Mantra – Hrelate Astrology https://hrelate.com/astrology Thu, 02 Aug 2018 13:22:52 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.3.21 Mahamrityunjay Jaap: इस मंत्र से शिव होते है प्रसन्न, मिलती है अकाल मृत्यु पर विजय https://hrelate.com/astrology/mahamrityunjay-mantra-in-hindi/ https://hrelate.com/astrology/mahamrityunjay-mantra-in-hindi/#comments Tue, 31 Oct 2017 08:53:50 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16615 Mahamrityunjay Jaap – हिन्दू धर्म के शास्त्रों और पुराणों में अकाल मृत्यु और भय से बचने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का महत्व बताया गया है। भगवान शंकर को इस मंत्र से...

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Mahamrityunjay Jaap – हिन्दू धर्म के शास्त्रों और पुराणों में अकाल मृत्यु और भय से बचने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का महत्व बताया गया है। भगवान शंकर को इस मंत्र से प्रसन्न किया जा सकता है।

इस मंत्र के प्रभाव से इंसान मौत की मुँह में जाते जाते बच जाता है। मरणासन्न रोगी भी महाकाल की अद्भुत कृपा से जीवन पा लेता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बहुत ही उत्तम फलदायी माना जाता है।

इस मंत्र को करते समय कुछ सावधानी रखना होता है। जिससे इस मंत्र का सही फल मिल सके और आपको कुछ हानि न हो।

यदि आप इस मंत्र का जाप नहीं कर सकते है। तो इस मंत्र का जाप किसी भी पंडित से करवाने में भी आपको बहुत ही लाभ मिल सकता है। आइये जानते है Mahamrityunjay Jaap in Hindi और करते है शिव को प्रसन्न।

Mahamrityunjay Jaap in Hindi: महामृत्युंजय मंत्र व इसका अर्थ तथा सावधानी

Mahamrityunjay Mantra

यहां पढ़िए महामृत्युंजय मंत्र

ऊॅ हौं जूं सः। ऊॅ भूः भुवः स्वः ऊॅ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उव्र्वारूकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। ऊॅ स्वः भुवः भूः ऊॅ। ऊॅ सः जूं हौं।

महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ

समस्त संसार के पालन-हार तीन नेत्रों वाले भगवान शंकर की हम आराधना करते है। जो संपूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से कर रहे हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि हम मृत्यु के बंधनों से सदा के लिए मुक्त हो जाएं और आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए शरीर को त्याग-कर आप में ही लीन हो जाएं और मोक्ष की प्राप्त कर सके।

इस मंत्र का जाप करते हुए बरतें यह सावधानिया

01: महामृत्युंजय मंत्र का जप उसी जगह पर करे जहां पर भगवान शंकर की मूर्ति, प्रतिमा या महामृत्युमंजय यंत्र रखा हो।
02: महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय धूप दीप जलाने का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।
03: महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण करते हुए शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। जब भी मंत्र का उच्चारण कर रहे हो तो यह अवश्य ध्यान दे कि सही ढंग से उच्चारण होना चाहिए। मंत्र में एक भी गलती आपके ऊपर भारी पड़ सकती है।
04: इस मंत्र का उच्चारण करते समय इसकी संख्या निर्धारित रखे। अगले दिन इनकी संख्या बढ़ाए मगर यह याद रखे कि संख्या कम नहीं होना चाहिए।
05: महामृत्युंजय मंत्र के जाप के दौरान उच्चारण होंठ से बाहर नहीं आना चाहिए। यदि इस मंत्र का अभ्यास नहीं है। तो इस मंत्र का उच्चारण धीमे धीमे स्वर में करना चाहिए।
06: महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण सिर्फ रुद्राक्ष की ही माला से करना चाहिए और मंत्र का उच्चारण या जाप करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख रखना चाहिए।
07: रुद्राक्ष की माला को गौमुखी में ही रख कर पुरे मंत्र के हो जानें के बाद ही गौमुखी से बाहर निकाले।
08: इस मंत्र का उच्चारण करते भगवान शंकर का अभिषेक करते रहना चाहिए।
09: महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए एक जगह निर्धारती रखे। रोज अपनी जगह बदलना नहीं चाहिए।
10: महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय एकाग्रता रखे और अपने मन को बिल्कुल भी भटकने नहीं देना चाहिए।
11: इस मंत्र का उच्चारण या जाप जितने भी दिन चल रहा हो उतने दिन मांसाहार भोजन को त्याग दे साथ ही किसी भी इंसान की बुराई या फिर झूठ नहीं बोले।
12: महामृत्युंजय मंत्र को करते समय आलस्य एवं उबासी को पास नहीं आने देना चाहिए।

किस समस्या में महामृत्युंजय मंत्र का कितने बार जाप करें –

  • महामृत्युंजय मंत्र का 1100 बार जाप करने से भय से मुक्ति मिल जाती है।
  • इस मंत्र को 11000 बार जाप करने से रोगों से छुटकारा मिल जाता है।
  • पुत्र की प्राप्ति के लिए, उन्नति प्राप्त करने के लिए एवं अकाल मृत्यु से बचने के लिए सवा लाख की संख्या में इस मंत्र का जाप करना अनिवार्य है।
  • यदि साधक पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यह साधना करें, तो मनवांछित फल की प्राप्ति की प्रबल संभावना रहती है।

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Surya Mantra in Hindi: रविवार को इन विशेष मंत्रों को पढ़े, प्रसन्न होंगे सूर्यदेव https://hrelate.com/astrology/surya-mantra-in-hindi/ https://hrelate.com/astrology/surya-mantra-in-hindi/#respond Fri, 27 Oct 2017 11:08:24 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16604 Surya Mantra – भारत देश के सभी धर्मों में भगवान सूर्य नारायण की पूजा को विशेष स्थान मिला है। प्राचीन उपासकों ने भगवान सूर्य नारायण को केवल प्रकाश देनेवाला ही नहीं माना है बल्कि...

