Ardha Matsyendrasana: रीढ़ की हड्डी लचीली बनाये तथा कमर व पीठ दर्द कम करे

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हम अपने ब्लॉग्स में कई बार इस बारे में बात कर चुके है की आजकल की जीवनशैली में बहुत से लोग कमर और पीठ दर्द से परेशान है। अब इन दर्द के चक्कर में कोई भी अपने काम तो नहीं छोड़ सकता है। इसलिए इस कमर दर्द और Back Pain से निजात पाने के लिए लोग अक्सर पेन किलर खाने लग जाते हैं।

पेन किलर खाने से दर्द बंद हो जाता है और हम आराम महसूस करते है। लेकिन क्या आप जानते है इससे हमारे शरीर को कई साइड इफेक्ट्स होने का खतरा रहता है और कई बार तो सिचुएशन ऐसी हो जाती है की इसे खाने की आदत लगने बाद इसे खाये बिना आराम हीं नहीं मिलता है।

अब दर्द की समस्या तो कभी ख़तम नहीं होने वाली तो क्या आप जिंदगी भर दवाई लेते रहेंगे? यदि नहीं तो हम आपको बता दे की योग के अभ्यास से भी कमर दर्द व pith dard की समस्या से निजात मिलती है। योग आज पूरे विश्व में अपने गुणों के कारण प्रसिद्ध हो रहा है। सबसे अच्छी बात होती है की इसका मानव के शरीर पर किसी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट नहीं पड़ता है।

आज हम योग की विधा में मौजूद ऐसे ही एक आसन के बारे में बताने जा रहे है जिसका नाम है Ardha Matsyendrasana. इस आसान के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी में होने वाले हर तरह के दर्द से छुटकारा मिल जाता है और साथ हीं इससे आपकी इस हड्डी में लचीलापन भी आ जाता है।

Ardha Matsyendrasana: जाने अर्धमत्स्येन्द्रासन करने की विधि और फायदें

Ardha Matsyendrasana

अर्धमत्स्येन्द्रासन को जानने से पहले मत्स्येन्द्रासन को जान लें। दरअसल मत्स्येन्द्रासन में किये जाने वाले मुद्राओं के आधे स्वरूप के साथ लोगों के मध्य अर्धमत्स्येन्द्रासन का योग आता है।

ऐसा माना जाता है कि मत्स्येन्द्रासन नाम के इस आसान की शुरुआत गोरखनाथ के पूज्य गुरू स्वामी मत्स्येन्द्रनाथ जी ने की थी। वे अधिकतर इसी आसन में ध्यानरत रहा करते थे। मत्स्येन्द्रासन की आधी मुद्राओं से बनी अर्धमत्स्येन्द्रासन की रचना भी गोरखनाथ के इन्हीं गुरू स्वामी मत्स्येन्द्रनाथ द्वारा की गयी थी। आइये जानते हैं इसे कैसे अभ्यास किया जाता है।

अर्धमत्स्येन्द्रासन करने की विधि

  • अर्धमत्स्येन्द्रासन को हाफ लार्ड ऑफ़ दी फिशेस पोज़ भी कहते है।
  • इसके अभ्यास के लिए सबसे पहले जमीन पर कोई आसन बिछा कर बैठ जाएँ और अपने दोनों पैरों को आगे की तरफ लंबा कर लें।
  • अब अपने बायें पैर को अपने घुटने से मोड़ते हुए अपनी एड़ी को गुदाद्वार के नीचे ले के आएं ।
  • अब अपने तलवे को अपनी राइट थाई के साथ लगा कर रखें इसके साथ हीं राइट पैर को उसके घुटने से मोड़ते हुए खड़ा करें और लेफ्ट पैर की थाई से ऊपर की तरफ ले जा कर थाइज के पिछले हिस्से में फर्श के ऊपर ऱख दें।
  • इसके साथ हीं इस अर्धमत्स्येन्द्रासन आसन के लिए आपकी पूर्वभूमिका अब बिलकुल तैयार हो गई है।
  • इसके बाद अपने लेफ्ट हैण्ड को अपने राइट लेग के घुटने के ऊपर से पार करते हुए लेफ्ट हैंड से राइट लेग का अंगूठा पकड़ लें।
  • अब अपने पैरों के ऊपर के भाग जिसे धड़ कहते हैं को अपनी दाहिनी तरफ मोड़ें ऐसा करने पर ध्यान रखें की आपके राइट लेग के घुटने के ऊपर लेफ्ट शोल्डर का प्रेशर अच्छे से पड़े।
  • अब अपने राइट हैंड को पीठ की तरफ से घुमाते हुए अपने लेफ्ट लेग की थाई का निचला हिस्सा पकड़ें।
  • अपने सिर को रिफगत साइड में इतना रोटेट करें कि आपकी ठोड़ी और आपका लेफ्ट शोलडर एक स्ट्रेट लाइन में आ जाय।
  • इस दौरान सीना बिल्कुल तना हुआ रखें और नीचे की तरफ बिलकुल ना झुके।

