Krishna Chalisa in Hindi: श्री कृष्ण चालीसा पाठ की विधि और महत्व

भगवान श्री कृष्ण त्रिदेवों में से एक भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं। भगवान श्री कृष्ण समस्त लोगों में मौजूद जीवों को भोग और मोक्ष प्रदान करने वाले सबसे प्रमुख देवता कहलाते हैं। जब जब धरती पर अधर्म का जन्म होता है तब तब भगवान श्री कृष्ण किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धरती को पाप से मुक्ती दिलाते हैं।

भगवान श्री कृष्ण के अवतार और उनके चमत्कार के बारे में श्रीमद भागवत पुराण और पदम् पुराण में पूरे विस्तार से जानकारी दी गई है। भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया है। इन सभी अवतारों में भगवान श्री राम और श्री कृष्ण के अवतार को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है।

भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत में अपनी अहम् भूमिका निभाई थी। महाभारत में जब पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध हुआ था, तब युद्ध के दौरान भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के सारथी बने हुए थे। इसी दौरान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्ध भूमि में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।

जो भी इंसान भक्ति भाव से श्री कृष्ण की पूजा अर्चना और वन्दना करता है। उस इंसान को सुख, शांति और सफलता की प्राप्ति होती है। श्री कृष्ण वंदना के लिए लोग “हरे कृष्णा हरे कृष्णा” का जाप करते हैं। साथ ही श्री कृष्ण जी की पूजा में उनकी चालीसा का पाठ करना भी बहुत ही महत्त्वपूर्ण माना गया है। यहाँ पढ़िए Krishna Chalisa in Hindi.

Krishna Chalisa in Hindi – कृष्ण चालीसा पढ़े और अपना उद्धार करें

आप किसी भी भगवान की चलिसा पढ़ें उसका सकारात्मक प्रभाव हमारे जीवन में जरूर पड़ता हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आसान व् कम समय में पढ़े जाने वाली चालीसा का पाठ बहुत प्रभावी होता है। ज्यादातर श्रद्धालुओं को संस्कृत के मन्त्रों का जाप और उच्चारण करते समय परेशानी का सामना करना पड़ता है, उन लोगों के लिए भी आराधना की सबसे बेहतर विधि चालीसा का पाठ करना होता है।

चालीसा का महत्व

  • सरल और आम भाषा में की जाने वाली भगवान की आराधना को ही चालीसा पाठ कहा जाता है।
  • इसके द्वारा भक्त अपने ईश्वर या इष्ट को खुश करने का प्रयास करता है।
  • ज्यादातर लोग अपनी कठिनाइओं के निदान की आकांक्षा में चालीसा का पाठ करते हैं।
  • इसे चालीसा कहे जाने का मुख्य कारण इसमें मौजूद 40 पंगतिया होती हैं।
  • सरल और आम भाषा में होने के कारण इसे बड़ी आसानी से कोई भी पढ़ सकता है।
  • चालीसा में लिखे अलग अलग पंगतियों का अलग अलग और व्यापक महत्व होता है।

चालीसा को पढ़ने की उत्तम विधि

चालीसा का पाठ भगवान को प्रसन्न करने की सबसे आसान विधि में से एक होती है। केवल वासुदेव श्री कृष्णा ही नहीं बल्कि भगवान शंकर, बजरंगबली, माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी आदि को प्रसन्न करने के लिए भी चालीसा उपलब्ध है। परन्तु कम लोग ही चालीसा पाठ करने की सही विधि जानते हैं। आइये जानते हैं चालीसा पाठ की उत्तम विधियों से जुड़े तथ्य।

  • सबसे पहले तो चालीसा पाठ के पहले जिनकी चालीसा पढ़ी जा रही है उनकी तस्वीर या मूर्ती अपने सामने जरूर रख लें।
  • श्री कृष्ण चालीसा के पाठ के लिए भगवान श्री कृष्ण की मूर्ती या चित्र के समक्ष बैठ जाएँ।
  • मूर्ती के सामने एक धातु के जलपात्र में जल भर कर सामने रख लें।
  • इसके बाद ही चालीसा का पाठ करें।
  • तीन बार चालीसा पाठ को दोहराना सर्वोत्तम माना जाता है।
  • चालीसा पाठ के बाद सामने रखे जलपात्र के जल को प्रसाद रूप में ग्रहण करें।
  • इस बात की ध्यान रखना चाहिए कि आपके द्वारा की जाने वाली चालीसा पाठ का समय हर दिन एक हो।
  • यात्राओं के समय या फिर सोते हुए भी चालीसा का पाठ किया जा सकता है, पर ऐसा तभी करें जब आप विशेष स्थिति में पाठ करने से अक्षम हों।
  • चालीसा में लिखी पंगतियों का जाप आप मन में भी कर सकते है।
  • परन्तु अगर चालीसा पाठ गा कर या फिर बोल कर किया जाए तो उसे सर्वोत्तम माना जाता है।
  • श्री कृष्ण जी की चालीसा को किसी दिवस में बांधा नहीं गया है, इसलिए इसका पाठ आप सप्ताह के किसी भी दिन कर सकते हैं।

श्री कृष्ण चालीसा

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