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Surya Mantra – भारत देश के सभी धर्मों में भगवान सूर्य नारायण की पूजा को विशेष स्थान मिला है। प्राचीन उपासकों ने भगवान सूर्य नारायण को केवल प्रकाश देनेवाला ही नहीं माना है बल्कि इनके तेज से ज्ञान प्राप्ति, निरंतर गति से कर्मशीलता, पथ और दिशा से अनुशासन की प्रेरणा मिलती है।

प्रतिदिन भगवान सूर्य नारायण सारे जगत में अपनी रौशनी से ऊर्जा, चेतना एवं व्यवहार के साक्षत माने जाते है। अपने जीवन को सुखी एवं सफल बनाये रखने के लिए भगवान सूर्य नारायण की पूजा अर्चना करना चाहिए।

भगवान सूर्य-नारायण की पूजा अर्चना के लिए रविवार का दिन बहुत ही लाभकारी होता है। शास्त्रों में कहा गया है की भगवान सूर्य की उपासना करने से यश, सफलता, स्वास्थ्य, सम्मान, बुद्धि और धन की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष शास्त्र में भगवान सूर्य नारायण को सभी ग्रहों और नक्षत्रों का स्वामी कहा गया है। इनकी उत्तरायण गति और दक्षिणायण गति से संपूर्ण पृथ्वी प्रभावित होती है। आज के इस लेख में हम आपको बताने जा रहे है। भगवान सूर्य नारायण की पूजा अर्चना के दौरान उनके मंत्रो का उच्चारण करना बहुत ही लाभकारी होता है। यहां जानिए Surya Mantra in Hindi.

Surya Mantra: भगवान सूर्यदेव के मंत्र, सफलता और मानसिक शांति के लिए पढ़े

Surya Mantra
सूर्य देव के मंत्र

01: पुत्र की प्राप्ति के लिए भगवान सूर्य नारायण के इस मंत्र का उच्चारण करना बहुत ही लाभकारी होता है।
ऊँ भास्कराय पुत्रं देहि महातेजसे।
धीमहि तन्नः सूर्य प्रचोदयात्।।

02: हृदय रोग, नेत्र, पीलिया, कुष्ठ रोग एवं समस्त असाध्य रोगों को नष्ट करने के लिए भगवान सूर्य नारायण के इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
ऊँ हृां हृीं सः सूर्याय नमः।।

03: व्यवसाय में वृद्धि प्राप्ति करने के लिए भगवान सूर्य नारायण के इस मंत्र का उच्चारण करना बहुत ही उत्तम होता है।
ऊँ घृणिः सूर्य आदिव्योम।।

04: अपने शत्रुओं के नाश के लिए भगवान सूर्य नारायण के इस मंत्र का उच्चारण करना बहुत ही लाभकारी होता है।
शत्रु नाशाय ऊँ हृीं हृीं सूर्याय नमः

05: अपनी सभी प्रकार की मनोकामना की पूर्ण के लिए भगवान सूर्य नारायण के इस मंत्र का उच्चारण करना बहुत ही श्रेष्ठा माना गया है।
ऊँ हृां हृीं सः

06: सभी अनिष्ट ग्रहों की दशा के निवारण के लिए भगवान सूर्य नारायण के इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
ऊँ हृीं श्रीं आं ग्रहधिराजाय आदित्याय नमः

07: इस मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान सूर्य नारायण को चंदन अर्पण करना चाहिए –
दिव्यं गन्धाढ़्य सुमनोहरम्।
वबिलेपनं रश्मि दाता चन्दनं प्रति गृह यन्ताम्।।

08: इस मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान सूर्य नारायण को वस्त्रादि अर्पण करना चाहिए।
शीत वातोष्ण संत्राणं लज्जाया रक्षणं परम्।
देहा लंकारणं वस्त्र मतः शांति प्रयच्छ में।।

09: भगवान सूर्य की पूजा अर्चना के दौरान इस मंत्र का उच्चारण करते हुए उन्हें यज्ञोपवीत अर्पण करना चाहिए।
नवभि स्तन्तु मिर्यक्तं त्रिगुनं देवता मयम्।
उपवीतं मया दत्तं गृहाणां परमेश्वरः।।

10: इस मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान सूर्य नारायण को घृत स्नान कराना चाहिए।
नवनीत समुत पन्नं सर्व संतोष कारकम्।
घृत तुभ्यं प्रदा स्यामि स्नानार्थ प्रति गृह यन्ताम्।।

11: भगवान सूर्य नारायण की पूजा अर्चना के दौरान इस मंत्र का उच्चारण करते हुए उन्हें अर्घ्य समर्पण करना चाहिए।
ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं।
अर्घ्यं च फ़लं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतै युतम्।।

