Acute Encephalitis Syndrome: जाने क्या है एक्यूट इंसेफ्लाइटिस, क्यों होता है ये बेहद खतरनाक

हाल ही में एक रहस्मयी बुखार ने कई बच्चों को अपनी चपेट में लिया है जिससे बहुत से बच्चो की जाने चली गयी है। यह आंकड़ा 100 से भी ऊपर चला गया। यह घटना बिहार के मुजफ्फरपुर में हुई है।

बता दें कि यह बुखार ‘एक्यूट इंसेफ्लाइटिस (Encephalitis) सिंड्रोम’ यानी ‘चमकी बुखार’ है। जिससे एक से आठ साल के बच्चे ज्यादा चपेट में आते है। यह एक तरह का दिमागी बुखार है। जिसमे रोगी का शरीर एक दम से सख्त हो जाता है।

आज इस लेख में हम आपको चमकी बुखार के विषय में बता रहे है जिसके बारे में जानकर आप अपने बच्चों को इस बीमारी से सुरक्षित रख सकते है।

जानते है Acute Encephalitis Syndrome के बारे में विस्तार से। साथ ही इसके लक्षणों और सावधानियों के बारे में।

Acute Encephalitis Syndrome: जाने यह क्या है, इसके लक्षण और सावधानियां

Acute Encephalitis Syndrome

चमकी बुखार को Japanese Encephalitis भी कहते हैं। जानते हैं इसके बारे में।

  • इस बुखार को ‘एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम’, चमकी बुखार या फिर जापानी इंसेफलाइटिस (जापानी बुखार) और दिमागी बुखार भी कहा जाता है।
  • इस बुखार में अनेक संक्रमण हो सकते है। खासकर इस बुखार से बच्चे प्रभावित होते है।
  • इस बुखार का कारण बैक्टीरिया, फंगस और सिंड्रोम वायरस होता है।
  • इसमें रोगी का शरीर सख्त हो जाता है और दिमाग व शरीर में ऐठन होने लगती है। इस ऐठन को आम भाषा में चमकी कहते है।
  • यह दिमाग से जुड़ी हुई समस्या होती है। बता दे कि हमारे दिमाग में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं पायी जाती हैं जो शरीर को सही ढंग से चलाने में मदद करती है। परन्तु जब इन कोशिकाओं में सूजन पैदा हो जाती है तो इसे एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहते है।
  • इस संक्रामक बीमारी में वायरस शरीर में पहुँचकर खून में शामिल हो जाते है और प्रजनन शुरू करते हैं।
  • जैसे जैसे इनकी संख्या बढ़ती है ये खून में शामिल होकर व्यक्ति के दिमाग तक पहुंच जाते हैं। और दिमाग में पहुंच कर उनमे सूजन उत्पन्न करते है। जिसके कारण शरीर का ‘सेंट्रल नर्वस सिस्टम’ खराब होने लगता है।

Encephalitis Symptoms: चमकी बुखार के लक्षण

  • इस बुखार में रोगी के शरीर में ऐठन होती है साथ ही तेज बुखार भी रहता है।
  • इसमें कमजोरी भी आती है जिसके कारण बच्चे बार बार बेहोश होते है।
  • पूरा शरीर सुन्न हो जाता है। साथ ही रोगी को झटके भी लगते रहते है।
  • मानसिक भटकाव महसूस होना
  • घबराहट महसूस होना
  • कुछ बच्चे कोमा में भी चले जाते है

Encephalitis in Children के कारण

इसके सही कारणों का पता नहीं चल सका है लेकिन इस पर रिसर्च जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि इसका कारण लीची का सेवन है। इसके अलावा गर्मी और उमस भी इसका कारण होते है। इसके अलावा कुपोषण और गन्दगी भी इसकी वजह है।

