ऐसा क्यों होता है| दरहसल सिर्फ तीन राशियों की हर महिला अपनी खूबसूरती से किसी भी पुरुष को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है। आइये जानते है Attractive Women of the Zodiac, वो राशिया कौनसी है|

Attractive Women of the Zodiac: राशि के अनुसार ये महिलाएं है सबसे आकर्षक

Attractive Women of the Zodiac

इन महिलाओ की खूबसूरती में होता है सम्मोहन

वृषभ, वृश्चिक और मिथुन राशि वाली महिलाओं को देवी, अप्सरा और वैम्पायर कहा गया है। इन तीन राशियों की महिला हमेशा हर इंसान को अपनी खूबसूरती की ओर आकर्षित और सम्मोहित करती है।

मिथुन राशि

  • मिथुन राशि वाली महिलाओं को अप्सराओं की केटेगरी दी गई है।
  • इन राशियों की महिला हर इंसान को अपनी खूबसूरती की ओर आकर्षित करती है।
  • जिस प्रकार हमारे प्राचीन काल में रंभा और मोहिनी नाम की अप्सराओं ने ऋषि मुनिओं को अपनी और आकर्षित किया था|

नहीं दिखता उम्र का असर

जिन महिलाओं की राशि मिथुन होती है। उन महिलाओं की उम्र बढ़ने पर भी खूबसूरत और जवां दिखती है। यह महिला अपनी इन्ही खूबसूरती के कारण इंसानो को दीवाना बना देती है। अपनी खूबसूरती के साथ साथ यह महिला दूसरो की खूबसूरती पर भी आकर्षित होती है।

जोखिम लेने में सक्षम होती है

जिन महिलाओं की राशि मिथुन होती है वह महिला जोखिम लेने में सक्षम होती है। इसके साथ ही यह महिलाएं स्वभाव में चंचल और खुशमिजाज होने के कारण पुरुषों को अपना दीवाना बना लेती है। इन सब की वजह से यह अपने आप को जवां महसूस करवाती है।

वृषभ राशि

  • जिन महिलाओं की वृषभ राशि होती है। उन महिलाओं को देवी की श्रेणी में रखा गया है।
  • इन महिलाओं का प्रभाव किसी जादूगरनी से कम नहीं होता है।
  • यह महिला सब लोगों को अपने कण्ट्रोल में रख सकती है।
  • इन राशि वाली महिला को किसी भी प्रकार के साधनों की कमी नहीं होती है।

लग्जरी लाइफ जीती है 

वृषभ राशि वाली महिला अपनी लग्जरी लाइफ और साधन संपन्न होने के साथ, यह हर इंसान को इनकी खूबसूरती अपनी ओर सम्मोहित करती है। इन महिला को वह इंसान पसंद आते है जो इनका कहना माने और कहने में इनका साथ दे।

पुरुषो को सीधा करना जानती है

वृषभ राशि वाली महिलाओं की शादी जिस इंसान के साथ होती है अगर वह इंसान अपनी वाइफ की नहीं सुनता है। तो उन इंसान को यह सीधा कर देती है। हालाँकि यह अपने पति या फिर बॉयफ्रेंड को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचाना चाहती। यह सब इन राशि वाली महिलाओं के नेचर में होता है।

वृश्चिक राशि

  • जिन महिलाओं की राशि वृश्चिक होती है, वह महिला वैम्पायर केटेगरी में आती है।
  • बतादे की यह महिला किसी इंसान का खून नहीं पीती है।
  • क्योंकि आप लोग यही सोच रहे होंगे कि यह महिला वैम्पायर केटेगरी में आती है तो खून पीती होगी|
  • इस नाम की राशि वाली महिला अपनी खूबसूरती से हर इंसान को अपने सम्मोहन में वश कर लेती है।

तुम मेरी हो जाओ

वृश्चिक राशि वाली महिला दिखने में खूबसूरत, कामुक और सेक्सी लगती है। जो भी इंसान इनसे मिलता है। वो इंसान इनको अपना बनाना चाहता है। इन महिलाओं के जादू कोई भी इंसान नहीं बच सकता है।

सोच समझकर करती है अपने लाइफ पार्टनर का चुनाव

वृश्चिक राशि वाली महिलाएं अपने लाइफ पार्टनर का चुनाव खुद सोच समझकर करती है। इन महिलाओं को वह इंसान पसंद आते है जिनके व्यक्तित्व मजबूत होते है|

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Ramnath Kovind Kundali: क्या इनकी कुंडली में है भावी राष्ट्रपति बनने के योग https://hrelate.com/astrology/ramnath-kovind-kundali/ https://hrelate.com/astrology/ramnath-kovind-kundali/#respond Thu, 20 Jul 2017 09:05:01 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16349 रामनाथ कोविंद का नाम एनडीए द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के चर्चा का विषय बन गया है।  टीवी चैनल्स, अखबार और सोशल मीडिया उनके बारे में  ही चर्चा कर रही है। ...