12: इस मंत्र का उच्चारण करते हुए प्रचंड ज्योति दिवाकर को गंगा-जल अर्पण करना चाहिए।
ॐ सर्व तीर्थं समूद भूतं पाद्य गन्धदि भिर्युतम्।
प्रचंण्ड ज्योति गृहाणेदं दिवाकर भक्त वत्सलां।।

13: इस मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान सूर्य नारायण को आसन अर्पण करना चाहिए।
विचित्र रत्न खन्चित दिव्या स्तरण सन्युक्तम्।
स्वर्ण सिंहासन चारू गृहीश्व रवि पूजिता।।

14: पूजा के दौरान भगवान सूर्य नारायण का आवाहन करते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
ॐ सहस्त्र शीर्षाः पुरूषः सहस्त्राक्षः सहस्त्र पाक्ष।
स भूमि ग्वं सब्येत स्तपुत्वा अयतिष्ठ दर्शां गुलम्।।

15: इस मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान सूर्य नारायण को दुग्ध से स्नान कराना चाहिए।
काम धेनु समूद भूतं सर्वेषां जीवन परम्।
पावनं यज्ञ हेतुश्च पयः स्नानार्थ समर्पितम्।।

16: भगवान सूर्य नारायण की पूजा अर्चना के दौरान इस मंत्र का उच्चारण करते हुए उन्हें दीप दर्शन कराना चाहिए।
साज्यं च वर्ति सं बह्निणां योजितं मया।
दीप गृहाण देवेश त्रैलोक्य तिमिरा पहम्।।

Surya Mantra – सूर्य नमस्कार मंत्र

ॐ मित्राय नम:
ॐ रवये नम:
ॐ सूर्याय नम:
ॐ भानवे नम:
ॐ खगाय नम:
ॐ पूष्णे नम:
ॐ हिरण्यगर्भाय नम:
ॐ मरीचये नम:
ॐ आदित्याय नम:
ॐ सवित्रे नम:
ॐ अर्काय नम:
ॐ भास्कराय नम:
ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम:

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Saraswati Mantra in Hindi: विद्या, बुद्धिमत्ता और भय निवारण के लिए करें इन मंत्रो का जाप https://hrelate.com/astrology/saraswati-mantra-in-hindi/ https://hrelate.com/astrology/saraswati-mantra-in-hindi/#respond Wed, 25 Oct 2017 09:37:11 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16595 Saraswati Mantra: माँ सरस्वती को ज्ञान, साहित्य, कला और स्वर की देवी कहा जाता है। माँ सरस्वती को सफ़ेद रंग बहुत ही प्रिय है। माँ सरस्वती ब्रह्मा की मानसपुत्री हैं। जो विद्या की अधिष्ठात्री...

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Saraswati Mantra: माँ सरस्वती को ज्ञान, साहित्य, कला और स्वर की देवी कहा जाता है। माँ सरस्वती को सफ़ेद रंग बहुत ही प्रिय है। माँ सरस्वती ब्रह्मा की मानसपुत्री हैं। जो विद्या की अधिष्ठात्री देवी कही जाती हैं।

इनका नामांतर ‘शतरूपा’ भी है। माँ सरस्वती के अन्य नाम भी हैं जैसे कि वाणी, वाग्देवी, भारती, शारदा और वागेश्वरी इत्यादि। हर वर्ष माघ माह की शुक्ल पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है।

हिन्दू धर्म में एक कथा के अनुसार जगत के रचियता परम ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि की रचना की थी।उस समय धरती पर चारों तरफ उदासी का वातावरण छाया हुआ था। इस वातावरण को मंगलमय बनाने के लिए जगत के रचियता ब्रह्मा जी ने अपने मुख से माँ सरस्वती को जन्म दिया था।

जैसे ही माँ सरस्वती ने वीणा बजाना शुरू किया उसी समय पूरी धरती पर लहलहा उठी थी। ज्ञान और वाणी के बिना संसार की कल्पना करना असंभव है। इन सब की एक ही देवी है; माँ सरस्वती। यदि आप भी अपने जीवन को सुखमय बनाना चाहते है तो Maa Saraswati Mantra का जाप कर सकते है।

Saraswati Mantra in Hindi: जानिए मां सरस्वती के अद्भुत मंत्र

Saraswati Mantra

maa saraswati mantra  aur माँ सरस्वती की पूजन

माँ सरस्वती की पूजा अर्चना इंसान के साथ ही देवता और असुर भी बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ करते है। माँ सरस्वती की पूजा के दौरान सभी लोग अपने अपने घरों में माँ सरस्वती की प्रतिमा को रखते हुए उनकी पूजा अर्चना करते हैं।

सरस्वती पूजन करते समय सबसे पहले माँ सरस्वती की प्रतिमा या फिर उनकी तस्वीर को सामने रखना चाहिए। इसके बाद कलश स्थापित करके भगवान गणेश और नवग्रह की विधिवत् पूजा करना चाहिए। इसके बाद माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करना चाहिए।

माँ सरस्वती की पूजा करते समय उन्हें सबसे पहले आचमन और स्नान कराए। इसके बाद माता को फूल, माला चढ़ाएं। माँ सरस्वती को सिन्दूर और अन्य श्रृंगार की वस्तुएँ भी अर्पित करना चाहिए। इसके बाद आरती करने के बाद माँ सरस्वती के मंत्र का जाप एवं उच्चारण करना चाहिए।

