Importance of Navratri: जानिए नवरात्रि का महत्व और उपवास के आहार

कल से नवरात्र पर्व शुरू हो गया है। हिन्दू धर्म में नवरात्रि के पर्व को तीन भाग में बाटा गया है। नवरात्रि पर्व के पहले तीन दिन में तमस को जीतने की साधना देता है, अगले तीन दिन राजस कहलाते है और आखिरी के तीन को सत्य को जीतने की साधना माना गया है।

माँ दुर्गा के यह नवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व है। माँ दुर्गा के अध्यात्म रूप की विशेष मान्यता मानी गई है।

नवरात्रि के दिन में किये गए प्रयास और शुभ संकल्प से माँ दुर्गा की कृपा प्राप्ति होती है। नवरात्रि के आते ही वर्षा ऋतु का मौसम क्षीण होने लगता है शीत ऋतु का आभास होना शुरू हो जाता है।

इस प्रकार यह त्यौहार ऋतु परिवर्तन को दर्शाता है। आज के लेख में आप Importance of Navratri और इन नो दिन किये गए व्रत के बारे में जानेंगे|

Importance of Navratri: क्यों मनाया जाता है नवरात्रि का पर्व

हिन्दुओ में नवरात्र का बहुत महत्व है| इस पर्व के समय शक्ति की साधना, पूजा अर्चना करने से प्रकृति शक्ति के रूप में कृपा करती है। इस प्रार्थना से सभी भक्तों के मनोरथ पूरे होते है।

नवरात्रि का यह पर्व साल में चार बार आता है। चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ माह में यह त्यौहार मनाया जाता है। कहा जाता है कि साल भर में चारो नवरात्रि की साधना प्रायः गुप्त साधक ही किया करते हैं। जो जप, ध्यान और माता के आशीर्वाद से अपनी साधना को सिद्धि में बदलना चाहते हैं।

माँ की आराधना

नवरात्रि के दिनों माँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती इन देवियों के स्वरूप की पूजा, अर्चना और आराधना की जाती है। माँ शब्द केवल आसमान में कहीं पर भी स्थित नही हैं। उसे कहते है कि;

“या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधीयते” – “सभी जीव जंतुओं में चेतना के रूप में ही माँ / देवी तुम स्थित हो”

नवरात्रि के इस पावन त्यौहार में हम सभी लोग माँ दुर्गा के अलग अलग रूपों को निहारते है। जिस प्रकार कोई नवजात शिशु अपनी माँ के गर्भ में 9 माह तक रहता है। उसी प्रकार से हम सभी लोग अपने aap में परा प्रकृति में रहकर – ध्यान में मग्न होने का इन 9 दिनों का महत्व है। इस मग्न से बाहर निकलते हुए सृजनात्मकता का प्रस्सपुरण जीवन में आने लगते है।

ऐसे करें नवरात्र में उपवास

नवरात्रि के इस पावन त्यौहार में आप सभी लोग उपवास तो करते ही होंगे। उपवास के लिए भी कुछ नियम होते है। इन नियमों का पालन करते हुए आप लोगों को अपनी हेल्थ का भी ध्यान रखना होता है कि शरीर में कोई कमी न आ जाए

नवरात्रि – 1 से 3 दिन तक

नवरात्रि के उपवास दौरान पहले, दूसरे और तीसरे दिन इन दिनों में आप सभी लोग फल का सेवन कर सकते है। फल में सेब, केला, चीकू, पपीता, तरबूज, और अंगूर यह फल ले सकते है। और इसके अलावा आप आंवला का रस और नारियल पानी भी उपवास में ले सकते है।

नवरात्रि – 4 से 6 दिन तक

नवरात्रि के चौथे,पंचमी और छटवें दिन में पारंपरिक नवरात्रि आहार, फलों का रस, छाछ और दूध के साथ एक समय भोजन ले सकते है।

नवरात्रि – 7 से 9 दिन

नवरात्रि के अंतिम दिनों में आप सभी लोग अपने उपवास में पारंपरिक नवरात्र आहार ले सकते है। इस प्रकार का आहार लेने से आप लोगों के स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा होगा।

यदि आपको कोई स्वास्थय संबंधी परेशानी हो तो पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेले और याद रखे कि आरामदायक स्थिति के साथ जितना कर सके उतना ही करे|

नवरात्रि का आखिरी दिन – विजयोत्सव

नवरात्रि का आखिरी दिन विजयदशमी का होता है। इस दिन असत्य पर सत्य की जीत हुई थी। इस दिन सभी लोग काम, क्रोध, मद, मत्सर, लोभ आदि जितने भी राक्षशी प्रवृति है उनका हनन करते हुए इस पर्व का उत्सव मनाते है। अपने मन से कलह को हटाते हुए अपने जीवन में उद्देश्य व आदर्श को निखारने के लिए हर किसी को यह उत्सव मानना चाहिए|

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