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रामनाथ कोविंद का नाम एनडीए द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के चर्चा का विषय बन गया है।  टीवी चैनल्स, अखबार और सोशल मीडिया उनके बारे में  ही चर्चा कर रही है।  बता दे की 17 जुलाई, 2017 को देश के राष्ट्रपति पद हेतु  मतदान होगा तथा  20 जुलाई, 2017 को परिणाम घोषित होगा।

आज के लेख में हम आपको Ramnath Kovind Kundali व इनके जीवन की पूरी जानकरी देंगे| रामनाथ कोविंद का जन्म उत्तरप्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला) तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था।

कोविंद का  कोरी या कोली दलित जाति से संबंध  है,ये जातियां उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है। वह 1977 से 1979 तक दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे।

कोविंद समाज सेवा में सक्रिय रहने वाले भाजपा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष भी रहे हैं।

Ramnath Kovind Kundali: क्या कहती है इनकी जन्म कुंडली

Ramnath Kovind Kundali

पहले भी रह चुके है मुख्य पदों पर

  • वर्ष 1986 में रामनाथ दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्यूरो के महामंत्री रहे हैं।
  • वर्ष 1994 और 2000 में यह उत्तरप्रदेश से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं।
  • साथ ही कोविंद भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे हैं।

रामनाथ कई संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं| ये समितियां हैं- होम अफ़ेयर, आदिवासी, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, क़ानून न्याय व्यवस्था, सामाजिक न्याय और राज्यसभा हाउस कमेटी आदि|

30 मई 1974 को कोविंद की शादी सविता कोविंद से हुई थी| इनके एक बेटा प्रशांत हैं और बेटी का नाम स्वाति है|

क्या कहती है इनकी कुंडली

  • श्री रामनाथ कोविंद की जन्म कुंडली में राष्ट्रपति बनने के प्रबल योग हैं।
  • यह कोविंद मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण में जन्मे है।
  • मीन लग्न व धनु राशि की कुंडली में तृतीय स्थान का राहु व भाग्येश मंगल सप्तम स्थान में स्थित है|
  • जो की अप्रत्याशित राजयोग उत्पन्न करवा रहें हैं।
  • बृहस्पति- शुक्र की युति इनमें सरल, सहज व विद्वान व्यक्तित्व बना रहे हैं।
  • जनवरी, 1991 में कोविंद की कुंडली में राहु की महादशा शुरू हुई, जिसमें राजनैतिक सफलता के लक्षण है|
  • सशक्त स्थान में स्वगृही सूर्य के साथ बुध की युति व अष्टम में बृहस्पति-शुक्र की युति वृहत्पराशर होरा शास्त्र के अनुसार प्रबल राजयोग बना रहे हैं।

बता दे की बृहस्पति की महादशा अगस्त, 2015 में बुध की अंतर्दशा में उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया गया। वर्तमान में बृहस्पति महादशा में शुक्र अंतर्दशा में सूर्य की प्रत्यन्तर्दशा चल रही हैं जो उन्हें देश के सर्वोच्च पद पर विराजमान कराएंगे।

बृहस्पति लग्नेश व दशमग हैं। जिसके कारण अत्यंत शुभ परिणाम प्रदान करा रहे हैं। सितंबर, 2022 तक का समय बहुत ही अनुकूल है| इस अवधि में रामनाथ देशहित में ऐतिहासिक निर्णय लेंगे।

यह देश का मान-सम्मान बढ़ाएंगे। कोविंद का राष्ट्रपति बनना ग्रहों की अनुकूलता के अनुसार तय हैं। सूर्य की अनुकूलता मतदान के दिन तथा चंद्रमा की अनुकूलता परिणाम के दिन उन्हें सर्वोच्च पद पर विराजित कराएगी।

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क्या आपके शरीर पर भी है तिल, तो जानिए क्या है इनका रहस्य https://hrelate.com/astrology/moles-on-body-meaning/ https://hrelate.com/astrology/moles-on-body-meaning/#respond Tue, 04 Jul 2017 10:13:16 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16229 शरीर पर तिल का होना आपकी सुंदरता को ही नहीं बल्कि आपके भविष्य में होने वाली घटनाओं को भी सूचित करता है। आपके शरीर में अलग अलग अंग पर तिल का होना, उनके अनेक...

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शरीर पर तिल का होना आपकी सुंदरता को ही नहीं बल्कि आपके भविष्य में होने वाली घटनाओं को भी सूचित करता है। आपके शरीर में अलग अलग अंग पर तिल का होना, उनके अनेक रंग और आकृति से आप भविष्य का लगाया जा सकता है। जैसे आदमियों के शरीर पर दाहिनी ओर तिल होना शुभ होता है। वहीं महिलाओं के बायीं तरफ तिल होने पर शुभ और लाभकारी होता है। यहाँ हम आपको बताने जा रहे है Moles on Body Meaning.

Moles on Body Meaning: जानिए शरीर पर होने वाले तिल का अर्थ और महत्व

Moles on Body Meaning

माथे पर तिल: जिन लोगों के माथे के बीचों बीच तिल (Mole on Face) होता है। वे लोग साफ दिल से प्यार करने वाले होते है। माथे के दायें तरफ तिल होना बुद्धिमत्ता को दर्शाता है। वहीं जिन लोगों के माथे पर बायीं तरफ तिल होता है, वो लोग फिजूलखर्ची करने वाले होते है। इसके अलावा दायें माथे पर तिल होने वाले व्यक्ति धन वृद्धिकारक संकेत दर्शाता है। वहीं बायीं तरफ वाले व्यक्ति का जीवन घोर निराशात्मक होता है।

भौहों पर तिल: जिन लोगों की दोनों आँखों की भौहों पर तिल होता है। वे लोग अक्सर यात्रा करते रहते है। आंख के दाये ओर तिल होने पर जीवन सुखमय और बाएं आंख पर तिल होना दांपत्य जीवन के लिए दुखमय होता है।

पलकों पर तिल: आँखों की पलकों पर तिल होने पर व्यक्ति के स्वभाव में भावुकता होता है। परन्तु दायें आँख की पालक पर तिल वाला व्यक्ति बाएं पलक पर तिल वाले व्यक्ति की अपेक्षा ज्यादा भावुक होता है।