Saraswathi Mantra

देवी सरस्वती का मूल मंत्र निम्न है: ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः।
संपूर्ण सरस्वती मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।

01: परीक्षा से भय निकालने के लिए माँ सरस्वती के इस मंत्र का जाप करना चाहिए –
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वीणा पुस्तक धारिणीम् मम् भय निवारय निवारय अभयम् देहि देहि स्वाहा।

02: स्मरण शक्ति बढाने के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए –
ऐं नमः भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा।

03: उच्च शिक्षा और बुद्धिमत्ता के लिए माँ सरस्वती के इन मंत्रों का जाप करना चाहिए –
शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रिया तू।
श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।
ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।

04: कला और साहित्य के क्षेत्र में सफलता के लिए माँ सरस्वती के इस मंत्र का जाप करना चाहिए –
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमां आद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा पुस्तक धारिणीं अभयदां जाड्यान्धकारापाहां।
हस्ते स्फाटिक मालीकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धि प्रदां शारदां।।

05: सभी प्रकार की बाधाओं से निवारण प्राप्त करने के लिए माँ सरस्वती के इस मंत्र का जाप करना चाहिए –
ऐं ह्रीं श्रीं अंतरिक्ष सरस्वती परम रक्षिणी
मम सर्व विघ्न बाधा निवारय निवारय स्वाहा।

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Mantra to Become Rich: ये है धनवान बनने का सबसे निश्चित मंत्र https://hrelate.com/astrology/mantra-to-become-rich/ https://hrelate.com/astrology/mantra-to-become-rich/#respond Mon, 23 Oct 2017 09:30:09 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16573 किसी भी व्यक्ति की आर्थिक‌ ‌स्थिति कैसी होगी यह सब उस इंसान के कुंडली पर निर्भर करता है। इंसान की कुंडली में सूर्य की दशा उसकी आर्थिक‌ स्तिथि को प्रभावित करती है। जिस किसी...

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किसी भी व्यक्ति की आर्थिक‌ ‌स्थिति कैसी होगी यह सब उस इंसान के कुंडली पर निर्भर करता है। इंसान की कुंडली में सूर्य की दशा उसकी आर्थिक‌ स्तिथि को प्रभावित करती है।

जिस किसी भी व्यक्ति के कुंडली में सूर्य गृह मजबूत होता है तो उस इंसान का भाग्य भी मजबूत होता है। और जिसकी कुंडली में सूर्य की दशा अच्छी नहीं चल रही हो तो उन लोगों के साथ भाग्य भी अपना खेल खेलने लग जाता है।

यदि आपको ऐसा लग रहा है कि आपकी कुंडली में सूर्य की दशा अच्छी नहीं चल रही है तो आपको इसके लिए सुबह सुबह एक मंत्र का उच्चारण करना होगा। फिर देखिए यह मंत्र आपको अपना कैसा चमत्कार दिखाता है।

क्योंकि यदि आपकी कुंडली में सूर्य गृह मजबूत होता है तो आपको सब चीज़ मिल सकती है। आइये तो जानते है Mantra to Become Rich कौनसा  है।

Mantra to Become Rich: इसे नियमित पढ़ने से हो जायेंगे धनवान

सूर्य मंत्र और इसका जाप करने की विधि

आपको सबसे पहले सुबह उठकर भगवान सूर्य को जल अर्पित करना होगा। इस प्रक्रिया को आप हर रोज़ करे। जब भी भगवान सूर्य नारायण को जल अर्पित कर रहे हो तो आप उस जल में लाल गुलाब का फूल, सिंदूर और गुड़ को डाल ले।

फिर उसके बाद भगवान को जल अर्पित करे। भगवान सूर्य नारायण को जल चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप जरूर करे।

“ऊॅं सूर्याय नमः”

इस मंत्र का जाप कम से कम 11 बार तक अवश्य करें। फिर उसके बाद भगवान सूर्य को गुड़ का भोग लगाना न भूले। इसके बाद आप एक रोटी में गुड़ डालकर गाय को खिला दे ।

भगवान सूर्य नारायण से जुड़ी कुछ विशेष बाते भी जाने

  • जब ब्रह्म जी उत्पन्न हुए थे। तब उनके मुख से ॐ महाशब्द का उच्चारण हुआ था। यह ओमकार शब्द परमब्रह्म है। और यही भगवान सूर्य नारायण का शरीर है।
  • जगत के रचिता ब्रह्म जी के चार मुखों में से चार वेद आविर्भूत हुए और ओंकार के तेज से मिलकर जो रूप उत्पन्न होता है वह भगवान सूर्य नारायण हैं।
  • सारे जग में सबसे पहले भगवान सूर्य प्रकृत  हुए थे। इसलिए इनका नाम आदित्य पड़ा।
  • भगवान सूर्य को सविता नाम से भी जानते है। सविता का अर्थ होता है, सृष्टि करने वाला। इन्हीं से यह दुनिया उत्पन्न हुई और यही परमात्मा है।
  • नव ग्रहों में भगवान सूर्य को सबसे पहले पूजा जाता है।
  • भगवान सूर्य की दो भुजाएं है और दोनों हाथ कमल के फूल से सुशोभित है।
  • भगवान सूर्य का वर्ण लाल है। भगवान सूर्य नारायण के वाहन पर सात घोड़े है।
  • भगवान सूर्य के रथ में बारह अरे हैं। जो बारह महीनों के प्रतीक हैं, ऋतुरूप छ: नेमियां और चौमासे को इंगित करती तीन नाभियां हैं। चक्र, शक्ति, पाश और अंकुश इनके मुख्य अस्त्र हैं।
  • सिंह राशि के स्वामी भगवान सूर्य है। इनकी महादशा छ: वर्ष की होती है। इनकी प्रसन्नता के लिए इन्हें नित्य सूर्यार्घ्य देना चाहिए। भगवान सूर्य को खुश करने के लिए इस मंत्र को रोज जाप करना चाहिए। “ॐ घृणिं सूर्याय नम:”।
  • एक बार दैत्यों ने देवताओं को पराजित कर के उनके सारे अधिकार उनसे छीन लिए थे । तब देवमाता अदिति ने इस विपत्ति से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान सूर्य की उपासना की। उपासना से खुश होकर भगवान सूर्य ने उनको वरदान में यह दिया कि वे माँ अदिति के गर्भ से अवतार लेंगे। दैत्यों को पराजित कर सनातन वेदमार्ग की स्थापना की। इसलिए भी इन्हें आदित्य कहा जाता है।

