108 Names of Lord Ganesha: गणेश जी के 108 नाम और 32 रूपों का वर्णन

हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश जी को सर्व प्रथम पूजनीय माना गया है। किसी भी प्रकार के शुभ कार्य को शुरुआत करने के पहले भगवान गणेश जी की पूजा अर्चना पूरे विधि विधान से करने का महत्व है|

गणपति जी का वाहन मूषक राजा मतलब चूहा है। और भगवान का सबसे प्रिय भोग मोदक (लड्डू) है।

भगवान गणेश जी का सिर गजराज के समान है इसलिए इन्हे गजानन नाम से भी जानते है। इतना ही नहीं भगवान गणेश जी को कई राज्यों में अलग अलग नामों से भी जाना जाता है|

जैसे महाराष्ट्र में गणेश जी को गणपति बप्पा के नाम से जानते है। भगवान गणेश जी के 108 नाम है। तो चलिए आज हम जानते है 108 Names of Lord Ganesha.

108 Names of Lord Ganesha: इन नामों से जाना जाता है पार्वती पुत्र गणेश को

108 Names of Lord Ganesha

  1. बालगणपति: सबसे प्रिय बालक
  2. भालचन्द्र: जिसके मस्तक पर चंद्रमा हो
  3. बुद्धिनाथ: बुद्धि के भगवान
  4. धूम्रवर्ण: धुंए को उड़ाने वाला
  5. एकाक्षर: एकल अक्षर
  6. एकदन्त: एक दांत वाले
  7. गजकर्ण: हाथी की तरह आंखें वाला
  8. गजानन: हाथी के मुख वाले भगवान
  9. गजवक्र: हाथी की सूंड वाला
  10. गजवक्त्र: जिसका हाथी की तरह मुँह है
  11. गणाध्यक्ष: सभी गणों के मालिक
  12. गणपति: सभी गणों के मालिक
  13. गौरीसुत: माता गौरी के पुत्र
  14. लम्बकर्ण: बड़े कान वाले
  15. लम्बोदर: बड़े पेट वाले
  16. महाबल: बलशाली
  17. महागणपति: देवो के देव
  18. महेश्वर: ब्रह्मांड के भगवान
  19. मंगलमूर्त्ति: शुभ कार्य के देव
  20. मूषकवाहन: जिसका सारथी चूहा
  21. निदीश्वरम: धन और निधि के दाता
  22. प्रथमेश्वर: सब के बीच प्रथम आने वाले
  23. शूपकर्ण: बड़े कान वाले
  24. शुभम: सभी शुभ कार्यों के प्रभु
  25. सिद्धिदाता: इच्छाओं और अवसरों के स्वामी
  26. सिद्दिविनायक: सफलता के स्वामी
  27. सुरेश्वरम: देवों के देव
  28. वक्रतुण्ड: घुमावदार सूंड
  29. अखूरथ: जिसका सारथी मूषक है
  30. अलम्पता: अनन्त देव
  31. अमित: अतुलनीय प्रभु
  32. अनन्तचिदरुपम: अनंत और व्यक्ति चेतना
  33. अवनीश: पूरे विश्व के प्रभु
  34. अविघ्न: बाधाओं को हरने वाले
  35. भीम: विशाल
  36. भूपति: धरती के मालिक
  37. भुवनपति: देवों के देव
  38. बुद्धिप्रिय: ज्ञान के दाता
  39. बुद्धिविधाता: बुद्धि के मालिक
  40. चतुर्भुज: चार भुजाओं वाले
  41. देवादेव: सभी भगवान में सर्वोपरी
  42. देवांतकनाशकारी: बुराइयों और असुरों के विनाशक
  43. देवव्रत: सबकी तपस्या स्वीकार करने वाले
  44. देवेन्द्राशिक: सभी देवताओं की रक्षा करने वाले
  45. धार्मिक: दान देने वाला
