Raksha Bandhan History: जाने रक्षा बंधन पर्व से जुड़ी प्राचीन कथाएं एवं इतिहास

रक्षा बंधन का त्यौहार एक ऐसा पर्व होता है जो की भाई बहन के रिश्ते पर आधारित होता है। यह भाई बहन के अटूट प्रेम को दर्शाता है। भाई बहन में कितना भी मन मुटाव क्यों न हो जाए इस दिन दोनों के दिल एक दूसरे के प्रेम के लिए व्याकुल रहते है। इस दिन बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र उसके हाथों पर बांधती है और भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है।

Raksha Bandhan का त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा को आता है जिस पूरे देश में लोग बड़ी धूम धाम से मनाते हैं। यह हिन्दुओ का एक पवित्र त्यौहार है। यह त्यौहार वर्षो से मनाया जाता आ रहा है।

आपको बता दे की इस त्यौहार का ऐतिहासिक महत्व भी है जिसके कारण About Raksha Bandhan के ऊपर प्राचीन काल से भाई बहन के इस रिश्ते पर कई कथाएं भी प्रचलित है।

Raksha Bandhan Information के अंतर्गत रक्षा बंधन से जुड़ी कई घटनाएं भी है और कई कहानियाँ भी सुनाये जाते हैं। आइये आज के लेख में जानते हैं Raksha Bandhan History के बारे में विस्तार से।

Raksha Bandhan History: जाने इसका महत्त्व, कहानी और इसे मनाने के विधि विधान

Raksha Bandhan History

रक्षा बंधन का महत्त्व

  • रक्षा बंधन का अर्थ होता है रक्षा के निहित बाँधा गया एक बंधन।
  • इस दिन भाई अपनी बहन को उसकी रक्षा का वचन देता है और बहने अपने भाई की लम्बी उम्र की कामना करती है।
  • यह पर्व पूरे देश में साथ हीं विश्व में जहाँ भी हिन्दू रहते हैं वह मनाया जाता है।

रक्षा बंधन का इतिहास: Raksha Bandhan in Hindi

आइये अब जानते हैं रक्षा बंधन के इतिहास से जुड़ी Raksha Bandhan ki Kahani जो सालों से लोगों के बीच प्रचलित हैं।

रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं

  • रक्षा बंधन का इतिहास बहुत साल पुराना है इससे जुड़ी बहुत सारी कथाएं हैं जिनमे एक कथा रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं के मध्य की भी है।
  • यह उस समय की बात है जब मुग़लों और राजपूतों के बीच युद्ध चल रहा था। उस समय चित्तौड़ के राजा की मृत्यु हो चुकी थी और रानी कर्णावती राज्य को संभल रही थी।
  • उन्होंने सुल्तान बहादुर शाह से सहायता मांगी परन्तु कोई मदद नहीं मिल पा रही थी तो रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भिजवा दी।
  • राखी भिजवाने के बाद हुमायू ने रानी को बहन माना और उनकी रक्षा की।

भगवान कृष्ण और द्रौपदी

  • आपको बता दे रक्षा बंधन का इतिहास महाभारत के समय भी था। यह कथा भगवान कृष्ण और द्रौपदी से संबंधित है।
  • इस कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने राजा शिशुपाल का जब वध किया तो उनके बाएं हाथ की उंगली से रक्त बह रहा था।
  • बहते हुए रक्त को देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा उनकी अंगुली में बांधा था।
  • इस घटना के दौरान ही भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को बहन के रूप में स्वीकार किया था।
  • उसके बाद जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था तो भगवान कृष्ण ने उनकी सहायता की थी।

