Atherosclerosis in Hindi: धमनियों के सख्त होने पर हो सकता है एथेरोस्क्लेरोसिस

शरीर में उपस्थित धमनियाँ शरीर के लिए महत्वपूर्ण कार्य करती है। यह दिल से ऑक्सीजन के साथ अन्य पोषक तत्वों को शरीर के अतिरिक्त भागों तक पहुंचाने का काम करती है।

इन धमनियों में जब प्लाक की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो यह धमनियाँ सख्त होने लगती है। इस स्थिति को एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहा जाता है।

प्लाक कैल्शियम, वसा, रक्त और कोलेस्ट्रॉल में पाए जाने वाले अन्य पदार्थो से निर्मित होता है। जैसे जैसे समय बढ़ता है प्लाक धमनियों को कठोर बनाता जाता है साथ ही प्लाक के कारण यह संकीर्ण भी हो जाती है। जिसके कारण शरीर के हिस्सों में ऑक्सीजन के प्रवाह में बाधा उत्पन्न होने लगती है।

एथेरोस्क्लेरोसिस होने से हृदयाघात जैसी कई गंभीर बीमारियों के होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती है। अगर आप इसके बारे में नहीं जानते है पढ़े Atherosclerosis in Hindi.

Atherosclerosis in Hindi: जानिए इसके कारण, लक्षण और उपचार

Atherosclerosis in Hindi

 

एथेरोस्क्लेरोसिस के लक्षण अधिकतर युवाओ में नहीं दिखाई देते है। यह उम्र बढ़ने के बाद ही नजर आते है जैसे

  • पसीना आना
  • साँस की कमी या साँस लेने में परेशानी होना
  • थकावट का अनुभव होना
  • असमंजस की स्थिति होना
  • कमजोरी का अहसास
  • अचानक से तेज सिर दर्द होना
  • छाती में दर्द का अहसास
  • पैरों में कमजोरी और झुनझुनी का आना
  • भुजाओं में कमजोरी का आना
  • पैर की मांसपेशियों में रक्त संचार में कमी
  • धमनी के अवरुद्ध होने पर भुजा, पैर या अन्य भागों में दर्द होना।

कैसा होता है एथेरोस्क्लेरोसिस?

एथेरोस्क्लेरोसिस बीमारी का प्रारम्भ बचपन से ही हो जाता है परन्तु इसके लक्षणों का पता उस समय नहीं हो पाता क्योंकि यह धीरे धीरे बढ़ने वाली बीमारी होती है। एथेरोस्क्लेरोसिस की समस्या 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगो में क्यों देखने को मिलती है। इसके कुछ मुख्य कारण है।

  • मोटापा
  • गठिया रोग
  • उच्च रक्तचाप का होना
  • धूम्रपान और तम्बाकू का सेवन
  • कोलेस्ट्रॉल और वसा की मात्रा रक्त में अधिक होना
  • मधुमेह की वजह से खून में शर्करा की मात्रा का ज्यादा होना

एथेरोस्क्लेरोसिस की जाँच कैसे करें

एथेरोस्क्लेरोसिस की जाँच के लिए रोगी का शारीरिक परीक्षण किया जाता है साथ ही आवश्यक जाँच भी की जाती है। इसे पहचाने और उपचार के लिए निम्न जांचे की जाती है जैसे –

  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम – इसे ईसीजी भी कहते है। इसका उपयोग ह्रदय की जाँच करने के लिए किया जाता है। जिसके कारण ह्रदय के दौरे के बारे में जानकारी मिलती है। इस तकनीक द्वारा ह्रदय से पास होने वाली विधुत संकेतो को नोट करने में मदद मिलती है।
  • एंकल/ब्रेकिअल इंडेक्स – इसके द्वारा यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि पैरो की धमनियों में एथेरोस्क्लेरोसिस की समस्या है की नहीं।
  • अलग अलग खून की जाँच – रक्त की जाँच करके रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जाँच की जाती है।
  • डॉप्लर अल्ट्रा साउंड – इस तकनीक की सहायता है धमनियों में रक्त के प्रवाह की जानकारी मिलती है।
  • स्ट्रेस टेस्ट – इस टेस्ट के जरिये आपके रक्तचाप, ह्रदय की गति और साँस पर ध्यान दिया जाता है। साथ ही यह भी देखा जाता है कि जब आप शारीरिक गतिविधि करते है तो आपका ह्रदय किस गति से कार्य करता है।
  • एंजियोग्राम और कार्डियक कैथीटेराइजेशन – इसके द्वारा यह पता लगाया जाता है कि शरीर में उपस्थित धमनियां संकुचित है या नहीं।