कान पर तिल: कान पर तिल होना उस व्यक्ति के लंबी आयू के होने का संकेत देता है।

नाक पर तिल: यदि Mole on Nose हो तो वह व्यक्ति संपन्न और सुखी होता है। यही तिल महिलाओं के नाक पर हो तो उनके भाग्यवान होने का संकेत देता है।

गाल पर तिल: गाल पर तिल होना शुभ फल माना जाता है। बाएं गाल पर काला तिल व्यक्ति को निर्धन और दाएं गाल पर काला तिल होने पर धनी बनाता है।

ठोड़ी पर तिल: जिन महिलाओं को ठोड़ी पर तिल होता है। उनके अंदर मिलन सारिता की कमी होती है और वे थोड़ी बहुत हठी भी होती है।

कंधों पर तिल: कंधे के दाएं ओर तिल होना दृढ़ता को बताता है और जिनके बाएं कंधे पर तिल होता है वे लोग थोड़े तुनकमिजाजी के होते है।

बाँह पर तिल: बाँह के दाहिनी ओर तिल होने वाला व्यक्ति प्रतिष्ठित और बुदिमान होता है। साथ ही दूसरे लोग उनका आदर भी करते है। बाएं बाँह पर तिल वाले व्यक्ति हमेशा झगड़ालू होते है और हमेशा निरादर के पत्र बने रहते है। साथ इनकी बुद्धि में हमेशा बुरे ही विचार भरे होते है।

हाथों पर तिल: जिनके हाथ पर तिल होता है, वे बहुत चालाक होते है। जिन लोगों की दायी हथेली पर तिल होता है वो बलवान और हथेली के पीछे भाग में तिल हो तो वो लोग धनवान होते है। बायीं हथेली पर तिल होने वाले लोगों का स्वभाव खर्चीला और उनकी हथेली के पीछे भाग पर तिल हो तो वे कंजूस होते है।

अंगूठे पर तिल: व्यक्ति के अंगूठे पर तिल होना उसके कार्यकुशल, व्यवहार कुशल और न्याय प्रिय को दर्शाता है।

तर्जनी पर तिल: जिन लोगों की तर्जनी पर तिल होता है। वे लोग विद्यावान, गुणवान और धनवान होते है। परन्तु वे लोग शत्रुओं से पीड़ित होते है।

मध्यमा पर तिल: जिस व्यक्ति के मध्यमा उंगली पर तिल होता है। वे लोग सुखी और उनका जीवन शांतिपूर्ण होता है।

अनामिका पर तिल: हाथ की अनामिका उंगली पर तिल होना लोगो के ज्ञानी, यशस्वी, धनी और पराक्रमी होने का प्रतिका होता है।

कनिष्ठा पर तिल: जिन लोगों के कनिष्ठा पर तिल होता है। वे लोग संपत्तिवान होते है। परन्तु उनके जीवन दुखमय रहता है।

मुंह पर तिल: Mole on Face व्यक्ति को भाग्य का धनी बनाता है और इनका जीवनसाथी बहुत अच्छा होता है।

गले पर तिल: जिन लोगों के गले पर तिल होता है। वे लोग आरामतलब होते है। और गले के सामने की और तिल होने पर जातक के घर मित्रों का जमावड़ा लगा रहता है। दोस्त सच्चे होते है। पृष्ठ भाग पर तिल होने का संकेत है कि जातक कर्मठ है।

छाती पर तिल: छाती के बायी ओर तिल होने से पत्नी पक्ष से असहयोग की संभावना बनी रहती है। मध्य पर तिल का होना जीवन में सुख को दिखाता है। किसी स्त्री के हृदय पर तिल हो तो वो सौभाग्यवती होती है और इसी के साथ छाती के दाहिनी ओर तिल होना भी शुभ होता है।

कमर पर तिल: अगर किसी व्यक्ति के कमर पर तिल है, तो उस व्यक्ति की जिंदगी सदा परेशानियों से घिरी रहती है।

पेट पर तिल: जिस व्यक्ति के पेट पर तिल होता है। वह व्यक्ति चटोरा होता है। और वह भोजन का प्रिय व मीठा खाने का प्रेमी होता है। ऐसे व्यक्ति में दूसरे लोगों को खिलाने की इच्छा कम होती है।

पैर पर तिल: पैर पर तिल का संकेत दर्शाता है कि वह व्यक्ति के जीवन में भटकाव और यात्राओं का शौकीन रहेगा।

घुटनों पर तिल: अगर किसी के दाहिने घुटने पर तिल हो तो उसके गृह जीवन में सुखमय और बायी ओर हो तो शादीशुदा जीवन दुःख से भरा रहता है।

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देवशयनी एकादशी: अगले चार माह तक शुभ कार्यो पर लगा विराम https://hrelate.com/astrology/devshayani-ekadashi/ https://hrelate.com/astrology/devshayani-ekadashi/#respond Tue, 04 Jul 2017 08:12:14 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16226 आज यानि 4 जुलाई को Devshayani Ekadashi है। अब चार महीने के लिए देवशयनी एकादशी से विवाह आदि मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। इसके उपरान्त मांगलिक कार्य नवंबर से आरम्भ हो जायेंगे। मंगलवार से...

