बढ़ा हुआ वायु प्रदूषण सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है, इस बात से हर कोई परिचित है| वायु प्रदूषण हमारे लिए इतना ख़राब है की यदि ज्यादा समय हम इसमें बिताते है तो दिल के रोगों का खतरा बढ़ जाता है|

आपको बतादे की भारत भले ही विकास के मामले में आगे बढ़ा हो, स्वच्छता के मामले में आगे बढ़ गया हो, लेकिन वायु प्रदूषण का निपटारा करने में वो अभी भी पीछे है|

ग्रीनपीस स्टडी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष वायु प्रदूषण से कई मौते हुई और प्रदूषण से होने वाली मौतों के मामले में भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है।

कुछ शहरों में प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ गया है जो स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है| और गर्भवती महिलाओं के लिए तो ये बेहद खतरनाक हो सकता है, गर्भवती महिला की स्तिथि बहुत बिगड़ सकती है अगर महिला दमा से पीड़ित हो| आइये विस्तार से जानते है Effects of Pollution during Pregnancy.

Effects of Pollution during Pregnancy: शिशु का विकास होता है प्रभावित

Effects of Pollution during Pregnancy

वायु प्रदूषण का गर्भवती पर क्या असर होता है?

निर्धारित समय से पहले ही प्रसव हो सकता है

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार जिन गर्भवती महिलाओ को दमे की बीमारी है, अगर वे वायु प्रदूषण के संपर्क में आती हैं तो उनमें निर्धारित समय से पहले ही प्रसव की संभावना बढ़ जाती है|

गर्भवती महिला जिसे दमा हो उसका आखिरी छह सप्ताह का समय काफी गंभीर होता है| यदि वह अत्यधिक प्रदूषण के संपर्क में आती है जैसे की एसिड, मेटल और हवा में मौजूद धूल कण तो समय से पूर्व ही प्रसव हो सकता है|

नवजात बच्चे के वजन पर भी असर

कई अध्ययनों में यह बात भी सामने आई है कि प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से नवजात बच्चे के वजन पर भी असर पड़ता है|

उपरोक्त जानकारी जरनल ऑफ एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्यूनॉलॉजी में प्रकाशित हुई है|

WHO के सर्वे द्वारा मिली है जानकारी

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने दुनिया के 91 देशों के कुल 1600 शहरों  में इस चीज़ का सर्वे किया| इस सर्वे के मुताबित WHO ने अपना स्टैण्डर्ड पैमाना पार्टिकुलेट मैटर (PM) निर्धारित किया जिसके तहत उसने 2.5 से लेकर 10 माइक्रोन तक के प्रदूषित कणों का अध्ययन किया, जिससे हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर पढता है|

जल्द ही लेना होगा एक्शन

पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबित Air Pollution को नियंत्रित करने के लिए जल्द ही विस्तृत योजना बनाना जरुरी है| यदि ऐसा नहीं हुआ तो  हर साल प्रदूषण नए रिकॉर्ड बनाता जाएगा।

मालूम हो की सर्दियों में  खासकर प्रदूषण का स्तर हर साल बढ़ जाता है। WHO के रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल दिल्ली बीजिंग को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गई थी।