CPR Guidelines: प्राथमिक उपचार द्वारा बचाये रोगी की जान

कभी कभी आपने देखा या सुना होगा कि किसी व्यक्ति की हार्ट अटैक या दम घुटने के कारण अस्पताल ले जाते वक्त ही मृत्यु हो गई क्योंकि उसे समय पर उपचार नहीं मिल पाया।

ऐसे समय में यदि व्यक्ति को प्राथमिक उपचार मिल जाता है तो उसकी जान बच जाती है। इसके लिए इस बात की जानकारी होना आवश्यक है कि जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक जैसी समस्या हो रही है उसे एम्बुलेंस आने तक या फिर डॉक्टर के पास पहुंचने तक जो समय रहता है उसमे क्या करना चाहिए? इसके लिए ही लोगो को CPR की ट्रेनिंग दी जाती है।

यह जरुरी नहीं है कि केवल डॉक्टर ही लोगो की जान बचा सकते है आप भी व्यक्ति की थोड़ी सहायता करके उसे एक नया जीवन प्रदान कर सकते है। CPR के जरिये आप व्यक्ति की जान बचा कर उसकी मदद कर सकते है।

CPR में क्या क्या किया जाता है और कैसे किया जाता है इसके बारे में सभी लोगो को जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए जानते है CPR Guidelines.

CPR Guidelines: कैसे होता है प्राथमिक उपचार यानि सीपीआर

क्या होती है CPR?

  • रिससिएशन कार्डियोपल्मोनरी (Cardiopulmonary Resuscitation) इसे संक्षेप में CPR कहा जाता है।
  • CPR तब की जाती है जब किसी व्यक्ति को अचानक कोई समस्या आती है जैसे बिजली का करेंट लगना, हार्ट अटैक, बेहोसी आदि।
  • ऐसे व्यक्तियों को अस्पताल ले जाने के दौरान जो समय रहता है उसमे सीपीआर का सहारा लिया जाता है ताकि व्यक्ति की समय रहते जान बचाई जा सके।
  • यह एक प्राथमिक चिकित्सा होती है जिसे संजीवनी क्रिया के नाम से भी जाना जाता है।

कब कब देते है CPR

बहुत सी ऐसी समस्याएं होती है जिनके लिए CPR की मदद ली जा सकती है जैसे –

  • सांस लेने में असमर्थ होने पर
  • अस्थमा आने पर
  • बेहोश होने पर
  • हार्ट अटैक
  • बिजली का झटका लगने पर
  • दम घुटने पर
  • पानी में डूबने पर
  • जहरीली गैसों को सूंघने पर

कैसे करते है मदद?

  • यदि किसी मरीज को दिल का दौरा पड़ा है तो उसकी मदद के लिए सबसे पहले तो खुद को घबराना नहीं चाहिए और संयम के साथ काम लेना चाहिए।
  • आपके आसपास किसी को दिल का दौरा पड़ने पर सबसे पहले एम्बुलेंस या डॉक्टर को सुचना देनी चाहिए।
  • अक्सर देख जाता है कि जब कभी किसी व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ता है तो उसे लोग घेर लेते है।
  • अगर आपके आसपास भी कुछ ऐसा हो रहा है तो व्यक्ति को भीड़ से दूर कर दे ताकि उसे खुली हवा मिल सके।
  • यदि उसे स्थान पर बैठने के लिए कुछ है तो उसे आराम से उस पर बैठा दे। इसके बाद रोगी के कपड़ो को चेक करे की कई वह कसे हुए तो नहीं है। यदि ऐसा है तो कपड़ो को ढीला कर दे ताकि उसे घुटन का अनुभव न हो और वह अच्छी तरह से साँस ले सके।
  • यदि रोगी को यह समस्या पहले से ही है और वह इसके लिए कोई दवाएं लेता है तो उसे दवा जरूर दे।
  • इतना करने के बाद भी यदि रोगी बेहोश हो गया है तो उसे सबसे पहले जमीन पर लिटा दे और फिर CPR की प्रक्रिया को शुरू करे।

कैसे करे CPR से उपचार?

  • यदि रोगी बेहोश हो गया है या उसकी सांसे रुक गयी है तो सबसे पहले रोगी को जमीन पर सीधे लिटा दे।
  • जमीन पर लेटाने के बाद रोगी के सिर को पीछे की तरफ ले जाए और ठोड़ी को ऊपर की ओर उठा दे।
  • व्यक्ति के छाती के निचले हिस्से पर कभी कभी जोर से दबाब देने पर भी ह्रदय की गति पुनः चलने लगती है।
  • यदि ऐसा करने पर भी कोई लाभ नहीं हो पा रहा है तो इसके बाद रोगी की बाए हाँथ हथेली को छाती के बीच की हड्डी के निचले भाग पर रख दे और दाये हाँथ की हथेली को बाये हाथ के ऊपर रखे ताकि 90 डिग्री का कोण बन सके।
  • इतना करने के बाद छाती की हड्डी को नीचे की तरफ झटके से दबाये। इस तरह इस प्रक्रिया को एक मिनट में 30 बार करे इससे ह्रदय में स्पंदन होने लगता है।
  • आपको बता दे कि इसके साथ साथ कृत्रिम साँस लेना भी आवश्यक होता है इसके लिए आप एक अन्य व्यक्ति की भी मदद ले सकते है ताकि एक ही समय पर दोनों कार्य आसानी से किये जा सके।
  • कृत्रिम साँस की क्रिया में एक व्यक्ति अपने अंदर जोर से साँस लेकर फेफड़ो में हवा भरता है फिर उसके बाद उस हवा को रोगी के मुँह पर रख कर वह उसके अंदर छोड़ देता है।
  • साथ ही इस प्रक्रिया में रोगी की नाक को अंगूठे और पहली अंगुली की सहायता से बंद रखना चाहिए व् मुँह को खुला रखना जरुरी होता है।
  • इस प्रक्रिया को एक मिनट में 15 बार दोहराना चाहिए।
  • इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जब भी आप यह दोनों प्रक्रिया कर रहे है तो उस समय रोगी की नाड़ी को भी चेक करते रहे।
  • ऐसा करने से नाड़ी में खून का संचार होने लगता है और व्यक्ति बेहोशी से बाहर भी आ सकता है और उसकी सांसे चलने लगती है।
  • इस तरह आप अपने थोड़े से प्रयास के द्वारा व्यक्ति की जान को बचा सकते है।

यदि रोगी कोई नवजात बच्चा हो

  • यदि रोगी छोटा या 1 साल से कम उम्र का बच्चा है तो उसे सीपीआर की प्रक्रिया करते समय सावधानी रखनी होती है।
  • उसके छाती पर दबाब देने के लिए केवल 2 से 3 अंगलियों का ही उपयोग करे।
  • साथ की कृत्रिम दबाब और छाती का दबाब व्यस्क व्यक्ति से कम ही रखे।

ध्यान रखे योग्य जानकारी

  • इस तरह की कोई भी समस्या आने पर रोगी को कोई अन्य दवाएं नहीं देना चाहिए।
  • रोगी को अकेला कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
  • भीड़ से दूर रखना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी के द्वारा आप भी अपने आस पास इस प्रकार से पीड़ित व्यक्ति की जान को समय रहते बचा सकते है।

नोट – उपरोक्त जानकारी को आप अपने परिचित को भी बता सकते है ताकि वह भी किसी व्यक्ति की मदद कर पाए। ध्यान रखे की जानकारी ही बचाव है। आपकी सहायता किसी के काम आ सकती है।

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