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आज यानि 4 जुलाई को Devshayani Ekadashi है। अब चार महीने के लिए देवशयनी एकादशी से विवाह आदि मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। इसके उपरान्त मांगलिक कार्य नवंबर से आरम्भ हो जायेंगे। मंगलवार से ही चातुर्मास आरम्भ होगा।

Devshayani Ekadashi: जानिए क्या है इसका महत्व

Devshayani Ekadashi

मंदिरों में होंगे अनुष्ठान

देश में कई देव स्थानों पर चातुर्मास अनुष्ठान होंगे। पंडितो के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारस को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। कहीं-कहीं पर देवशयनी एकादशी को ‘पद्मनाभा’ भी कहते हैं। देवउठनी एकादशी के उपरान्त 31 अक्टूबर के बाद अब मांगलिक कार्य आरम्भ होंगे। भगवान विष्णु की पूजा चतुर्मास की इस अवधि में विशेष फलदायी होती है।

पिछले साल से कम है विवाह के मुहूर्त

पंडितों के मुताबिक, विवाह आदि मांगलिक कार्यों का सिलसिला चार महीने के लिए रुक जायेगा। वैसे तो देवउठनी ग्यारस के साथ विवाह शुरू हो जाते हैं। लेकिन इस साल 11 अक्टूबर से गुरु का तारा अस्त होगा जो 6 नवंबर तक रहेगा। जिसके कारण नवंबर में विवाह के मुहूर्त काफी कम हैं।

इस बार विवाह का पहला मुहूर्त 23 नवंबर को है। विवाह के सात ही नवंबर-दिसंबर में शुद्ध मुहूर्त दिए गए हैं। जबकि भिन्न -भिन्न पंचांगों में विवाह के मुहूर्त भी भिन्न -भिन्न दिए गए हैं। पंडितो के अनुसार, इस साल विवाह की संख्या देवउठनी ग्यारस के बाद  पिछले साल से आधे हैं। ऐसी स्थिति गुरु का तारा अस्त होने के कारण बन रही है।

मंदिरों में होगी महापूजा

आज देवशयनी एकादशी (Ashadhi Ekadashi) के उपलक्ष्य में सुबह से ही विष्णु मंदिरों में पूजन और महाआरती का सिलसिला जारी रहेगा। पूजन का आयोजन भी वैष्णव मंदिरों में किया जायेगा। इंदौर स्थित वेंकटेश मंदिर छत्रीबाग में सुबह के समय पूजन-अभिषेक के बाद शाम को तुलसी अर्चना भी की जाएगी। इसके साथ ही गोष्ठी प्रसाद भी  प्रदान किया जायेगा। साथ ही पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के मंदिरों में भी पूजन अभिषेक और महाआरती की जाएगी।

भगवान विष्णु सोते है इन चार महीने

कहा जाता है कि असाढ़ शुक्ल की एकादशी या Devshayani Ekadashi से अगले चार महीने के लिए भगवान विष्णु सोने के लिए पाताल लोक में चले जाते हैं और सूर्य दक्षिणायण हो जाता है। इसके उपरान्त कार्तिक शुक्ल की एकादशी को भगवान विष्णु निंद्रा से  जागते हैं और पाताल लोक से बाहर आकर सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। इसके साथ ही शुभ कार्य आरम्भ हो जाते है। 31 अक्टूबर तक सृष्टि के संचालन का कारोभार भगवान शिव पर होता है। इस दौरान गणेश चतुर्थी, श्रावण मास, और शारदीय नवरात्र जैसे महापर्व आते हैं।

विवाह के अलग-अलग मुहर्त

पंडितों के अनुसार, इस बार अलग-अलग पंचांगों में अलग-अलग मुहूर्त बताये गए है। वैसे नवंबर माह में 23, 28 और 29 नवंबर तथा दिसंबर में 3, 4, 10, 11 दिसंबर तिथियां विवाह के लिए शुभ बताई जा रही है।

पंडितो के अनुसार, 14 दिसंबर से मलमास आरम्भ हो जाएगा जो 13 जनवरी तक रहेगा। शुक्र का तारा दिसंबर में ही अस्त हो जाएगा जो 3 फरवरी तक रहेगा। जिस कारण जनवरी में विवाह के मुहूर्त पंचांगों में नहीं दिए गए हैं।

व्रत का है महत्त्व

कहा जाता है कि देवशयनी Ekadashi Vrat के लिए श्रेष्ठ है। इसके अतिरिक्त चतुर्मास व्रत को यदि श्रद्धालु अनुशासन में रहकर करते हैं तो सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

राजा बलि भगवान विष्णु के लिए देते है पहरा

पुराणों के अनुसार राजा बलि से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया था, तो बलि ने उनसे इच्छा व्यक्त करते हुए अनुरोध किया था कि आप यहां आकर निवास करे। जब भगवान विष्णु पाताल लोक में सोते हैं तो राजा बलि उनके लिए  पहरा देते हैं।

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कथा: क्यों चढ़ाया जाता है हनुमान जी को सिंदूर https://hrelate.com/astrology/hanuman-ji-ko-sindoor/ https://hrelate.com/astrology/hanuman-ji-ko-sindoor/#comments Tue, 04 Jul 2017 05:46:35 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16223 हिन्दू धर्म में सिंदूर को सुख और सम्पन्नता का प्रतिक माना जाता है। इसे महिलाओं के लिए सुहाग का प्रतीक भी माना जाता है। पूजा अर्चना करने के लिए हम भगवान को पुष्प, फल-फूल,...

