आज की दुनिया में प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गयी है। जिसके चलते लोगो में तनाव की समस्याए भी बढ़ गयी है। और यह चीज़े सभी उम्र के लोगो में देखने को मिल रही है। यदि तनाव लगातार बना रहे तो दूसरी बीमारिया होने में देर नहीं लगती|

आपको बतादे की उच्च रक्तचाप, मधुमेह, जैसी बीमारियां मानसिक तनाव के कारण ही होती है। इसलिए तनाव को दूर करना बहुत जरुरी है|

तनाव से मुक्ति पाने के लिए कई चीज़े होती है जैसे योग, रिलैक्सिंग एक्सरसाइज, बॉडी मसाज आदि| आज हम आपको तनाव दूर करने का एक और तरीका क्रिस्टल थेरेपी के बारे में बता रहे है| क्रिस्टल थेरेपी को क्रिस्टल हीलिंग के नाम से भी जाना जाता है।

Crystal Therapy में तरह तरह के ट्रांसपेरेंट क्रिस्टल का इस्तेमाल किया जाता है। इस थेरेपी में प्राकृतिक क्रिस्टल का उपयोग किया जाता है। उपयोग किए जाने वाले हर क्रिस्टल की विशेषता भिन्न भिन्न होती है| ये क्रिस्टल हीट कंडक्टर और ऊर्जा के अच्छे सुचालक होते हैं। जो की हर बीमारी का उपचार करने में समर्थ है।

Crystal Therapy क्या है, इसे कैसे करते है और इसके लाभ

Crystal Therapy

कैसे करते है क्रिस्टल थेरेपी से चिकित्सा?

  • इसमें सबसे पहले व्यक्ति के शरीर के कुछ निश्चित हिस्सों पर क्रिस्टल रखा जाता है।
  • या फिर इसे शरीर के ऊपर बिना रखे केवल घुमा कर भी किया जा सकता है|
  • कौनसे क्रिस्टल का इस्तेमाल थेरेपी में करना है और क्रिस्टल कौनसे रंग होना चाहिए इस बात का भी ध्यान रखना होता है|
  • साथ ही शरीर के किस हिस्से पर इसे रखना है इन सारी चीज़ों को ध्यान में रखकर थैरेपिस्ट क्रिस्टल हीलिंग करता है।

क्रिस्टल थेरेपी क्यों करते है

  • ऐसा कहा जाता है की हमारे शरीर में सात चक्र होते है। इन चक्रो में ही पुरे शरीर की ऊर्जा इकठी होती है।
  • कभी भी यदि किसी चक्र की ऊर्जा अव्यवस्थित होती है तो शरीर के  उस भाग में पीड़ा होने लगती है।
  • इस कारण क्रिस्टल थेरेपी के माध्यम से चक्रों को संतुलन में लाने की चेष्टा की जाती है ताकि शारीरिक कष्टों को दूर किया जा सके|

पत्थरों का इस्तेमाल क्यों होता है

पत्थरों के अन्दर रसायन-खनिज होता है। हमारी त्वचा पर जब इन क्रिस्टल को रखा जाता है तब हमारी त्वचा इन रसायन खनिज को सोख लेती है जिससे यह हमारे शरीर के भीतर पहुँच जाता है।

इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारा शरीर उतना ही रसायन-खनिज अवशोषित करेगा, जितने की उसको आवश्यकता  है। इसके अतिरिक्त इन पत्थरों से कोई भी नकारात्मक परिणाम भी नहीं होता है।

इस थेरेपी को करते समय शरीर पर जब क्रिस्टल रखे जाते है तो कुछ क्रिस्टल शरीर पर भारी लगते है तो कुछ है हलके लगते है। कुछ क्रिस्टल ठंडे महसूस होते है तो कुछ गरम। इससे यह ज्ञात होता है की शरीर के किस हिस्से में कितना असुंतलन है और उसे किस तरह से संतुलित किया जाए।

इस थेरेपी को करते वक्त जब व्यक्ति को सभी क्रिस्टल का अनुभव एक जैसा महसूस होने लगें तो समझ लेना चाहिए कि अब सभी चक्र में संतुलन है।

क्रिस्टल थेरेपी से लाभ 

  • इस थेरेपी को करने से शारीरिक दर्द, सिरदर्द, जकड़न और मानसिक तनाव से निजात पायी जा सकती है।
  • क्रिस्टल थेरेपी से ऐंठन,अनिद्रा को भी दूर किया जा सकता है|
  • इस करने से शरीर की कमज़ोरी दूर हो जाती है और कमर के ऊपरी तथा निचले दर्द से राहत मिलती है|

 ध्यान रखने योग्य बातें

क्रिस्टल थेरेपी को करते वक्त यह ध्यान रखना आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे से अलग होते हैं। इसीलिए व्यक्ति की शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए इस थेरेपी करें।