महालक्ष्मी के इस मंत्र से भी होती है धन की प्राप्ति

आप सभी लोग यह जानते है कि धनवान बनने के लिए सबसे आवश्यक यह कि धन की देवी माँ लक्ष्मी की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे और वह आप से हमेशा प्रसन्न रहे। यदि माँ लक्ष्मी आप से प्रसन्न नहीं होगी तो आप धनवान कैसे बन सकते है।

यदि आप धनवान बनना चाहते है तो आपको माँ लक्ष्मी के बीज मंत्र की पूजा पूरे विधि विधान के साथ करनी होगी । इस मंत्र को करने से आप सभी पर माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी । माँ लक्ष्मी के बीज मंत्र इस प्रकार है:-

“ऊँ श्रीं महालक्ष्म्यै नम:”

जप विधि

  1. शुक्रवार के दिन सुबह उठकर नहाकर और साफ सुथरे वस्त्र पहनकर माँ लक्ष्मी की पूजा अर्चना करना चाहिए।
  2. पूजा के दौरान माँ लक्ष्मी को कमल का फूल, चंदन, केसर, पीला वस्त्र, इत्र इन सब वस्तु का पूजा में उपयोग करे और भोग में मिठाई चढ़ाए।
  3. पूजा करने के बाद घर में एकांत जगह पर कुश का आसन लगाकर उसमें बैठकर कमल गट्टे की माला को लेकर माँ लक्ष्मी के बीज मंत्र का जप 11 बार करें।
  4. हर शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी के बीज मंत्र को 11 बार जाप करने से आप सभी की हर प्रकार की समस्या का समाधान हो जाएगा।

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Sai Baba Mantra: जीवन के समस्त दुःख दूर करने के लिए करे इन मंत्रो का जाप https://hrelate.com/astrology/sai-baba-mantra-in-hindi/ https://hrelate.com/astrology/sai-baba-mantra-in-hindi/#comments Mon, 16 Oct 2017 11:06:18 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16561 साईं बाबा को उनके भक्त एक चमत्कारी पुरुष, एक अवतार और एक भगवान का स्वरुप भी मानते हैं। कुछ लोगों की नज़र में साईं स्वयं भगवान् हैं तो कुछ की नजर में वो भगवान्...

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साईं बाबा को उनके भक्त एक चमत्कारी पुरुष, एक अवतार और एक भगवान का स्वरुप भी मानते हैं। कुछ लोगों की नज़र में साईं स्वयं भगवान् हैं तो कुछ की नजर में वो भगवान् के अवतार हैं, वहीं कुछ साईं भक्त अपने साईं को एक फ़रिश्ते की तरह भी देखते हैं।

साईं बाबा को पुरातन काल से चली आ रही भारतीय भक्ति परंपरा के ही एक प्रतीक के तौर पर जाने जाते हैं। अपने श्रद्धालुओं और भक्तों के लिए साईं बाबा का प्रेम और स्नेह असाधारण, अतुलनीय तथा नि:स्वार्थ माना जाता है।

साईं बाबा के जन्मदिन और जन्मस्थान आदि से जुड़ी ज्यादातर जानकारियां आज भी अज्ञात हैं। बाबा के शुरूआती जीवन की ज्यादा जानकारियां मौजूद नहीं हैं। परन्तु इनका मूल स्थान महाराष्ट्र के शिरडी में है।

महाराष्ट्र स्थित शिरडी साईं बाबा का प्रमुख स्थल है जहां पर भक्त आज भी इनके दर्शन के लिए आते-जाते रहते हैं। जो भक्त शिरडी नहीं जा पाते वो अपने स्थान से ही बाबा की आराधना साईं बाबा के मन्त्रों को पढ़कर करते हैं। आइये जानते हैं Sai Baba Mantra.