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हिन्दू धर्म में सिंदूर को सुख और सम्पन्नता का प्रतिक माना जाता है। इसे महिलाओं के लिए सुहाग का प्रतीक भी माना जाता है। पूजा अर्चना करने के लिए हम भगवान को पुष्प, फल-फूल, प्रसाद आदि चढ़ाते है। लेकिन क्या आप जानते है कि एक भगवान् ऐसे है जिनको इन वस्तुओं के अलावा कुछ और भी चढ़ाया जाता है, अन्यथा उनकी आराधना पूर्ण नहीं मानी जाती। जी हाँ, हनुमान जी को अगर आपने सिंदूर नहीं चढ़ाया तो आपकी पूजा अपूर्ण रहेगी।

Hanuman ji ko Sindoor: जानिए क्या है सिंदूर की कथा

Hanuman Ji Ko Kaise Khush Kare

हनुमान जी को आखिर सिंदूर इतना प्रिय क्यों है। इसके पीछे रामायण जी में एक कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार, एक बार जगजननी सीता माता मांग में सिंदूर लगा रही थी। तभी श्री हनुमान जी ने उनसे आश्चर्यपूर्वक पूछा कि माता यह लाल द्रव्य आपने मस्तक पर क्यों लगाया है? ब्रह्मचारी हनुमान की इस बात पर मुस्कुराते हुए सीता जी ने कहा कि पुत्र सिंदूर लगाने से मेरे स्वामी की दीर्घायु होते है और वह मुझ पर सदा प्रसन्न रहते हैं।

हनुमान जी ने लगाया सिंदूर

यह बात तो आप भी जानते है कि हनुमान जी प्रभु श्री राम के परम भक्त है। माता सीता की सिंदूर वाली बात सुनकर हनुमान जी अति प्रसन्न हुए और विचार किया कि जब उंगली भर सिंदूर लगाने से आयुष्य वृद्धि होती है तो फिर क्यों न सारे शरीर पर इसे लगाकर  अपने स्वामी को अजर-अमर कर दूं और सदा उनकी प्रसन्नता का पत्र बना रहू।

फिर क्या था हनुमान जी अपने पुरे शरीर पर सिंदूर लगाकर प्रभु राम जी की सभा में पहुंच गए। हनुमान जी को इस स्थिति में देख वहां मौजूद हर व्यक्ति हंसने लगा। यहाँ तक की भगवान राम भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए, लेकिन प्रभु हनुमान जी से अति प्रसन्न भी हुए। जब राम जी ने हनुमान जी से पूछा कि तुमने ऐसा क्यों किया, तो हनुमान जी ने बड़े ही आदर-भाव से कहा, प्रभु जब माता चुटकी भर सिंदूर लगाती है तो वो आपको प्रिय है और आप उनसे प्रसन्न होते है।

इसलिए मैंने अपने पुरे शरीर पर सिंदूर लगाया है ताकि मै सदैव आपका प्रिय बनकर रह सकू। हनुमान जी इन बातों को सुन सभा में मौजूद हर व्यक्ति उनकी भक्ति भावना को देखकर आश्चर्यचकित रह गया। बस इसी के बाद से हनुमान जी की इस स्वामी-भक्ति की स्मृति में उनके शरीर पर सिंदूर चढ़ाया जाने लगा।

हनुमान चालीसा में भी उल्लिखित है कि राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा। इस बात से तो यही सिद्ध होता है कि हनुमान जी जीवनदायिनी बूटी के समान हैं। जिनकी उपासना से शारीरिक रूप से निर्बल भक्त में भी ऊर्जा का संचार होता है और वह स्वस्थ रहता है।

सिंदूर एक रसायन

सिंदूर रसायन की भाषा में ‘लेड आॅक्साइड’गर्मी में ‘आॅक्सीजन’ देता है। हम जानते है कि भारत देश एक गर्म देश है। मंदिरों में जहां सिंदूर चढ़ाया जाता है। उसके आसपास के वातावरण में आक्सीजन बहुतायात मात्रा में होती है। जिसके कारण से स्फूर्ति आती है और वह स्वास्थ्य रहता है।

Hanuman ji ko kaise khush Kare: ये उपाय आजमाएं

  • यदि शनि के दोषो से मुक्ति पाना चाहते है तो हनुमान जी को शनिवार वाले दिन चोला चढ़ाये।
  • हनुमान जी के दाएं पैर का टीका ले ले और इसे अपने माथे पर लगाए।
  • सरसो का तेल और सिंदूर का टीका घर के मुख्य द्वार पर लगाने से कोई बुरी शक्ति घर में नहीं आ सकती है। इसके अलावा वास्तु दोष भी दूर हो जाता है, घर में लक्ष्मी का वास होता है और साथ ही शनि के प्रकोप से बचा जा सकता है।
  • हनुमान जी के चरणों के सिंदूर मंगलवार को ले और इससे सफ़ेद कागज पर स्वस्तिक बना ले। ध्यान रहे कागज मुड़ना नहीं चाहिए। इस कागज को हमेशा अपने पास रखे। नियमित रूप से इसे प्रणाम करे। इसे करने से नौकरी से सम्बंधित समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।

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योगी आदित्यनाथ की कुंडली के मुताबिक संघर्षों के बीच हासिल करेंगे विजय https://hrelate.com/astrology/yogi-adityanath-kundli/ https://hrelate.com/astrology/yogi-adityanath-kundli/#respond Mon, 03 Jul 2017 12:59:16 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16218 योगी आदित्यनाथ जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में 19 मार्च 2017 को शपथ ली। योगी का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में आनंद बिष्ट के घर 5 जून...