  46. दूर्जा: अपराजित देव
  47. द्वैमातुर: दो माताओं वाले
  48. एकदंष्ट्र: एक दांत वाले
  49. ईशानपुत्र: भगवान शिव के बेटे
  50. गदाधर: जिसका हथियार गदा है
  51. गणाध्यक्षिण: सभी पिंडों के नेता
  52. गुणिन: जो सभी गुणों के ज्ञानी
  53. हरिद्र: स्वर्ण के रंग वाला
  54. हेरम्ब: माँ का प्रिय पुत्र
  55. कपिल: पीले भूरे रंग वाला
  56. कवीश: कवियों के स्वामी
  57. कीर्त्ति: यश के स्वामी
  58. कृपाकर: कृपा करने वाले
  59. कृष्णपिंगाश: पीली भूरि आंख वाले
  60. क्षेमंकरी: माफी प्रदान करने वाला
  61. क्षिप्रा: आराधना के योग्य
  62. मनोमय: दिल जीतने वाले
  63. मृत्युंजय: मौत को हरने वाले
  64. मूढ़ाकरम: जिनमें खुशी का वास होता है
  65. मुक्तिदायी: शाश्वत आनंद के दाता
  66. नादप्रतिष्ठित: जिसे संगीत से प्यार हो
  67. नमस्थेतु: सभी बुराइयों और पापों पर विजय प्राप्त करने वाले
  68. नन्दन: भगवान शिव का बेटा
  69. सिद्धांथ: सफलता और उपलब्धियों की गुरु
  70. पीताम्बर: पीले वस्त्र धारण करने वाला
  71. प्रमोद: आनंद
  72. पुरुष: अद्भुत व्यक्तित्व
  73. रक्त: लाल रंग के शरीर वाला
  74. रुद्रप्रिय: भगवान शिव के चहीते
  75. सर्वदेवात्मन: सभी स्वर्गीय प्रसाद के स्वीकर्ता
  76. सर्वसिद्धांत: कौशल और बुद्धि के दाता
  77. सर्वात्मन: ब्रह्मांड की रक्षा करने वाला
  78. ओमकार: ओम के आकार वाला
  79. शशिवर्णम: जिसका रंग चंद्रमा को भाता हो
  80. शुभगुणकानन: जो सभी गुण के गुरु हैं
  81. श्वेता: जो सफेद रंग के रूप में शुद्ध है
  82. सिद्धिप्रिय: इच्छापूर्ति वाले
  83. स्कन्दपूर्वज: भगवान कार्तिकेय के भाई
  84. सुमुख: शुभ मुख वाले
  85. स्वरुप: सौंदर्य के प्रेमी
  86. तरुण: जिसकी कोई आयु न हो
  87. उद्दण्ड: शरारती
  88. उमापुत्र: पार्वती के बेटे
  89. वरगणपति: अवसरों के स्वामी
  90. वरप्रद: इच्छाओं और अवसरों के अनुदाता
  91. वरदविनायक: सफलता के स्वामी
  92. वीरगणपति: वीर प्रभु
  93. विद्यावारिधि: बुद्धि की देव
  94. विघ्नहर: बाधाओं को दूर करने वाले
  95. विघ्नहर्त्ता: बुद्धि की देव
  96. विघ्नविनाशन: बाधाओं का अंत करने वाले
  97. विघ्नराज: सभी बाधाओं के मालिक
  98. विघ्नराजेन्द्र: सभी बाधाओं के भगवान
  99. विघ्नविनाशाय: सभी बाधाओं का नाश करने वाला
  100. विघ्नेश्वर: सभी बाधाओं के हरने वाले भगवान
  101. विकट: अत्यंत विशाल
  102. विनायक: सब का भगवान
  103. विश्वमुख: ब्रह्मांड के गुरु
  104. विश्वराजा: संसार के स्वामी
  105. यज्ञकाय: सभी पवित्र और बलि को स्वीकार करने वाला
  106. यशस्कर: प्रसिद्धि और भाग्य के स्वामी
  107. यशस्विन: सबसे प्यारे और लोकप्रिय देव
  108. योगाधिप: ध्यान के प्रभु

