जानिए राशियों के अनुसार शिवजी को प्रसन्न करने के उपाय

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जैसे ही सावन की शुरुआत होती है भक्तगण शिव को प्रसन्न करने के प्रयास में जुट जाते है। शिव कल्याणकारी देवता है, उन्हें भोले भंडारी भी कहा जाता है।

क्यूंकि कोई भी भक्त थोड़े से प्रयास से उन्हें प्रसन्न कर सकता है, बस शिव को कुछ भी अर्पण करने का भाव होना चाहिए।

सावन के महीने में भगवान शिवजी को प्रसन्न करना ज्यादा सरल है क्योंकि शिव को सावन प्रिय है। शिव को प्रसन्न करने के लिए यदि आप अपनी राशि के अनुसार कुछ अर्पण करते है तो यह आपके लिए लाभकारी होता है।

अभी श्रावण का महीना चल रहा है तो आज के लेख में हम आपको बताएंगे कि किस राशि वाले व्यक्ति को शिवजी पर क्या चढ़ाना चाहिए ताकि शिव जी प्रसन्न हो जाये। आइये जाने Shiv Ko Prasan Karne Ke Upay.

Shiv Ko Prasan Karne Ke Upay: शिव को प्रसन्न कैसे करे व बेलपत्र कैसे चढ़ाये

Shiv Ko Prasan Karne Ke Upay

मेष– इस राशि वाले जातक शिव जी को लाल चन्दन व लाल रंग के फूल चढ़ायें तथा नागेश्वराय नमः का जाप करें।

वृष– शिव को प्रसन्न करने के लिए चमेली के फूल चढ़ायें तथा रूद्राष्टाकर का पाठ करें।

मिथुन– मिथुन राशि के लोग धतूरा तथा भांग चढ़ायें साथ में पंचाक्षरी मन्त्र का जाप करें।

कर्क– रूद्राष्टाधयी का पाठ करें। भांग मिश्रित दूध से शिव जी का  अभिषेक करेंI

सिंह– कनेर के लाल रंग फूल शिव जी को अर्पित करे तथा शिव चालीसा का पाठ करें।

कन्या– शिवजी को बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि चढ़ायें और पंचाक्षरी मन्त्र का नियमित रूप से जाप करें।

तुला– शिव के सहस्त्रनाम का जाप करें। मिश्री युक्त दूध से शिव का अभिषेक करेंI

वृश्चिक– गुलाब का फूल और बिल्वपत्र की जड़ शिव जी को चढ़ायें और शिव के रूद्राष्टक का पाठ करें।

धनु– शिवाष्टक का पाठ करें। शिव जी को पीले फूल अर्पित करें एंव खीर का भोग शिव को लगायेंI

मकर– शिव जी को फूल, धूतरा, भांग एंव अष्टगंध अर्पित करे तथा पार्वतीनाथाय नमः का जाप करें।

कुम्भ– गन्ने के रस से शिव जी का अभिषेक करें एंव शिवाष्टाक का पाठ करें।

मीन– चन्दन की माला से 108 बार पंचाक्षरी मन्त्र का जाप करें। शिव जी पर पंचामृत,दूध,दही व पीले फूल चढ़ायेंI

बेलपत्र तोड़ने और शिवलिंग पर चढ़ाने का सही तरीका

शिवलिंग पर गंगाजल के साथ-साथ बेलपत्र भी चढ़ाने का विधान है| शिव को बेलपत्र अर्पित करते समय और इसे तोड़ते समय कुछ खास नियमों का पालन करना आवशयक होता है| माना जाता है कि बेलपत्र और जल से भगवान शंकर का मस्तिष्क शीतल रहता है|

बेलपत्र तोड़ने के नियम:

  • अष्टमी, चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथ‍ियों को, संक्रांति के समय और सोमवार को बेलपत्र तोडना वर्जित है।
  • शास्त्रों में बोला गया है कि यदि नया बेलपत्र न मिले, तो किसी दूसरे के चढ़ाए हुए बेलपत्र को भी धोकर उसे कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है|
  • बेलपत्र के वृक्ष से केवल बेलपत्र ही तोड़े, ध्यान रहे की उसकी टहनी नहीं टूटनी चाहिए और न ही वृक्ष को कोई हानि होनी चाहिए।
  • बेलपत्र तोड़ने से पहले और बाद में मन ही मन वृक्ष को प्रणाम कर लेना चाहिए|

कैसे चढ़ाएं शिवलिंग पर बेलपत्र

  1. ध्यान रहे की बेलपत्र में चक्र और वज्र नहीं होना चाहिए|
  2. शिव जी को बेलपत्र हमेशा उल्टा चढ़ाना चाहिए, अर्थात शिवलिंग के ऊपर पत्ते का चिकना भाग रहना चाहिए|
  3. बेलपत्र 3 से 11 दलों तक के होते हैं| इसलिए बेलपत्र जितने अधिक पत्र के हों, उतने ही सर्वोत्तम माने जाते हैं|
  4. दूसरे के चढ़ाये बेलपत्र की उपेक्षा या अनादर नहीं करना चाहिए|
  5. यदि बेलपत्र उपलब्ध न हो पाए, तो बेल के वृक्ष के दर्शन ही कर लेना चाहिए, ऐसा करने से भी पाप समाप्त हो जाते हैं|

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