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योगी आदित्यनाथ जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में 19 मार्च 2017 को शपथ ली। योगी का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में आनंद बिष्ट के घर 5 जून 1972 को हुआ। इनका जन्म का नाम अजय सिंह बिष्ट था, परन्तु ये जब  एक बार गोरखनाथ पीठ पूर्व महन्त अवैद्यनाथ के सानिध्य में आये तो फिर उन्हीं के होकर रह गये और इनका नाम पड़ा योगी आदित्यनाथ।

Yogi Adityanath Kundli: ग्रहों की संयोग से जाने योगी का राजनैतिक सफर  

Yogi Adityanath Kundli

कुंडली के ग्रह

अगर योगी को देखा जाये तो साफ दिखाई देता है कि उनकी कुंडली में राज और मोक्ष योग है। Yogi Adityanath Kundli में ग्रहों की दशा कुछ इस तरह है कि वो सत्ता के लिए नहीं बल्कि सत्ता उनके पीछे पीछे चलती है।

नाम – योगी आदित्यनाथ

जन्म स्थान – पंचूर, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड

जन्म तिथि – 5 जून 1972

जन्म समय – 12:00

कुंडली में सिंह लग्न

आदित्यनाथ की कुंडली में सिंह लग्न है। उनके लग्न का स्वामी सूर्य है और राशि स्वामी शनि हैं। इनकी चंद्र राशि कुंभ है। इनका जन्म पूर्व भाद्रपद नक्षत्र के दूसरे चरण में हुआ है। इन पर वर्तमान में केतु की महादशा व अंतरदशा चल रही है। योगी आदित्यनाथ का लग्न सिंह होने के कारण उन्हें सिंह यानि शेर के समान बताता है। इनकी वाणी में ओज गुण और स्वभाव में उग्रता लग्न के वजह से ही है।

राशि स्वामी शनि

राशि स्वामी शनि होने से योगी को न्यायप्रिय भी बनाते हैं। जिसके चलते उन्हें लोकप्रियता प्राप्त हो रही है। जिसके कारण इन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर तय किया है।

इनकी कुंडली के मुताबिक कर्मभाव में बुधादित्य योग, राशि स्वामी शनि का सातवां होना ऐसे योग का निर्माण करता है कि सत्ता इनके पास ही रहना चाहती है। शनि ग्रह के परिणाम स्वरूप ही एक समुदाय विशेष के कट्टर नेता के रूप में इनकी छवि बनी है।

मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का सफर कैसा रहेगा

इन पर केतु की महादशा 16 फरवरी 2017 से शुरू हुई है। केतु इनकी कुंडली में लग्न से 12वां है जो इनके जीवन में कठिन चुनौतियां लेकर आएगा परन्तु सफलता के मार्ग भी सुझायेगा।

बृहस्पति पंचम भाव में होने के कारण ये अपनी छवि के विपरीत एक न्यायप्रिय और विवेकशील शासक अनुभूत हो सकते हैं। इनके निर्णयों के आधार पर इनकी छवि और स्थिति ओर भी ठोस होने की संभावना है। ये उपद्रवियों और असामाजिक तत्वों पर राशि स्वामी के प्रभाव से दंडात्मक कार्रवाही भी करेंगें।

बृहस्पति और चंद्रमा की युति होना भी इनकी प्रसिद्धि का एक कारक है। प्रदेश व देश की राजनीति में इनका कद गुरु व चंद्रमा के योग से ऊंचा होगा ही साथ ही प्रतिद्वंदी भी इनसे प्रभावित होंगे। इनकी कुंडली में मंगल शत्रु को भी इनका मुरीद होने के लिये प्रेरित करता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक योगी आदित्यनाथ की भविष्य की रह आसान तो नहीं है लेकिन भाग्य में बुलंद सितारों के सहयोग से वे संघर्षों में विजय प्राप्त करने की अहमियत रखते हैं।

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50 वर्ष बाद सावन में इस बार विशेष संयोग – भोलेनाथ को ऐसे करें प्रसन्न https://hrelate.com/astrology/shravan-somvar/ https://hrelate.com/astrology/shravan-somvar/#respond Mon, 03 Jul 2017 12:12:26 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16213 भगवान शिवजी का प्रिय माह सावन 10 जुलाई से शुरू होने जा रहा जा रहा है। जो कि इस बार बहुत ही खास होगा, क्योंकि इस बार Sawan Month 2017 में कई विशेष संयोग...

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भगवान शिवजी का प्रिय माह सावन 10 जुलाई से शुरू होने जा रहा जा रहा है। जो कि इस बार बहुत ही खास होगा, क्योंकि इस बार Sawan Month 2017 में कई विशेष संयोग बन रहे है। आपको बता दें कि इस बार सावन माह में 5 सोमवार पड़ेंगे। जिसे ज्योतिषियों द्वारा विशिष्ट अवसर माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि सावन में इस तरह के संयोग 50 साल बाद बने हैं।

ज्योतिषियों के अनुसार, इसके अलावा एक ओर दुर्लभ संयोग यह है कि इस साल रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण रहेगा। 10 जुलाई को सर्वार्थ सिद्धि योग से सावन की शुरुआत होगी। वहीं इसका समापन भी सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग और चंद्र ग्रहण के साथ होगा। 24 जुलाई को पुष्य नक्षत्र होगा।

Shravan Somvar: विशिष्ट संयोग लेकर आ रहा है 

Shravan Somvar

सर्वार्थ सिद्धि योग

सर्वार्थ सिद्धि योग का समय बहुत ही शुभ माना जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग अर्थात अपने आप में सिद्ध। कहा जाता है कि इस दिन की गई पूजा या हवन-यज्ञ का महत्व बहुत अधिक होता है।

इस बार सावन माह में पांच सोमवार हैं। ऐसे खास संयोग कई वर्षों के बाद ही बनते है। इन पांचो सोमवार को व्रत और पूजा करने से आप शिव जी का विशेष आशीर्वाद प्रपात कर सकते है। ये पवित्र माह सोमवार से ही शुरू होगा और सोमवार को ही समाप्त होगा।

यह सावन जो शुभ नक्षत्र और संयोग से सजा है 10 जुलाई सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग, उत्तरा आषाढ़ नक्षत्र से शुरू होकर 7 अगस्त राखी तक चलेगा।