राजा बलि और माता लक्ष्मी

  • कुछ लोग इस कहानी को भी रक्षा बंधन का आधार मानते है। जब भगवान् विष्णु ने वामनावतार धारण किया तो वह राजा बलि के पास भिक्षा मांगने गए।
  • भिक्षा में उन्होंने राजा बलि से तीन पग धरती की मांग रख दी और जब भगवान ने अपने पग से धरती को नापा तो आकाश, पाताल व धरती सभी को एक साथ नाप लिया।
  • राजा बलि के पास अब कुछ नहीं बचा तो उन्हें रसातल में रहने को जाना पड़ा।
  • भगवान बलि की भक्ति से भगवान् बहुत प्रसन्न थे इसलिए वे बलि के कहने पर रात-दिन उनके सामने रहने लगे।
  • इस पर माता लक्ष्मी जी को बहुत चिंता हुयी के अब भगवान् विष्णु वापस वैकुण्ठ में कैसे आएंगे।
  • तब नारद जी ने लक्ष्मी जी को एक उपाय सुझाया। जिसके अनुरूप लक्ष्मी जी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र भेजकर भाई बनाया और उसके बदले अपने पति को वापस अपने साथ ले कर आयी।
  • जिस दिन यह हुआ उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी।

सिकंदर की पत्नी और पुरू

  • यह कहानी भी रक्षा बंधन के लिए जानी जाती है। सिकंदर और पुरू शत्रु हुआ करते है तो शत्रु से रक्षा के लिए सिकंदर की पत्नी में अपने शत्रु पुरू को राखी भेजी थी।
  • राखी के बदले पुरु ने सिकंदर को ना मरने का वचन दिया था।
  • वचन के अनुसार पुरु ने सिकंदर को जीवन दान प्रदान किया था।

युधिष्ठिर और सैनिक

  • महाभारत के युद्ध में पांडवों के विजय के लिए राखी का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है।
  • जब युधिष्ठिर ने भगवान् कृष्ण से पूछा की मैं इस प्रकार के संकटों से कैसे छुटकारा पा सकता हूँ तो इस पर कृष्ण जी ने युधिष्ठिर से सैनिकों को राखी बांधने के लिए कहा।
  • युधिष्ठिर ने अपने सारे सैनिकों को राखी बाँधी जिससे उनकी विजय हुयी।
  • यह घटना भी श्रावण मास में हुयी थी। इस दिन के बाद से सैनिकों को भी राखी बंधी जाती है।

इस तरह Raksha Bandhan Story in Hindi से जुड़ी कई कहानियों को लोग मानते है और उसके आधार ओर रक्षा बंधन के त्यौहार को मनाते है। आईये जानते है रक्षा बंधन के त्यौहार को लोग किस प्रकार मनाते है।

इस तरह मानते है रक्षा बंधन

  • रक्षा बंधन त्यौहार को बहुत आसान तरीके से मनाया जाता है। इस दिन सुबह उठकर स्नान कर नए कपड़े पहने जाते है।
  • साथ ही बहने अपने भाई के लिए रक्षा सूत्र खरीदती है। फिर एक थाल में पूजा की सामग्री को सजाया जाता है साथ ही उसमे मिठाई और राखी भी रखी जाती है। थाली में भाई की आरती उतारने के लिए दीपक भी रखा जाता है। आप कपूर, फूल, अक्षत, सिंदूर और चावल को भी थाली में सजा सकती है।
  • इसके बाद भाई को किसी आसन पर बैठाया जाता है। उसका तिलक करके राखी बाँधी जाती है और आरती भी उतरी जाती है। इसके बाद बहने भाई को मिठाई खिलाती है।
  • इसके उपरांत भाई अपनी बहनों को उपहार भी देते है। साथ ही बहुत सारी शुभकामनाएं भी दी जाती है।

इस तरह रक्षा बंधन का पवन पर्व मनाया जाता है। साथ ही अच्छे और स्वादिष्ट पकवान भी बनाये जाते है। जो बहनें अपने भाई से दूर है वह अपने भाई को राखी भेज देती है।

इस बार रक्षा बंधन रविवार के दिन 26 अगस्त को मनाया जाने वाला है। आप भी अपने भाई को राखी बांधकर हर्षो उल्लास के साथ इस त्यौहार को मनाये और स्वादिष्ट व्यंजनों का भी आनंद उठाये।

Note – आजकल ऑनलाइन भी राखियां भी भेजी जा सकती है जिसे आप आसानी से भेज सकते है।

आज के लेख में आपने Raksha Bandhan Information in Hindi जानी। तो इस त्यौहार को आप अपने पूरे परिवार के साथ मनाएं और अपने भाई या बहन को ख़ुशियाँ दें।