हाल ही में किये गए कुछ शोधो के अनुसार दुनिया भर में तनाव से पीड़ित लोगो की संख्या दिन प्रतिदिन बढती ही जा रही है और इसमें  हर उम्र वर्ग के लोग शामिल हैं। तनाव के कारण भी लोगो को स्वास्थ्य समस्या हो जाती है|

क्या आप जानते है की जब आप गुस्से या तनाव में होते है तो इससे आपके स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पढता है| आपको बतादे की केवल नकारात्मक सोच से भी आपका दिमाग आपके शरीर को सही से कार्य नहीं करने देता है|

याने की जब तनाव लगातार बने रहे तो आप दिन प्रतिदिन बीमार होते चले जाते हैं। आप यकीं नहीं मानेंगे लेकिन तनाव के चलते भी कुछ लोगो का हाल ऐसा हो जाता है की उन्हें अपनी मेन्टल हेल्थ को बरक़रार रखने के लिए हॉस्पिटल के चक्कर काटने पढ़ते है|

पर आपको और ज्यादा परेशान होने की जरूरत नही है| क्योकि योग में हर समस्या का इलाज छुपा है| Sudarshan Kriya की मदद से आप तनाव को खुद से कोसो दूर रखकर एक खुशहाल जिंदगी जी सकते हैं|

Sudarshan Kriya क्या है और इसे कैसे किया जा सकता है

Sudarshan Kriya

सुदर्शन क्रिया क्या है

सुदर्शन शब्द दो शब्दों के मेल से बना है सु + दर्शन| ‘सु’का अर्थ होता है अच्छा और सही, ‘दर्शन’ का अर्थ होता है साक्षात्कार और ‘क्रिया’|

यह ऐसा अभ्यास है जो आपके शरीर को शुद्धि प्रदान करता है। दरहसल यह क्रिया शरीर के विषाक्त पदार्थो और तनावों को दूरकर हर दिन प्राण को उच्च करती है।

सुदर्शन क्रिया कैसे करे?

इस क्रिया में कुल 4 चरण होते हैं। उज्जायी प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम, ओम का जाप और क्रिया योग

उज्जायी प्राणायाम

  • सर्वप्रथम वज्रासन की स्थिति में बैठ जायें। इस प्राणायाम में जब आप सांस अंदर और बाहर लेते है तो उस समय आपका पूरा सांसो पर रखे|
  • कहने का तात्पर्य यह है की सांस को अंदर लेने और बाहर छोड़ने का समय एकदम बराबर होना चाहिए।
  • इस प्राणायाम का अभ्यास करते समय आपको एक मिनट में कम से कम 2-4 बार सांसे लेना है।
  • इसे नियमित करते समय आपका अपनी सांसों पर कंट्रोल हो जायेगा और आपका दिमाग रिलैक्स फील करने लगेगा।

भस्त्रिका प्राणायाम

  • इस प्राणायाम में आपको बहुत जल्दी जल्दी सांसो को अंदर- बाहर करना होता है।
  • इस वाले प्राणायाम में आपको साँसों को बहार छोड़ते वक्त पूरा ध्यान देना होता है क्योंकि सांसो को अंदर लेने से ज्यादा वक्त उसे बाहर छोड़ने में लगता है|
  • आपको इसका अभ्यास करते समय एक मिनट में लगभग 30 बार सांसे अंदर बाहर करना है।
  • ऐसा रोज करने से मन शांत होता है तथा विचार भी सकारात्मक होते है|

ओम का जाप:

रोजाना सुबह भोर में उठकर ओम का जाप करें| इससे आपको सकारात्मक उर्जा मिलती है और नकारात्मक विचार आपसे दूर जाते है|

क्रिया

  • यह सुदर्शन क्रिया का आखिरी चरण है और इसमें आपको सांसो की गति को बार बार बदलना होता है।
  • पहले आपको धीमी गति से सांसे लेनी छोड़नी होती हैं फिर उनकी गति को थोड़ा बढ़ा देते है|
  • अंत में सांसो की गति को काफी तेज करते है। किन्तु सांसों की यह सारी गतिविधि एक ख़ास लय में होनी चाहिए|
  • इसे करते समय आपको ध्यान रखना है कि सांसो को अंदर लेने का समय बाहर छोड़ने वाले समय से दोगुना होना चाहिए।
  • इस क्रिया को करने से आपके अंदर की सहनशक्ति बढ़ती है आप पॉजिटिव एनर्जी से भर जाते हैं।