यह सिर्फ एक तरफ का योग आसन हुआ। इसी तरह पहले लेफ्ट लेग को मोड़ते हुए अपनी एड़ी को गुदाद्वार के नीचे ला कर दूसरी ओर का भी आसन संपन्न करें। शुरुआत में पाँच सेकण्ड तक इस आसन का अभ्यास करना पर्याप्त होता है। आगे चलकर आप अभ्यास की समयसीमा बढ़ाकर इसे एक मिनट तक भी कर सकते हैं।

अर्धमत्स्येन्द्रासन के लाभ

  • अर्धमत्स्येन्द्रासन के नियमित अभ्यास से आपका मेरूदण्ड हमेशा स्वस्थ और लचीला बना रहता है।
  • मेरुदंड के स्वस्थ रहने से आपके यौवन में स्फूर्ति हमेशा बनी रहती है।
  • यह आसान रीढ़ की हड्डियों के अलावा इन हड्डियों से निकलने वाले और जुड़े नाड़ियों को भी अच्छा वर्कआउट करवा देते हैं।
  • इसके कारण पीठ, Lower Back Pain, कमर और जोड़ों के दर्द की समस्या से भी आपको निजात मिल सकता है।
  • अर्धमत्स्येन्द्रासन पेट के अलग अलग अंगों के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद साबित होता है।
  • इसे करने से पीठ, पैर, गर्दन, पेट के नले, हाथ, नाभि से नीचे के भाग, कमर एवं छाती की नाड़ियों में लाभदायक खिंचाव प्राप्त होता है और इस खिंचाव का इन तमाम अंगों पर सुखद और लाभकारी असर पड़ता है।
  • इसके फलस्वरूप बन्धकोष की समस्या दूर हो जाती है।
  • इस आसन को करने से आपकी जठराग्नि बढ़ जाती है।
  • यकृत, प्लीहा और निष्क्रिय वृक्क होने पर यह आसन लाभ पहुँचाती है।
  • इसे करते समय जब आप शरीर को मोड़ते है तो शरीर की ज्यादातर मांसपेशियों के अंदर तनाव कम हो जाता है।
  • अर्धमत्स्येन्द्रासन का नियमित रूप से अभ्यास करने पर व्यक्ति की एकाग्रता में भी बढ़ोतरी होती है।
  • पाचन शक्ति को सुचारु करने के लिए भी इस आसन का व्यापक रूप से अभ्यास किया जाता है।
  • यह आसन अग्न्याशय को सक्रिय कर देता है इसलिए मधुमेह के रोगियों को इसे करना फ़ायदेमंद होता है ।

सावधानी :- यदि आपको जोड़ों या कूल्हों में बहुत ज्यादा दर्द हो तो इस आसन को नहीं करना चाहिए।

आज आपने इस लेख में पढ़ा अर्धमत्स्येन्द्रासन करने की विधि और इसके अनगिनत लाभों के बारे में। तो अगर आपको भी पीठ दर्द, Kamar Dard या जोड़ों का दर्द रहता है तो आप इस आसन के नियमित अभ्यास से इससे छुटकारा पा सकते हैं।

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