उपरोक्त जांचो के अतिरिक्त निम्न की जाँच भी हो सकती है।

  • सीटी स्कैन
  • इकोकार्डियोग्राफी
  • छाती का एक्स-रे

एथेरोस्क्लेरोसिस से बचाव

  • धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन भी एथेरोस्क्लेरोसिस होने का कारण होता है इसलिए इसके बचाव के लिए शराब का सेवन ना करे।
  • अपने मोटापे को संतुलित रखने के लिए व्यायाम, योग और संतुलित आहार का सेवन करे।
  • रक्तचाप के स्तर को संतुलित रखे। साथ ही अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी सही बनाकर रखे।
  • गुर्दे के रोगी और मधुमेह रोगियों को अपना खास ख्याल रखना चाहिए।
  • जीवनशैली को सक्रिय बना कर रखे और एक स्वस्थ जीवन जिए।
  • समय समय पर अपने डॉक्टर से अपनी बीमारी की जाँच कराते रहना चाहिए।
  • व्यायाम और योग को नियमित रूप से करे यह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए लाभकारी होता है साथ ही अन्य बीमारियों से भी बचाव करने में सहायक होता है।
  • जितना हो सके तनाव से दुरी बनाये रखे।

एथेरोस्क्लेरोसिस के लिये आहार

  • उचित आहार लेने से एथेरोस्क्लेरोसिस की रोकथाम की जा सकती है।
  • इसके लिए गाजर,पालक, आदि का सेवन करना अच्छा होता है इनमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते है। साथ ही हरी सब्जियों का सेवन करे।
  • साथ ही आप उच्च-रेशे युक्त पदार्थ, अनाज आदि का सेवन भी कर सकते है।
  • ओमेगा-3 अनसैचुरेटेड फैटी एसिड और मोनोसैचुरेटेड फैटी एसिड पदार्थो का सेवन करना लाभकारी होता है।
  • मेवों का सेवन करना भी फ़ायदेमंद होता है यह शरीर को मजबूत बनाने में भी मदद करते है।
  • शरीर में पानी की कमी ना होने दे जितना हो सके पर्याप्त मात्रा में पानी पिए।

इन आहार से परहेज करे

  • कैफीन युक्त पेय पदार्थ का सेवन ना करे यह समस्या उत्पन्न कर सकते है।
  • नियमित रूप से शक्कर और नमक का सेवन संतुलित मात्रा में करे।
  • वसायुक्त डेरी उत्पादों का सेवन भी कम मात्रा में करे।
  • रेड मीट को भी कम मात्रा में ही खाये।

एथेरोस्क्लेरोसिस के जोखिम कारक

एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। जैसे-

  • एथेरोस्क्लेरोसिस से कोरोनरी धमनी रोग भी होता है। कोरोनरी धमनी हृदय तक रक्त पहुंचने का कार्य करती है। इसने प्रभावित होने पर हृदयाघात या एनजाइना होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
  • एथेरोस्क्लेरोसिस होने से पेरीफेरल आर्टेरिअल डिजीज होने की सम्भावना भी हो सकती है। इस प्राकर की धमनियां पैर, कूल्हे और बांह में पायी जाती है। इन धमनियों के प्रभावित होने पर इनमे दर्द होता है और कभी कभी सुन्नता या फिर संक्रमण भी हो जाता है।
  • कैरोटिड धमनी रोग भी एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण हो सकता है। ये धमनी मस्तिष्क में रक्त पहुंचाने का कार्य करती है। इनके प्रभावित होने पर शरीर में लकवा की समस्या हो सकती है।

उपरोक्त लक्षणों में से यदि आपको कोई भी संकेत नजर आते है तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करे और इसके बारे में परामर्श ले। समय पर उपचार होने पर रोग की रोकथाम की जा सकती है।


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