  • चमकी बुखार में बच्चों का खास ख्याल रखे उन्हें बुखार आने पर हलके कपड़े ही पहनाए साथ ही गर्दन को भी सीधा रखे।
  • बुखार आने पर बच्चे के शरीर को समय समय पर गीले कपड़े से पोछते रहे। यदि ऐसा करते है तो बुखार दिमाग तक नहीं पहुँचेगा।
  • बच्चे को ORS का घोल पिलाये और इस बात का भी ख्याल रखे कि यह घोल 24 घंटे के अंदर ही इस्तेमाल करे फिर बच्चे को नया घोल ही पिलाये।
  • बुखार आने पर बच्चे को दाएं या बाएं तरफ लिटाकर ही अस्पताल ले जाएं।
  • डॉक्टर की सलाह पर ही बच्चे को पेरासिटामोल की गोली या सिरप दे।
  • यदि बच्चा बेहोश है तो उसे किसी छायादार स्थान पर ही लिटाए।

क्या ना करे

यदि बच्चे को बुखार आ रहा है तो कुछ चीजों को नहीं करना चाहिए यह बच्चे के लिए घातक हो सकता है। जैसे –

  • यदि बच्चा बेहोश है तो उसके मुँह में कुछ भी नहीं डालना चाहिए।
  • बच्चे को कभी भी खाली पेट लीची नहीं खिलानी चाहिए और ना ही आधी पकी व कच्ची लीची खिलानी चाहिए।
  • रोगी बच्चे के बिस्तर पर कभी नहीं बैठना चाहिए और न नहीं शोरगुल करना चाहिए
  • बुखार आने पर बच्चे को गर्म कपड़े नहीं पहनाने चाहिए।

उपरोक्त बातों का खास ख्याल रखे साथ ही डॉक्टर की सलाह माने।

आवश्यक जांच

  • डॉक्टर इस बीमारी के चलते एमआरआई या सीटी स्कैन करवा सकते हैं। इसके अतिरिक्त इसकी पहचान करने के लिए खून या पेशाब की जांच भी की जा सकती है।
  • बता दें कि प्राइमरी एंसिफलाइटिस के मामलों में रीढ़ की हड्डी से द्रव्य का सेंपल लेकर उसकी जांच की जाती है और दिमाग की मस्तिष्क की बायोप्सी भी जाती है।

उपचार

  • इस बुखार से संक्रमित मरीज़ों को तुरंत उपचार की ज़रूरत होती है। इसके लिए स्टैरॉइड इंजेक्शन, एंटीवायरल दवाएं दी जाती है। साथ ही देखभाल की जरुरत होती है जैसे द्रव पदार्थों का सेवन, आराम और बुखार रोकने वाली दवाएं आदि मरीज को देना होता है।
  • बता से कि अब तक इस संक्रमण का पूर्ण रूप से इलाज नहीं है, लेकिन इस संक्रमण से बचाव हेतु सुरक्षित और असरदार टीके है।

बरते कुछ सावधानियां

  • गर्मी के मौसम में बच्चों का खास ख्याल रखे। खासकर उनके खाने पीने पर क्योंकि गर्मियों में खाना और फल जल्दी ख़राब हो जाते है और यह बच्चों को नुकसान पंहुचा सकता है। बच्चों को ख़राब फल भी नहीं खाने देना चाहिए।
  • साफ सफाई का विशेष ध्यान दे। बच्चों को साफ सुथरे कपड़े पहनाए और साथ ही खाना खाने से पहले और बाद में हांथो को ज़रूर साफ करे।
  • बच्चो के नाखूनों को भी समय समय पर काटते रहे उन्हें बढ़ने नहीं देना चाहिए।
  • इतना ही नहीं गर्मियों के दिनों में बच्चों को धूप में नहीं खेलने देना चाहिए। रात में बच्चे को खाली पेट नहीं सोने देना चाहिए। उन्हें कुछ खिलाने के बाद ही सोने दे।
  • बच्चों को पोषित आहार खिलाना चाहिए साथ ही बच्चों को पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए।
  • जितना हो सके बच्चों को धूप से बचा कर रखे। बच्चों को बुखार आने पर उसे अनदेखा न करे समय पर डॉक्टर को दिखाए। ताकि डॉक्टर समय पर उपचार कर सके।

अब तो आप इस चमकी बुखार के बारे में जान ही गए होंगे। उपरोक्त सावधानियों को ध्यान में रखे और अपने बच्चों पर विशेष ध्यान दे उन्हें अपनी निगरानी में रखे साथ ही समय समय पर टीके लगवाते रहे ताकि बीमारियों से उनका बचाव किया जा सके।

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