पहला Shravan Somvar 10 जुलाई को , 17 जुलाई को दूसरा सोमवार 24 जुलाई को तीसरा सोमवार, 31 जुलाई को चौथा सोमवार और 7 अगस्त को पांचवां सोमवार रहेगा जिसमें 24 जुलाई तीसरे सोमवार को पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग भी बन रहा है।

7 अगस्त रक्षाबंधन पर होगा समापन

सावन माह की समाप्ति 7 अगस्त रक्षाबंधन को चंद्र ग्रहण के साथ होगी। इस बार बने विशेष योग से सावन शुभकारी रहेगा। भगवान शिव को इस माह बेलपत्री चढ़ाने से वे प्रसन होते है। श्रावण मास में व्रत रखना सबसे श्रेष्ठ माना गया है। यह पाप को मिटाने वाला और मनोकामना की पूर्ति  करने वाला माह है।

श्रावण मास के सभी सोमवार को भगवान शिव-पार्वती के लिए व्रत रखकर शिवजी की बेलपत्र, दही, दूध, पुष्प,चावल, गंगाजल सहित पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव के लिए व्रत और उनकी पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।

5 अंक है कुछ खास

ज्योतिषियों की माने तो हिंदु धार्मिक व सांस्कृतिक विचारों में 5 अंक का विशेष महत्व होता है। मसलन पंच भूत, पंच इंद्रीय, पंच कर्म और पंचांग भी पांच योग से मिलकर बनता है। देखा जाये तो हमारे शरीर में भी पांच इन्द्रिया होती है। यहाँ तक की हाथ और पैरों में 5-5 उंगलियां होती है। अगर देखा जाये तो करीब करीब हर अहम् चीज में 5 अंक जुड़ा होता है।

देश के प्रतिष्ठित मंदिरों में विशेष तैयारी

इन विशेष संयोगों को देखते हुए आशा की जा रही है कि इस बार देश में Shravan Somvar के अवसर पर शिवालयों में श्रद्धालुओं की भरी भीड़ देखने को मिलेगी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित विश्वनाथ मंदिर, झारखण्ड के देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम, उज्जैन के महाकाल मंदिर, रांची के पहाड़ी मंदिर, बाबा गरीबनाथ मंदिर, बिहार के हरिहरनाथ मंदिर, सोमेश्वर मंदिर, गुजरात के सोमनाथ मंदिर, उत्तरखंड के केदारनाथ मंदिर, गुप्तधाम मंदिर सहित देश के सभी प्रतिष्ठित शिव मंदिरो में सावन की विशेष तैयारियां शुरू हो चुकी है।

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जानिए हनुमान जी की पूजा कैसे करे, ये सरल उपाय आजमाएं https://hrelate.com/astrology/hanuman-ji-ki-puja-kaise-kare/ https://hrelate.com/astrology/hanuman-ji-ki-puja-kaise-kare/#comments Mon, 03 Jul 2017 10:07:58 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16206 अगर आप राम भक्त हनुमान को प्रसन्न करना चाहते है, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इनकी पूजा अर्चना पुरे विधि विधान से करना बहुत ही जरुरी है। बजरंग बली की पूजा...

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अगर आप राम भक्त हनुमान को प्रसन्न करना चाहते है, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इनकी पूजा अर्चना पुरे विधि विधान से करना बहुत ही जरुरी है। बजरंग बली की पूजा के लिए आप लोगो को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। आज हम आपको बताने जा रहे है।

Hanuman Ji Ki Puja: हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए यह करे नियम 

Hanuman Ji Ki Puja

साफ वस्त्र में ही करें पूजन

अगर आप हनुमान जी की पूजा करने जा रहे है, तो सबसे पहले स्नान कर साफ कपडे पहन ले। क्योंकि हनुमान जी को प्रसन्ना करने के लिए तन और मन का पवित्र होना बहुत जरुरी है। इसके अलावा अगर आप हनुमान जी को चोला चढ़ाने जा रहे है, तब भी इस बात का विशेष ध्यान रखें।

सही क्रम में करें पूजन

शिख से नख तक संहार क्रम होता है और नख से श‍िख तक सृष्टिज क्रम। अगर आप शिख से नख तक यानी कि संहार क्रम में हनुमान जी की पूजा करेंगे तो वो उग्र हो जाएंगे। इसलिए अगर कोई विशेष कामना है तो पहले संहार क्रम से पूजन करने के बाद सृष्टिज क्रम से पूजन कर चोला चढ़ाया जा सकता है।

हनुमान चालीसा से पूरे होंगे काम

रोजाना या फिर मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा पढ़ने से आपकी मनोकामना और अधूरे काम जरूर पूरे होंगे। इसके साथ ही आप सुन्दर कांड का पाठ भी कर सकते है। हालांकि इस पाठ को करने में समय ज्यादा लगता है। परन्तु इस पाठ में हनुमान जी के बहुत से मूल मंत्र है। जिनके उच्चारण से आपके जीवन में सुख और शांति बनी रहती है।

पूर्ण आस्था है तो हनुमान जी करेंगे कृपा

हमारे हिन्दू शास्त्र में लिखा गया है कि हनुमान जी के नाम को जपने से सिद्धि प्राप्त होती है। धैर्य, श्रद्धा और हनुमान जी में विश्वास है तो निश्चित रूप से आप पर हनुमान जी की विशेष कृपा होगी।

हनुमान जी की पूजा से शांत रहते हैं शनि देव

हनुमान जी को बल, बुद्धि, विद्या, शौर्य और निर्भयता का प्रतिक माना जाता है। हमारे हिन्दू शास्त्र के मुताबिक अगर कोई भी किसी संकट या परेशानी में हनुमान जी को याद करता है। तो उसकी विपदा को हनुमान जी हर लेते है और इसी कारण से उनका नाम संकटमोचन पड़ा है।

