Budhwar Vrat Katha in Hindi: बुध गृह की शांति एवं सुख शांति के लिए पढ़े

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बुधवार का दिन बुध देव का होता है। बुध ग्रह की शांति के लिए तथा सभी सुखों की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को बुधवार का उपवास अवश्य रखना चाहिए।

हालाँकि कई जगह बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा अर्चना की जाती है। किन्तु बुधवार की व्रत कथा पूरी तरह से भगवान बुध पर आधारित है।

इस व्रत को विशाखा नक्षत्र के बुधवार के दिन करना चाहिए। इस व्रत को 17 या 21 सप्ताह तक करना चाहिए। इस व्रत का योग न मिलने की स्थिति में बुधवार व्रत को किसी भी माह की शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार से शुरू किया जा सकता है।

बुधवार के व्रत को करते समय सिर्फ एक ही समय भोजन करना चाहिए। इस व्रत में हरी वस्तु का प्रयोग करना बहुत ही शुभ और लाभदायक होता है। आइये विस्तार से जानते है Budhwar Vrat Katha in Hindi.

Budhwar Vrat Katha in Hindi: यहां पढ़िए बुधवार व्रत की कथा

Budhwar Vrat Katha

बुधवार का व्रत किसे और क्यों करना चाहिए

बुद्धि, जुबान एवं व्यापार मनुष्य के जीवन के तीन मुख्य आधार होते हैं। यह तीनो भगवान बुध कि कृपा पर निर्भर होते है। बुधवार का व्रत करने से व्यक्ति की बुद्धि में वृद्धि होती है। इसके साथ ही व्यापार में सफलता प्राप्ति के लिए विशेष रुप से बुधवार का व्रत किया जाता है। व्यापारिक क्षेत्र की सभी बाधाओं को दूर करने में यह व्रत बहुत ही लाभकारी एवं पुण्य होता है।

इसके अलावा जिन व्यक्तियों की कुंडली में बुध ग्रह अपने फल देने में असमर्थ होते है तो उन लोगो को बुधवार का व्रत विशेष रुप से करना चाहिए। या फिर जिनके कुंडली में बुध ग्रह अशुभ भाव का स्वामी होकर अशुभ भाव में बैठा होता है। ऐसी स्तिथि में भी इस व्रत का करना बहुत ही लाभदायक माना जाता है।

बुधवार व्रत कथा

एक समय की बात है एक साहूकार अपनी पत्नी को विदा कराने के लिए अपने ससुराल गया। कुछ दिन वहां पर रहने के उपरांत उसने अपने सास-ससुर से अपनी पत्नी को विदा करने के लिए कहा किंतु उसके सास-ससुर और अन्य संबंधियों ने कहा कि “बेटा आज बुधवार है। बुधवार के दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए यात्रा नहीं करते।”

लेकिन वह नहीं माना और हठ करके बुधवार के दिन ही अपनी पत्नी को विदा करवाकर अपने नगर की ओर चल पड़ा। रास्ते में उसकी पत्नी को प्यास लगी, उसने अपने पति से पीने के लिए पानी मांगा। वह साहूकार लोटा लेकर गाड़ी से उतरकर जल लेने के लिए चला गया। जब वह जल लेकर वापस आ रहा तो वह हैरान हो गया, क्योंकि उसकी पत्नी के पास उसकी ही शक्ल सूरत का दूसरा व्यक्ति बैठा था।

पत्नी भी अपने पति को देखकर हैरान हो गई। वह दोनों में कोई अंतर नहीं कर पाई। साहूकार ने अपने पत्नी के पास बैठे हुए शख्स से पूछा कि तुम कौन हो और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठे हो? उसकी बात सुनकर उस व्यक्ति ने कहा – अरे भाई, यह मेरी धर्म पत्नी है। मैं अपनी पत्नी को ससुराल से विदा करा के लाया हूं। लेकिन तुम कौन हो जो मुझसे ऐसा प्रश्न पूछ रहे हो?

दोनों आपस में झगड़ने लग गए। तभी उस समय राज्य के सिपाही आए और उन्होंने साहूकार को पकड़ लिया और स्त्री से पूछा कि तुम्हारा असली पति इनमें से कौन है? उसकी पत्नी चुपचाप रह गई। क्योंकि दोनों को देखकर वह खुद हैरान हो गई थी। कि वह किसे अपना पति कहे? साहूकार ईश्वर से प्रार्थना करते हुए बोला “हे भगवान, यह कैसी लीला है?”

तभी उस समय आकाशवाणी हुई कि मूर्ख आज बुधवार का दिन तुझे शुभ कार्य के लिए गमन नहीं करना चाहिए था। तूने हठ में किसी की बात भी नहीं मानी। यह सब भगवान बुध के प्रकोप से हो रहा है।

साहूकार ने भगवान बुध से प्रार्थना की और अपनी इस गलती के लिए क्षमा याचना करने लग गया। तब मनुष्य के रूप में आए भगवान बुध अंतर्ध्यान हो गए। वह अपनी स्त्री को घर ले आया। इसके पश्चात पति पत्नी नियम-पूर्वक बुधवार का व्रत करने लग गए।

जो भी व्यक्ति इस कथा को कहता या सुनता है। उस इंसान को बुधवार के दिन यात्रा करने का कोई दोष नहीं लगता और उस इंसान को सभी प्रकार की सुख शांति की प्राप्ति होती है।


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