Sai Baba Mantra – साईं को प्रसन्न करने के मंत्र

Sai Baba Mantra

साईं बाबा को हर धर्म और मत के लोग पूजते हैं। हर धर्म और मजहब में उनकी मान्यता बराबर है। हर धर्म के श्रद्धालु साईं बाबा में आस्था रखते हैं। साईं बाबा का मूल मन्त्र था “सबका मालिक एक है”. इस मूलमंत्र के माध्यम से उन्होंने धर्म और मतों में बटे समाज को एक करने की सफल कोशिश की थी। बाबा के शिरडी स्थित मंदिर में जहाँ उनकी मूरत की हिन्दू धर्म के लोग पूजा करते हैं तो इस्लाम मत के लोग वही स्थित साईं बाबा के मजार पर चादर चढ़ाते है।

वैसे तो साईं बाबा की पूजा किसी भी दिन और किसी भी वक़्त की जा सकती है परन्तु बृहस्पतिवार अर्थात गुरुवार के दिन साईं बाबा की विशेष रूप से उपासना की जाती है। साईं बाबा को गुरु के रूप में मानकर इनकी पूजा अर्चना करना सबसे बेहतर होता है। ऐसा करने से शिरडी के साईं बाबा आपकी हर तरह की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि कोई भी भक्त यदि साईं बाबा का व्रत लगातार 9 गुरुवार तक करता है तो साईंं बाबा उनकी मुराद जल्द ही पूर्ण कर देते है। यदि आप भी साईं बाबा का व्रत करने का सोच रहे है और अपनी मनकामनाओ को पूरा करना चाहते है तो आपको एक बात का विशेष ध्यान रखना होगा। साईं बाबा के व्रत को शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की तिथि में शुरू करना चाहिए। साईं बाबा के व्रत को उनका नाम लेने के साथ शुरू करना चाहिए।

साईं बाबा का व्रत कैसे करे?

  • साईं बाबा के व्रत के दौरान घर के मंदिर में सुबह शाम साईं बाबा की मूर्ति या फिर उनकी तस्वीर की पूजा अर्चना करे।
  • घर में पूजा के दौरान एक आसन पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर साईं बाबा की मूर्ति को रखें, फिर उसके बाद साईं बाबा की पूजा शुरू करे
  • पूजा के दौरान पीले फूल का प्रयोग करे।
  • पूजा के दौरान साईं बाबा की व्रत कथा पढ़े तथा मंत्रो का जाप करे।
  • पूजा करने के बाद सभी लोगों को बाबा का प्रसाद बांटें।

साईं बाबा के मंत्र

साईं बाबा का व्रत करते समय आप साईं बाबा के इन 12 मंत्रो का जाप कर सकते है। इन मंत्रो का पाठ करने से आपका जीवन सुखमय बनता है।

1. ॐ साईंं राम
2. ॐ साईंं गुरुवाय नम:
3. सबका मालिक एक है
4. ॐ साईंं देवाय नम:
5. ॐ शिर्डी देवाय नम:
6. ॐ समाधिदेवाय नम:
7. ॐ सर्वदेवाय रूपाय नम:
8. ॐ शिर्डी वासाय विद्महे सच्चिदानंदाय धीमहि तन्नो साईंं प्रचोदयात
9. ॐ अजर अमराय नम:
10. ॐ मालिकाय नम:
11. जय-जय साईंं राम
12. ॐ सर्वज्ञा सर्व देवता स्वरूप अवतारा

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Shree Ram Raksha Stotra: भय से मुक्ति दिलाये व हर विपत्ति से बचाये https://hrelate.com/astrology/shree-ram-raksha-stotra/ https://hrelate.com/astrology/shree-ram-raksha-stotra/#comments Wed, 04 Oct 2017 10:18:55 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16515 Ram Raksha Stotra in hindi – भगवान श्री रामचंद्र, भगवान विष्णु के 10 अवतार में से सातवें अवतार है। भगवान राम का जीवनकाल और उनके पराक्रम का वर्णन महर्षि वाल्मीकि के द्वारा रचित संस्कृत...

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Ram Raksha Stotra in hindi – भगवान श्री रामचंद्र, भगवान विष्णु के 10 अवतार में से सातवें अवतार है। भगवान राम का जीवनकाल और उनके पराक्रम का वर्णन महर्षि वाल्मीकि के द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य रामायण में लिखा है।

उन पर तुलसीदास ने भी भक्ति काव्य श्री रामचरितमानस रचा था। भगवान श्री राम को उत्तर भारत में सबसे ज्यादा पूजा जाता है। भगवान श्री राम एक आदर्श पुरुष हैं। भगवान श्री राम अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र थे।

राजा दशरथ के तीन और पुत्र थे, जिनका नाम लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न था। भगवान राम की पत्नी का नाम सीता था। माँ सीता को माँ लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। भगवान श्री राम के सबसे बड़े ओर प्रिय भक्त हनुमान जी है। भगवान राम ने राक्षस जाति के महाराजा लंका अधिपति रावण का वध किया है।

भगवान श्री राम की पूजा अर्चना करने का विशेष महत्व होता है। पंडितों का कहना है कि श्री राम का राम रक्षास्त्रोत का करना बहुत ही अच्छा होता है। इसको जो भी इंसान करता है, वह इंसान भय से मुक्त रहता है। आज आप Ram Raksha Stotra in Hindi और इसके महत्व के बारे में जानेंगे।

Shree Ram Raksha Stotra in Hindi:भगवान राम और हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए

Shree Ram Raksha Stotra

श्रीराम रक्षा स्त्रोत का महत्व

हिन्दू धर्म में कहा गया है कि एक दिन भगवान शंकर ने बुधकौशिक ऋषि को सपने में दर्शन देकर उसको रामरक्षास्त्रोत का पाठ सुनाया था। और प्रातः काल ही बुधकौशिक ऋषि ने उठ कर श्री राम रक्षा स्त्रोत को लिख दिया। इस स्त्रोत को संस्कृत में पाठ करने से अच्छा प्रभावी माना जाता है।