एक बार हनुमान जी ने शनि महाराज को कष्टों से मुक्त कराया और उनकी रक्षा की थी। इसलिए शनि भगवान ने हनुमान जी को यह वचन दिया था कि हनुमान जी की आराधना करने वालो को शनि भगवान कभी कष्ट नहीं देंगे। इसलिए शनि के साढ़ेसाती होने पर उनके कष्टों का निवारण करने के लिए हनुमान जी की पूजा करना चाहिए।

ऐसे करें हनुमानजी की पूजा

मारुती नंदन की पूजा करने से शनि भगवान का क्रोध शांत होता है। सूर्य और मंगल के साथ शनि की शत्रुता व योगों के कारण उत्पन्न कष्ट भी दूर हो जाते हैं। हनुमान जयंती के दिन ही नहीं बल्कि  मंगलवार और शनिवार के दिन भी हनुमान जी की पूजा अर्चना करने के लिए उत्तम दिन माने गए है। और यह दोनों दिन उन्हें बहुत ही प्रिय है।

कैसे करें मंगलवार-शनिवार को पूजा

01 मंगलवार और शनिवार के दिन सुबह के समय स्नान के बाद सूर्यदेव को श्री हनुमते नमः मंत्र का जाप करते हुए जल चढ़ाये।

02 तांबे के लोटे में जल और उसमे सिंदूर को मिश्रित कर हनुमान जी को शनिवार और मंगलवार के दिन अर्पित करे।

03 हनुमान जी को लगातार 10 मंगलवार और शनिवार तक गुड़ का प्रसाद लगाए।

04 हनुमान चालीसा का पाठ हर मंगलवार और शनिवार को जरूर करे।

05 हनुमान जी के मंदिर में जाकर केले का भोग लगाए और ऐसा आप 10 मंगलवार और शनिवार तक करे।

06 हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर अर्पित करें। इस उपाये को आप 3 मंगलवार और शनिवार के दिन करने से सफलता बहुत जल्द मिलती है।

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Laung Ke Totke: लौंग के टोटके बदल सकते हैं आपकी किस्मत, जानिए कुछ सरल उपाय https://hrelate.com/astrology/laung-ke-totke/ https://hrelate.com/astrology/laung-ke-totke/#respond Mon, 03 Jul 2017 09:39:58 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16202 हमारे जीवन में कई बार ऐसे मौके आते है जब सब कुछ अच्छा चल रहा होता है लेकिन उसी दौरान उन्हीं कामों में कुछ न कुछ रुकावट आ जाती है। ऐसे  में फिर आप...

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हमारे जीवन में कई बार ऐसे मौके आते है जब सब कुछ अच्छा चल रहा होता है लेकिन उसी दौरान उन्हीं कामों में कुछ न कुछ रुकावट आ जाती है। ऐसे  में फिर आप कितनी भी कोशिश कर लें, जो आप जो चाहते है वो आपको नहीं मिल पाता है और आप निराश हताश हो जाते हैं ।

ऐसे में अगर आय की बात की जाये तो पैसा आता तो है, पर रुकता नहीं है, ऐसी समस्या से आज  कोई परेशान रहता हैं । खर्च ज्यादा हो जाते हैं और आमदनी कम बनी रहती है ।

बने-बनाये काम बिगड़ने लग जाते है। कभी कभी तो एकदम से सफलता मिलने हीं वाली होती है और आखिरी वक़्त पर पता चलता  की आप सफल नहीं हो सके । अगर आप भी इस तरह की परेशानियों से गुजर रहे है, तो परेशान मत होइए । यहाँ हम आपको कुछ ऐसे सटीक ‘लौंग के टोटके’ बता रहे है।

इन लौंग के टोटकों का अपने जीवन में इस्तेमाल करने से आपकी सभी परेशानियों का हमेशा के लिए अंत हो जायेगा और आप फिर से एक खुशहाल जीवन का आनंद ले सकेंगे। आईये जानते है आपकी रसोई में रखी लौंग आपके भाग्य को कैसे बदलने में सक्षम होती है। पढ़ें Laung Ke Totke.

Laung Ke Totke: किस्मत बदलने के लिए जरूर आजमाएं ये लौंग के टोटके

Laung Ke Totke

बिगड़े काम बनाएं

अगर आपके किसी काम में बार-बार रूकावट आ रही है और अगर आप उसमें सफलता हासिल करना चाहते है, तो आप एक नींबू पर के ऊपर 4 लौंग को गाड़ दें। इसके बाद मंत्र ॐ श्री हनुमते नम: मंत्र का 21 बार जाप कर उस नींबू को अपने साथ ले जाए। आप पर हनुमान जी कृपा होगी और आपको काम में सफलता मिलना शुरू हो जाएगी।

आरती में लौंग का प्रयोग

घर पर होने वाली सुबह की पूजा के बाद आरती के समय आप दीपक में 2 लौंग या फिर कपूर में 2 लौंग के फूल डालकर आरती करें। इस उपाय को करने से आपका हर कार्य आसानी से होने लगेंगे और किसी भी प्रकार की बाधा भी नहीं आएगी।

बिना मन के काम कर रहे है तो

कई बार अपनी किसी मजबूरी में इच्छा के विपरीत कार्य करना पड़ता है। जिसका खामियाजा भी हमे भुगतना पड़ता है। अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हो रहा है तो आप कपूर और एक फूल वाली लौंग को लेकर एक साथ जलाकर दो-तीन दिन में थोड़ा थोड़ा खा लें। ऐसा करने से आपकी इच्छा के विपरीत होने वाले काम बंद हो जायेंगे।

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