Marriage in Same Gotra: आखिर क्यों नहीं करना चाहिए एक गौत्र में शादी

विवाह जीवन का एक अहम् हिस्सा है। हिन्दू समाज में विवाह का बहुत महत्व होता है। इसलिए हिन्दू समाज में विवाह से जुडी कई परम्पराये चली आ रही है। उसमे से एक है अपने गोत्र में शादी न करना।

इसके अलावा मां, नानी और दादी के गौत्र में भी विवाह नहीं किया जाता है। अलग अलग समुदायों में गोत्रो की संख्या अलग अलग है। जिसे लेकर भी कई मान्यताये है। क्यूंकि कही पर 4 गोत्रो को टाला जाता है तो कहीं पर 3 गोत्रो को।

गौत्र शब्द का मतलब होता है वंश/कुल। गोत्र परम्परा का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को उसके मूल प्राचीनतम व्यक्ति से जोड़ना है|

जैसे की यदि व्यक्ति अपना गोत्र गौतम बताता है तो इसका अभिप्राय यह है की उसकी पीडी वैदिक ऋषि गौतम से शुरू होती है या ऐसा समझ लीजिये की वह व्यक्ति ऋषि गौतम की पीढ़ी में जन्मा है| आइये Marriage in Same Gotra के बारे में विस्तार से जानते है|

Marriage in Same Gotra: शास्त्रों में एक गोत्र में विवाह की मनाही क्यों

Marriage in Same Gotra

तीन गोत्र छोड़कर करना होता है विवाह

  • हिंदू धर्म के अनुसार इंसान को हमेशा तीन गोत्र को छोड़कर ही शादी करनी चाहिए।
  • जिसमे शामिल है इंसान का गोत्र वो उसका पहला गोत्र होता है।
  • दूसरा गोत्र उसकी मां का होता है और तीसरा गोत्र दादी का होता है इसलिए सदैव तीन गोत्र को छोड़कर ही शादी करनी चाहिए।
  • मान्यता चली आ रही हैं कि एक ही गोत्र का लड़का और लड़की एक-दूसरे के भाई-बहन होते हैं और भाई बहन में शादी करना तो दूर इस बारे में विचार करना भी अपराध माना जाता है।

एक गोत्र में विवाह करने पर संतान में आते है अवगुण

  • एक ही वंश में उत्पन्न लोगों का विवाह करना हिंदू धर्म में जुर्म है।
  • ऋषियों के अनुसार गौत्र परंपरा को भंग कर विवाह करने से उनकी संतान में कई अवगुण और रोग उत्पन्न होते हैं।
  • माना जाता है की यदि फिर भी किसी ने एक गोत्र में विवाह कर लिया है तो उनके बच्चों में रचनात्मकता की कमी हो जाती है।
  • संतान अनुवांशिक दोष के साथ उत्पन्न होती है।
  • ऐसे दंपत्तियों की संतान में एक सी विचारधारा, पसंद, व्यवहार आदि होने के कारण कोई नयापन नहीं होता।

इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

  • इसका एक वैज्ञानिक कारण भी है, कई शोधों से पता चला है की व्यक्ति को जेनेटिक बीमारी न हो उसके लिए एक इलाज है ‘सेपरेशन ऑफ जींस।
  • इसका मतलब है की अपने नजदीकी रिश्तेदारो में विवाह नहीं करना चाहिए।
  • क्यूंकि जींस रिश्तेदारों में अलग नहीं हो पाते है जिसके कारण जींस से संबंधित बीमारियां जैसे कलर ब्लाईंडनेस आदि होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
  • हो सकता है की हमारे पूर्वजो ने पहले ही जींस और डीएनए की खोज कर ली थी इसलिए उन्होंने शास्त्रों में इसे वर्जित माना है।

होते है आठ गौत्र ऋषि

  • सामान्यतः आठ ऋषियों के नाम पर मूल आठ गौत्र ऋषि माने जाते हैं, जिनके वंश के पुरुषों के नाम के आधार पर अन्य गौत्र बनाए गए।
  • महाभारत के शांतिपर्व में मूल चार गौत्र का वर्णन किया गया है, गिरा, कश्यप, वशिष्ठ और भृगु|
  • जबकि जैन ग्रंथों में 7 गौत्रों का उल्लेख है- कश्यप, गौतम, वत्स्य, कुत्स, कौशिक, मंडव्य और वशिष्ठ।
  • इनमें हर एक के अलग-अलग भेद बताए गए हैं जैसे कौशिक-कौशिक कात्यायन, दर्भ कात्यायन, वल्कलिन, पाक्षिण, लोधाक्ष, लोहितायन|

गौत्र के साथ प्रवर का भी रखना होता है ध्यान

  • विवाह निश्चित करते समय गौत्र के साथ-साथ प्रवर का भी ध्यान रखना चाहिए।
  • प्रवर भी प्राचीन ऋषियों के नाम है पर अंतर यह है कि गौत्र का संबंध रक्त से है, जबकि प्रवर का संबंध आध्यात्मिकता से है।