Mahamrityunjay Jaap: इस मंत्र से शिव होते है प्रसन्न, मिलती है अकाल मृत्यु पर विजय

Mahamrityunjay Jaap – हिन्दू धर्म के शास्त्रों और पुराणों में अकाल मृत्यु और भय से बचने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का महत्व बताया गया है। भगवान शंकर को इस मंत्र से प्रसन्न किया जा सकता है।

इस मंत्र के प्रभाव से इंसान मौत की मुँह में जाते जाते बच जाता है। मरणासन्न रोगी भी महाकाल की अद्भुत कृपा से जीवन पा लेता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बहुत ही उत्तम फलदायी माना जाता है।

इस मंत्र को करते समय कुछ सावधानी रखना होता है। जिससे इस मंत्र का सही फल मिल सके और आपको कुछ हानि न हो।

यदि आप इस मंत्र का जाप नहीं कर सकते है। तो इस मंत्र का जाप किसी भी पंडित से करवाने में भी आपको बहुत ही लाभ मिल सकता है। आइये जानते है Mahamrityunjay Jaap in Hindi और करते है शिव को प्रसन्न।

Mahamrityunjay Jaap in Hindi: महामृत्युंजय मंत्र व इसका अर्थ तथा सावधानी

Mahamrityunjay Mantra

यहां पढ़िए महामृत्युंजय मंत्र

ऊॅ हौं जूं सः। ऊॅ भूः भुवः स्वः ऊॅ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उव्र्वारूकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। ऊॅ स्वः भुवः भूः ऊॅ। ऊॅ सः जूं हौं।

महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ

समस्त संसार के पालन-हार तीन नेत्रों वाले भगवान शंकर की हम आराधना करते है। जो संपूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से कर रहे हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि हम मृत्यु के बंधनों से सदा के लिए मुक्त हो जाएं और आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए शरीर को त्याग-कर आप में ही लीन हो जाएं और मोक्ष की प्राप्त कर सके।

इस मंत्र का जाप करते हुए बरतें यह सावधानिया

01: महामृत्युंजय मंत्र का जप उसी जगह पर करे जहां पर भगवान शंकर की मूर्ति, प्रतिमा या महामृत्युमंजय यंत्र रखा हो।
02: महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय धूप दीप जलाने का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।
03: महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण करते हुए शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। जब भी मंत्र का उच्चारण कर रहे हो तो यह अवश्य ध्यान दे कि सही ढंग से उच्चारण होना चाहिए। मंत्र में एक भी गलती आपके ऊपर भारी पड़ सकती है।
04: इस मंत्र का उच्चारण करते समय इसकी संख्या निर्धारित रखे। अगले दिन इनकी संख्या बढ़ाए मगर यह याद रखे कि संख्या कम नहीं होना चाहिए।
05: महामृत्युंजय मंत्र के जाप के दौरान उच्चारण होंठ से बाहर नहीं आना चाहिए। यदि इस मंत्र का अभ्यास नहीं है। तो इस मंत्र का उच्चारण धीमे धीमे स्वर में करना चाहिए।
06: महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण सिर्फ रुद्राक्ष की ही माला से करना चाहिए और मंत्र का उच्चारण या जाप करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख रखना चाहिए।
07: रुद्राक्ष की माला को गौमुखी में ही रख कर पुरे मंत्र के हो जानें के बाद ही गौमुखी से बाहर निकाले।
08: इस मंत्र का उच्चारण करते भगवान शंकर का अभिषेक करते रहना चाहिए।
09: महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए एक जगह निर्धारती रखे। रोज अपनी जगह बदलना नहीं चाहिए।
10: महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय एकाग्रता रखे और अपने मन को बिल्कुल भी भटकने नहीं देना चाहिए।
11: इस मंत्र का उच्चारण या जाप जितने भी दिन चल रहा हो उतने दिन मांसाहार भोजन को त्याग दे साथ ही किसी भी इंसान की बुराई या फिर झूठ नहीं बोले।
12: महामृत्युंजय मंत्र को करते समय आलस्य एवं उबासी को पास नहीं आने देना चाहिए।

किस समस्या में महामृत्युंजय मंत्र का कितने बार जाप करें –

  • महामृत्युंजय मंत्र का 1100 बार जाप करने से भय से मुक्ति मिल जाती है।
  • इस मंत्र को 11000 बार जाप करने से रोगों से छुटकारा मिल जाता है।
  • पुत्र की प्राप्ति के लिए, उन्नति प्राप्त करने के लिए एवं अकाल मृत्यु से बचने के लिए सवा लाख की संख्या में इस मंत्र का जाप करना अनिवार्य है।
  • यदि साधक पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यह साधना करें, तो मनवांछित फल की प्राप्ति की प्रबल संभावना रहती है।