Janmashtami Special: इस खास अवसर पर जानें मुरली वाले की कुछ अनूठी लीलाएं

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आज कृष्ण जन्माष्टमी पुरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कृष्ण जन्माष्टमी के इस शुभ अवसर पर लोग श्री कृष्ण की पूजा अर्चना कर रहे है।

इस बार जन्माष्टमी बिना रोहिणी नक्षत्र के योग में मनाई जाएगी। ऐसा अवसर पांच साल बाद आया है। आपको बता दे की इस बार जन्माष्टमी 14 और 15 अगस्त को है।

इस दिन जगह-जगह मन्दिरों में इस मौके पर झाकियॉ सजाई जाती है। और रात्रि 12 बजे तक व्रत रखकर जन्मोत्सव मनाने के उपरांत भगवान का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। माना जाता है की इस दिन उपवास करने से मनुष्य सात जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है।

तो आइये Janmashtami Special पर जानते है कृष्ण की कुछ अद्भुत लीलाये जो उन्होंने अपने जन्म के समय से ही प्रारम्भ कर दी थी जिसे देख कर लोग उनमे रम गए थे। साथ ही उन्होंने कई मनुष्यो का भी उद्धार किया। उनके दर्शन मात्र से ही लोगो का मन प्रफुल्लित हो उठता थाI

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Janmashtami Special

इस तरह हुआ था भगवान श्री कृष्ण का अवतरण

भविष्यवाणी के कारण कंस वसुदेव और देवकी की आठवीं संतान आने से पहले ही बहुत घबरा गया। इसलिए उसने वसुदेव और देवकी को नजरबंद करके रखा था, लेकिन बाद में तो वसुदेव को जंजीरों में बांध दिया गया तथा देवकी को एक कारागार में डाल दिया गया।

कंस ने पूतना नाम की एक भरोसेमंद राक्षसी को दाई बनाकर देवकी पर नजर रखने को कहा था। पूतना जैसे ही बच्चे का जन्म होता उसे कंस को सौंप देती और बच्चा मार दिया जाता।

इसके बाद भाद्र कृष्ण अष्टमी को आधी रात को देवकी के यहां आठवीं संतान ने जन्म लिया। उस समय बादल गरजते हुए तेज बारिश हो रही थी। श्री कृष्ण के अवतरण होने के साथ ही दैवीय शक्ति के प्रभाव से कारावास के सारे ताले टूट गए और वसुदेव बच्चे को लेकर यमुना नदी की तरफ चल दिए।

श्री कृष्ण की शिशु लीला

कृष्ण की बाल्य जीवन की लीलाये बहुत ही अद्भुत थी। जिसमे उनका मनमोहक चेहरा, उनकी मधुर बांसुरी और अद्भुत मुस्कान के साथ उनका मनोरम नृत्य ऐसा होता था जिससे लोग आनंद में डूब जाते थे।

राधा और कृष्ण की प्रथम मुलाकात

यह घटना जब की है जब गोपियों के कपड़े कृष्ण ने चुरा लिए थे और इस बात पर यशोदा मां ने उन्हें बहुत मारा और फिर उन्हें ओखली से बांध दिया।

श्री कृष्ण भी कहाँ मानने वाले थे उन्होंने ओखली को खींचा और उखाड़ लिया। साथ ही तुरंत जंगल की ओर निकल गए क्यूंकि वहां पर उनके साथी और उनकी गायें थी। एकाएक उनको जंगल में दो महिलाओं की आवाजें सुनाईं दीं।

कृष्ण ने जब देखा की उनमे से छोटी वाली उनकी सखी ललिता थी और दूसरी उनसे थोड़ी बड़ी थी। परन्तु वह उनको नहीं जानते थे वह 12 साल की राधा थीं।

कृष्णा राधे की रास लीला

वृंदावन की जगह काफी खुली और हरी-भरी थी। इस पर गोकुल और बरसाना के ग्वाले, जाकर बस गए थे। कई मायनों में ये नई बस्ती पुरानी मान्यताओ को तोड़ने के साथ ज्यादा खुशहाल साबित हुई।

हालाँकि ये लोग अपने पुराने परंपरागत घरों को छोड़कर आए थे इस कारण इनके पास पहले से अधिक स्वंत्रता थी। यह नया स्थान ज्यादा समृद्ध और खूबसूरत था।

विशेषकर युवाओं और बच्चों को यहां इतनी आजादी मिली, जिसे उन्होंने पहले अनुभव नहीं किया था। इन बच्चों के समूह में राधा जी थोड़ी बड़ी थीं।

राधा जी का कृष्ण के लिए प्रेम-विरह

कृष्ण के प्रति राधा का प्रेम जब समाज को चुभने लगा तो घर से उनके निकलने पर रोक लगा दी गई थीI परन्तु राधा कृष्ण की बंसी की धुन से स्वयं को रोक नहीं पाती थी।

एक दिन पूर्णिमा की शाम को राधे को बांसुरी की मधुर आवाज सुनाई दी। राधा जी बांसुरी की आवाज की ओर खींची चली गई।

जब कृष्ण को अपने असली स्वरूप का बोध हुआ

बचपन से ही कृष्ण नंद और यशोदा के साथ रहते थे। एकाएक उन्हें पता चला की वह उनके पुत्र नहीं हैं। यह बात सुनते ही वह खड़े हो गए और अपने अंदर एक बहुत बड़े रूपांतरण से होकर गुजरे।

अचानक कृष्ण को अहसास हुआ कि सदैव से कुछ ऐसा था, जो उन्हें अंदर से झकझोरता था। लेकिन वह अपने इन उत्तेजक भावों को मन से निकाल देते थे। साथ ही जीवन के साथ आगे बढ़ जाते थे। इसके अतिरिक्त भी उन्होंने कई लीलाये की है।


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