  1. राम रक्षास्त्रोत का पाठ करने से इंसान भय से मुक्त रहता है।
  2. जो भी इंसान इस श्री राम रक्षास्त्रोत को पढता है वह इंसान सभी प्रकार की विपत्तियों से दूर रहता है।
  3. यदि आप इसका पाठ नित्य रूप से करते है तो इससे आपके सभी प्रकार के कष्ट दूर होते है।
  4. जो भी इंसान राम रक्षास्त्रोत का पाठ करता है। वह इंसान लम्बे समय तक दीर्घायु, सुखी, संततिवान, विजयी तथा विनयसंपन्न होता है।
  5. जब भी किसी व्यक्ति द्वारा राम रक्षास्त्रोत का पाठ किया जाता है उसके प्रभवा से उस इंसान के चारों ओर सुरक्षा कवच बन जाता है। और उस व्यक्ति को सभी प्रकार के विपत्तियों से रक्षा मिलती है।
  6. राम रक्षास्त्रोत का पाठ करने से भगवान श्री राम के साथ ही उनके भक्त भगवान हनुमान जी भी बहुत प्रसन्न होते है।

॥ श्रीरामरक्षास्तोत्रम्‌ ॥

श्रीगणेशायनम: ।
अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य ।
बुधकौशिक ऋषि: ।
श्रीसीतारामचंद्रोदेवता ।
अनुष्टुप्‌ छन्द: । सीता शक्ति: ।
श्रीमद्‌हनुमान्‌ कीलकम्‌ ।
श्रीसीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे जपे विनियोग: ॥

॥ अथ ध्यानम्‌ ॥

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्दद्पद्‌मासनस्थं ।
पीतं वासोवसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्‌ ॥
वामाङ्‌कारूढसीता मुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं ।
नानालङ्‌कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम्‌ ॥

॥ इति ध्यानम्‌ ॥

चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्‌ ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्‌ ॥१॥

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्‌ ।
जानकीलक्ष्मणॊपेतं जटामुकुटमण्डितम्‌ ॥२॥

सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तं चरान्तकम्‌ ।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम्‌ ॥३॥

रामरक्षां पठॆत्प्राज्ञ: पापघ्नीं सर्वकामदाम्‌ ।
शिरो मे राघव: पातु भालं दशरथात्मज: ॥४॥

कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रिय: श्रुती ।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सल: ॥५॥

जिव्हां विद्दानिधि: पातु कण्ठं भरतवंदित: ।
स्कन्धौ दिव्यायुध: पातु भुजौ भग्नेशकार्मुक: ॥६॥

करौ सीतपति: पातु हृदयं जामदग्न्यजित्‌ ।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रय: ॥७॥

सुग्रीवेश: कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभु: ।
ऊरू रघुत्तम: पातु रक्ष:कुलविनाशकृत्‌ ॥८॥

जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्‌घे दशमुखान्तक: ।
पादौ बिभीषणश्रीद: पातु रामोSखिलं वपु: ॥९॥

एतां रामबलोपेतां रक्षां य: सुकृती पठॆत्‌ ।
स चिरायु: सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्‌ ॥१०॥

पातालभूतलव्योम चारिणश्छद्‌मचारिण: ।
न द्र्ष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभि: ॥११॥

रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन्‌ ।
नरो न लिप्यते पापै भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥१२॥

जगज्जेत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्‌ ।
य: कण्ठे धारयेत्तस्य करस्था: सर्वसिद्द्दय: ॥१३॥

वज्रपंजरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्‌ ।
अव्याहताज्ञ: सर्वत्र लभते जयमंगलम्‌ ॥१४॥

आदिष्टवान्‌ यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हर: ।
तथा लिखितवान्‌ प्रात: प्रबुद्धो बुधकौशिक: ॥१५॥

आराम: कल्पवृक्षाणां विराम: सकलापदाम्‌ ।
अभिरामस्त्रिलोकानां राम: श्रीमान्‌ स न: प्रभु: ॥१६॥

तरुणौ रूपसंपन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥१७॥

फलमूलशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥१८॥

शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्‌ ।
रक्ष:कुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघुत्तमौ ॥१९॥

आत्तसज्जधनुषा विषुस्पृशा वक्षया शुगनिषङ्‌ग सङि‌गनौ ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणा वग्रत: पथि सदैव गच्छताम्‌ ॥२०॥

संनद्ध: कवची खड्‌गी चापबाणधरो युवा ।
गच्छन्‌मनोरथोSस्माकं राम: पातु सलक्ष्मण: ॥२१॥

रामो दाशरथि: शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
काकुत्स्थ: पुरुष: पूर्ण: कौसल्येयो रघुत्तम: ॥२२॥

वेदान्तवेद्यो यज्ञेश: पुराणपुरुषोत्तम: ।
जानकीवल्लभ: श्रीमानप्रमेय पराक्रम: ॥२३॥

इत्येतानि जपेन्नित्यं मद्‌भक्त: श्रद्धयान्वित: ।
अश्वमेधायुतं पुण्यं संप्राप्नोति न संशय: ॥२४॥

रामं दूर्वादलश्यामं पद्‌माक्षं पीतवाससम्‌ ।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नर: ॥२५॥