आप सभी लोगों ने भगवान गणेश जी की 108 नाम को तो जान लिया| अब हम आपको बता रहे है गणेश जी के 32 रूप जिनका ध्यान करके आप अपनी सारी मनोकामना पूरी कर सकते है|

  1. श्री बाल गणपति: गणपति जी इस रूप में उनके छ: भुजाओं और लाल रंग का शरीर होता है। इसलिए इनको सभी लोग बल गणपति कहते है।
  2. श्री तरुण गणपति: गणेश जी के इस रूप में गणपति जी की आठ भुजाएं और रक्तवर्ण शरीर होता है। इसलिए इस रूप को तरुण गणपति कहते है।
  3. श्री भक्त गणपति: गणेश जी के इस रूप में उनके पास चार भुजा होती है| सफ़ेद रंग के शरीर वाले गणेश जी को भक्त गणपति के नाम से जाना जाता है।
  4. श्री वीर गणपति: दस भुजाओं और रक्तवर्ण शरीर वाले गणेश जी, वीर गणपति जी के नाम से भी जाने जाते है।
  5. श्री शक्ति गणपति: चार भुजाओं वाले एवं सिंदूरी रंग के शरीर वाले गणेश जी को शक्ति गणेश कहते है।
  6. श्री द्विज गणपति: चार भुजाधारी और शुभ्रवर्ण शरीर वाले गणेश जी को द्विज गणपति के नाम से जानते है।
  7. श्री सिद्धि गणपति: छ: भुजाधारी और पिंगल वर्ण वाले शरीर को सिद्धि गणपति नाम से जाना जाता है।
  8. श्री विघ्न गणपति: दस भुजाधारी और सुनहरी शरीर वाले को भगवान विघ्न हारत के नाम से जानते है।
  9. श्री उच्चिष्ठ गणपति: चार भुजाधारी और नीले रंग के शरीर वाले गणेश जी को उच्चिष्ठ गणपति के नाम से जानते है।
  10. श्री हेरम्ब गणपति: आठ भुजाधारी और गौर वर्ण शरीर वाले गणेश जी हेरम्ब गणपति जी के नाम से जाने जाते है।
  11. श्री उद्ध गणपति: छ: भुजाधारी और सोने के रंग का शरीर, इन गणपति जी को उद्ध गणपति जी के नाम से जानते है।
  12. श्री क्षिप्र गणपति: छ: भुजाधारी और रक्तवर्ण शरीर वाले गणेश जी को क्षिप्र गणपति कहते है।
  13. श्री लक्ष्मी गणपति: आठ भुजाधारी और गौर वर्ण शरीर वाले गणेश जी को लक्ष्मी गणपति कहते है।
  14. श्री विजय गणपति: चार भुजाधारी और रक्त वर्ण रूप वाले गणेश को विजय गणपति के नाम से जानते है।
  15. श्रीमहागणपति: आठ भुजाधारी और रक्त वर्ण रूप वाले गणेश जी को महागणपति कहते है।
  16. श्री नृत्य गणपति: छ: भुजाधारी और रक्त वर्ण शरीर वाले को नृत्य गणपति के नाम से जानते है।
  17. श्री एकाक्षर गणपति: चार भुजाधारी और रक्तवर्ण रूप को रखने वाले को भगवान एकाक्षर गणपति के नाम से जाने जाते है।
  18. श्री हरिद्रा गणपति: छ: भुजाधारी और पीले रंग का शरीर जिनका, उनको हरिद्रा गणपति कहते है।
  19. श्री त्र्यैक्ष गणपति: सुनहरे शरीर, तीन नेत्रों वाले और जिनके चार भुजाधारी है। उनको भगवान त्र्यैक्ष गणपति कहते है।
  20. श्री वर गणपति: छ: भुजाधारी और रक्तवर्ण शरीर धारण वाले को भगवान वर गणपति बोला जाता है।
  21. श्री ढुण्डि गणपति: चार भुजाधारी और रक्तवर्णी शरीर वाले, ढुण्डि गणपति जी के नाम से जाने जाते है।
  22. श्री क्षिप्र प्रसाद गणपति: छ: भुजाधारी, रक्ववर्णी और त्रिनेत्र धारी को भगवान क्षिप्र प्रसाद गणपति कहा जाता है।
  23. श्री ऋण मोचन गणपति: चार भुजाधारी और जिन्होंने लालवस्त्र को धारण कर रखा है। उन गणेश जी को ऋण मोचन गणपति के नाम से जानते है।
  24. श्री एकदन्त गणपति: छ: भुजाधारी और श्याम वर्ण शरीरधारी वाले को एकदन्त गणपति कहते है।
  25. श्री सृष्टि गणपति: चार भुजाधारी, मूषक पर सवार और रक्तवर्णी शरीर को धारण करने वाले भगवान को सृष्टि गणपति कहा जाता है।
  26. श्री द्विमुख गणपति: पीले वर्ण के चार भुजाधारी और दो मुख वाले गणपति जी को द्विमुख गणपति के नाम से जानते है।
  27. श्री उद्दण्ड गणपति: बारह भुजाधारी, रक्तवर्णी शरीर वाले, हाथ में कुमुदनी और अमृत का पात्र जिनके हाथों में होता है। उन गणेश जी को उद्दण्ड गणपति जी के नाम से जाने जाते है।
  28. श्री दुर्गा गणपति: आठ भुजाधारी रक्तवर्णी और लाल वस्त्र को धारण किए हुए को दुर्गा गणपति के नाम से जानते है।
  29. श्री त्रिमुख गणपति: तीन मुख वाले, छ: भुजाधारी और रक्तवर्ण शरीर को धारण करने वाले को भगवान त्रिमुख गणपति कहा गया है।
  30. श्री योग गणपति: योगमुद्रा में विराजित, नीले वस्त्र को पहने हुए और चार भुजाधारी वाले को भगवान योग गणपति कहते है।
  31. श्री सिंह गणपति: श्वेत वर्णी आठ भुजाधारी, सिंह के मुख के समान और हाथी की सूंड वाले को सिंह गणपति कहते है।
  32. श्री संकष्ट हरण गणपति: चार भुजाधारी, रक्तवर्णी शरीर और हीरा जडि़त मुकुट को पहने हुए गणेश को को संकष्ट हरण गणपति कहा जाता है|