तरक्की की सीढ़ियां चढ़ना चाहते है तो धारण करें नीलम रत्न

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नीलम एक ऐसा रत्न है। जो वाकई चमत्कारी है। इस रत्न को पहनने से मन में तेजी आती है और इसको पहनने से व्यवहार में भी बदलवा आता है।

ऐसा कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति नीलम को धारण करता है, वो तरक्की की नई सीढ़ियों को चढ़ाता चला जाता है। वहीं इसका एक सत्य यह भी है कि नीलम किसी को भी राजा और राजा को भी रंक बनाने की क्षमता रखता है।

इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी रत्न को धारण करने से पहले योग्य ज्योतिष से परामर्श जरूर ले लेना चाहिए। आइये अब हम जानते है Neelam Stone Effects.

Neelam Stone Effects: इन बातों का रखें ख्याल

Neelam Stone Effects

 

  • मेष, वृष, तुला एवं वृश्चिक लग्न वाले लोगों को नीलम धारण करने से बहुत फायदा होता है और उनका भाग्य उदय होता है।
  • यदि किसी की जन्म कुंडली में शनि चौथे, पांचवें, दसवें या ग्यारहवें भाव के घर में हो तो उसे नीलम रत्न पहनना चाहिए।
  • अगर किसी व्यक्ति की राशि में शनि षष्ठेश या अष्टमेश भाव में हो तो आपके लिए नीलम धारण करना उत्तम होगा।
  • यदि शनि अपने भाव से छठे या आठवें स्थान पर स्थित हो तो नीलम फलदायी माना जाता है।
  • अगर आपकी कुंडली में किसी भी ग्रह की महादशा में शनि की अंतर्दशा चल रही है, तो आपको नीलम रत्न जरूर धारण करें।
  • यदि आपकी राशि में शनि सूर्य के साथ हो, सूर्य की राशि में हो या सूर्य से दृष्ट हो तो भी नीलम पहनना लाभदायक है।
  • अगर किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में शनि वक्री, अस्तगत या दुर्बल हो और शुभ भावों का प्रतिनिधित्व कर रहा हो तो नीलम धारण करना श्रेष्ठ माना जाता है।
  • जिनकी राशि में शनि ग्रह प्रधान हो उन लोगों को नीलम का पहनना बहुत ही जरुरी होता है।
  • जो लोग क्रूर कर्म करते है। उन लोगों के लिए नीलम रत्न उपयोगी माना गया है।
  • शनि मकर तथा कुंभ राशि का स्वामी है। यदि एक राशि श्रेष्ठ भाव में और दूसरी अशुभ भाव में हो तो नीलम न पहनें। इसके विपरीत अगर शनि की दोनों राशियां श्रेष्ठ भावों का प्रितिनिधत्व करती हों, तो नीलम धारण करना श्रेष्ठ होता है।

नीलम के उपरत्न

सभी रत्नों के उपरत्न भी होते है। अगर आप नीलम नहीं खरीद पा रहे है तो उसके उपरत्न को भी धारण कर सकते है। नीलम के दो उपरत्न है लीलिया और जमुनिया –

लीलिया

यह रत्न गंगा और यमुना के तट पर मिलता है। यह हल्के नीले रंग का हल्की रक्तिम ललाई का होता है।

जमुनिया

इस रत्न का रंग पके जामुन जैसा होता है और यह हल्के गुलाबी और सफेद रंग में भी मिलता है। यह बिलकुल साफ, चिकना और पारदर्शी जैसा होता है। यह रत्न भारत में हिमालय के क्षेत्र पर पाया जाता है।

असली नीलम की पहचान

Nilam Stone के विक्रेता विनीश पटेल का कहना है कि नीलम 35 रुपए से 50 हज़ार रुपए प्रति कैरेट तक होता है। अगर आप लोगों को नीलम को पहचानने की थोड़ी सी भी समझ है, तो रत्न खरीदारी करने पर ठगे जाने की संभावना कम होगी। इसके अलावा आप कुछ टेस्ट के जरिये भी इसकी पहचान कर सकते है। अच्छे क्वालिटी के नीलम को दूध में डाल दे दो उसका रंग भी नीला दिखाई देता है।

अगर आप पानी से भरे कांच के गिलास में नीलम को रखते है, तो उस पानी के ऊपर नीली किरण दिखाई देती है। असली नीलम की एक पहचान यह भी है कि वह चमकीला और चिकना होता है। इसका रंग मोर के पंख के समान नीला होता है। यह रत्न पूरे तरह से पारदर्शी होता है और आप इसके ऊपर रौशनी डालेंगे तो यह नीले कलर की चमक छिटकता है।

नीलम धारण करने का नियम

नीलम को धारण करने वाले व्यस्क व्यक्ति को 5, 7, 9 अथवा 12 रत्ती का नीलम धारण करना होता है। इस रत्न को पहनने से पहले शनि मंत्र “ओम् प्रां प्रीं प्रौं सः शनिश्चराय नमः” का अधिक से अधिक बार जाप कर सकते है।

नीलम के प्रकार

नीलम को खरीदने से पहले और उसकी पहचान करने से आप सब को यह जान लेना चाहिए कि नीलम कितने प्रकार का होता है। इससे आपको नीलम खरीदना आसान हो जायगा। निर्माण के आधार पर संसार में पाए जाने वाले नीलम रत्न दो प्रकार के होते है। जिनके नाम है जल और इंद्र नीलम।

जल नीलम

इस रत्न की पहचान यह है कि जल नीलम के चारों तरफ नीली चमक दिखाई देती है और इसके बीच में सफेद रंग की चमक देखने को मिलती है। इस नीलम को जल नीलम कहते है।

इन्द्र नीलम

यह रत्न चारो तरफ से गहरे रंग का होता है और इस रत्न के बीच में हल्का सा नीला रंग की चमक रहती है। इस नीलम का नाम इंद्र नीलम है। इसको शुक्र नीलम भी कहते है।


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