रामं लक्शमण पूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुंदरम्‌ ।
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम्‌
राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथनयं श्यामलं शान्तमूर्तिम्‌ ।
वन्दे लोकभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम्‌ ॥२६॥

रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम: ॥२७॥

श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम ।
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम ।
श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥२८॥

श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥२९॥

माता रामो मत्पिता रामचंन्द्र: ।
स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र: ।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु ।
नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥३०॥

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा ।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनंदनम्‌ ॥३१॥

लोकाभिरामं रनरङ्‌गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्‌ ।
कारुण्यरूपं करुणाकरंतं श्रीरामचंद्रं शरणं प्रपद्ये ॥३२॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्‌ ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥३३॥

कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम्‌ ।
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम्‌ ॥३४॥

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसंपदाम्‌ ।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्‌ ॥३५॥

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसंपदाम्‌ ।
तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम्‌ ॥३६॥

रामो राजमणि: सदा विजयते रामं रमेशं भजे ।
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नम: ।
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोSस्म्यहम्‌ ।
रामे चित्तलय: सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥३७॥

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥३८॥

इति श्रीबुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥
॥ श्री सीतारामचंद्रार्पणमस्तु ॥

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जानिए भोजन के पहले ही क्यों चढ़ाना चाहिए सूर्य देव को जल https://hrelate.com/astrology/surya-jal-arpan-mantra/ https://hrelate.com/astrology/surya-jal-arpan-mantra/#comments Thu, 06 Jul 2017 05:24:46 +0000 https://hrelate.com/astrology/?p=16266 हमारे देश में कई ऐसी परम्पराएं है, जिनके पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक तर्क भी जुड़ा हुआ है। जैसे कि सूर्य भगवान् को जल चढ़ाना। यह तो आप भी जानते होंगे कि भारतीय परम्परा...

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हमारे देश में कई ऐसी परम्पराएं है, जिनके पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक तर्क भी जुड़ा हुआ है। जैसे कि सूर्य भगवान् को जल चढ़ाना।

यह तो आप भी जानते होंगे कि भारतीय परम्परा के अनुसार सुबह-सुबह स्नान के बाद भगवान सूर्य नारायण को जल चढ़ाकर ही भोजन करना चाहिए। यह परंपरा सदियों से हमारे यहाँ चली आ रही है। जिसे हमारी आज की जनरेशन ने भी कायम रखा है।

आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि विज्ञान की नजर में भी इसके कई फायदे है। यहाँ हम आपको सूर्य नारायण को जल चढ़ाने के धार्मिक और वैज्ञानिक तर्क के बारे में बता रहे है। साथ ही जाने Surya Jal Arpan Mantra.

Surya Jal Arpan Mantra:  जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक तर्क

Surya Jal Arpan Mantra

धार्मिक तर्क

भगवान सूर्य नारायण को जल चढ़ाने की परम्परा पुराने समय से चली आ रही है। हिन्दू धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान सूर्य को जल चढ़ाने से वे प्रसन्न होते है। साथ ही ऐसा करने से मनुष्य पर भगवान सूर्य का प्रकोप नहीं होता है और मनुष्य की राशि के दोष भी खत्म हो जाते है।

वैज्ञानिक तर्क

सूर्य उदय के समय सूर्य की किरणें अधिक तेज नहीं होती है। जो हमारे शरीर के लिए एक तरह की औषधि का काम करती है। जब आप सूर्य भगवान को जल चढ़ाते है तो जल चढ़ाते समय जल में से सूर्य की किरण छनकर हमारी आंखों और शरीर पर पड़ती है। जिससे हमारी आँखों की रौशनी तेज होती है।

साथ ही पीलिया, क्षय रोग और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम होता है। इसके अलावा सूर्य की किरणों में विटामिन डी होता है। जो हमारी हड्डियों को मजबूत बनाता है। सुबह के समय वातावरण शुद्ध होता है। जिससे हमें फ्रेश ऑक्सीजन मिलती है। वहीं सूर्य को जल चढ़ाने के बाद भोजन करने को धार्मिक दृष्टि से बहुत अहम माना गया है। यह हमारी भारतीय संस्कृति से बहुत पुराने समय से जुडी हुई है।

स्नान के बाद करें भोजन

धार्मिक तर्क

हिन्दू धर्म शास्त्र के अनुसार भगवान सूर्य को बिना जल चढ़ाये भोजन करना प्रतिबंधक माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि स्नान करके पवित्र होकर ही भोजन करना चाहिए। बिना स्नान करे भोजन को करना पशुओं के सामान माना जाता है और इसे अपवित्र माना गया है। इन सभी नियमों का पालन ना करने से देवी देवता खुश नहीं होते है।

वैज्ञानिक तर्क

अगर वैज्ञानिक दृस्टि से देखें तो स्नान करने से हमारे शरीर की सारी गन्दगी निकल जाती है। स्नान करने से हमारे शरीर में उत्साह और नई ताजगी पैदा होती है। जिससे हमें भूख ओर ज्यादा लगाती है और ऐसा करने से भोजन का रस हमारे शरीर के लिए पुष्टिवर्धक साबित होता है।

Surya Beej Mantra: इस मंत्र का करें जाप

जब भी आप सूर्य भगवन को जल अर्पण करें तो उनके बीज मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। ये है Surya Beej Mantra

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

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