Eye Problem in Hindi: आँखों में होने वाले सामान्य रोग और उसके बचाव

आज के जमाने में हर कोई अपनी जीवनशैली में व्यस्त है। आज लोग अपने काम काज में इतना व्यस्त ज्यादा व्यस्त रहते है की खुद का ख्याल रखना ही भूल जाते है। इसी कारण से लोग आये दिन कई सारी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।आज कल हर व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से पीड़ित है। आज के समय में छोटे छोटे बच्चों को आँखों की बीमारियाँ हो रही है और उनको आँखों का चस्मा लग रहा है

ऐसा देखा जा रहा है की आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे की कंप्यूटर, स्मार्ट फ़ोन, टैबलेट का चलन इतना तेजी से बढ़ता जा रहा है। आज की बदलती टेक्नोलॉजी ने हर काम आसान तो कर दिया है। लेकिन इनका हद से ज्यादा उपयोग करने से लोग कई प्रकार की बीमारी का भी शिकार हो सकते है। आप सभी जानते है आँखे हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। इसलिए हमारी यह ज़िम्मेदारी बनती है कि हम इनका भी बखूबी ख्याल रखें।

आँखो की वजह से ही हम देख पाते है, अगर यह खराब हो जायेगी तो हम दुनिया ही नहीं देख पाएंगे। आजकल हर कोई ऑफिस और कारोबार में काम करने के लिए कंप्यूटर और लैपटॉप पर दिन में 9 से 10 घंटे तक अपने काम करते है। इसके कारण हमारी आँखें थक जाती है और साथ साथ रौशनी पर भी असर पड़ता है। जिससे हमारी आँखों के उपर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जैसे जैसे हमारी आँखें कमजोर होती जाती है तो हमे फिर चश्मे, लेंस और कई बार तो ऑपरेशन का सहारा लेना पड़ता है।

हर बीमारी अपने आने के संकेत देती है पर हम लोग अपनी ज़िंदगी में इतने वयस्त होते है की अपनी आँखों की बीमारियों पर ध्यान ही नहीं दे पाते है और न ही उनका ख्याल रख पाते है। आज इस लेख हम आपको बातयेंगे की जब आप अपनी आँखों का ख्याल नहीं रख पाते है तो आपको कौन सी बीमारी हो सकती है। आँखों में कितने प्रकार की बीमारी होती है और किस कारण होती है। आइये जानते है Eye Problem in Hindi.

Eye Problem in Hindi: आँखों से संबंधित सामान्य समस्याएं क्या क्या हो सकती हैं

Eye Problems

क्या आप जानते है उम्र के साथ ही हमारी आंखों के आस-पास की मांसपेशियाँ अपना लचीलापन खोने लगती हैं और कठोर हो जाती है। आँखें तभी तक ठीक काम करती हैं जब तक उनकी कॉर्निया, जलीय द्रव, ताल और ताल के पीछे रहने वाले द्रव्य स्वच्छ रहते हैं। जब आँख की बीमारी होती है तो हर किसी को पता नहीं पड़ता है की यह क्यों हुआ और इसके क्या परिणाम हो सकते हैं। लोग तभी इस तरफ ध्यान देते हैं जब आखों से दिखाई कम देने लगती है। आइये आज जानते कौन कौन सी बीमारी हो सकती है आँखों में।

आँखों की बीमारी के प्रकार

ग्लूकोमा: Glaucoma

  • ग्लूकोमा एक तरह की आँख में होने वाली सामान्य बीमारी है। इसे काला मोतिया भी कहा जाता है।
  • यह आँखों की ऑप्टिव नर्व को धीरे धीरे क्षतिग्रस्त कर देती है और उसे नुकसान पहुंचा देती है।
  • यह दो प्रकार से होती है। प्राथमिक खुला कोण और बंद कोण कांच बिंदु।
  • प्राथमिक खुला कोण धीरे धीरे समय के साथ दृष्टि को नष्ट कर देता है और दूसरा कोण बंद अचानक प्रकट होता है और तेजी दृष्टि को नष्ट कर देता है।
  • ग्लूकोमा की समस्या में व्यक्ति को पूरी तरीके से दिखना बंद हो जाता है।

आँखों का भेंगापन: Squint

  • यह आँखों की बीमारी बचपन से ही होती है। इसका इलाज चश्मा या ऑपरेशन है इसके अलावा यह आँखों के भेंगेपन पर निर्भर करता है।
  • इसे आँखों का तिरछापन भी कहा जाता है। इसे अंगरेजी में सिक्विंट कहते हैं, यह ऐसी बीमारी है, जो किसी भी उम्र में आदमी और औरत को हो सकती है।
  • अगर इस बीमारी का पता शुरू में ही चल जाए, तो इलाज आसान हो जाता है।

कंजंक्टिविटिस: Conjunctivitis

  • जब आँख की बाहरी सतह पर गंदगी जमा होने लगती है और इसमें गंदे बैक्टीरिया जमे होने लगते है, जिसके कारण आँख लाल हो जाती, पानी आने लगता है और पलके चिपकने लगती है।
  • कंजक्ट‍िवाइटिस एक संक्रामक बीमारी है, यानी यह एक व्यक्त‍ि से दूसरे व्यक्त‍ि को हो सकती है।
  • यदि किसी को कंजक्ट‍िवाइटिस बीमारी हो गई है तो उसकी आंखों में न देखें और न ही उसका रुमाल, तौलिया, आदि का उपयोग करें।

आंख की गुहेरी:

  • ये समस्या धूल मिट्टी से फैलने वाले बैक्‍टीरिया या फिर स्टैफिलोकोकस बैक्‍टीरिया द्वारा होती है।
  • इस बीमारी में आँख की पलकों पर बाहर की तरफ या अंदर की तरफ फुंसी हो जाती है।
  • यह फुंसी पीले रंग की होती है। इस फुंसी में दर्द और सूजन की समस्या होती है साथ ही पलके झपकाना मुश्किल हो जाता है।
  • कई बार इससे आँख में खुजली या जलन भी होती है। तेज रोशनी से दिक्कत होने लगती है।
  • इससे बचने के लिए बार बार अपने हाथों से फुंसी को हाथ न लगाएं। आखो को मसलें नहीं और फुंसी को फोड़ने की कोशिश न करें।

मोतियाबिंद: Cataract

  • जब किसी व्यक्ति की आँखों की लेंस पर धूल जमने लगती है तो दिखने में धुंधलापन नज़र आने लगता है, इसे मोतियाबिंद कहते है।
  • यह बीमारी अधिकतर 40 से 45 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति को होती है। वृद्ध लोगो को अक्सर हो जाती है।
  • यह धीरे धीरे आँखों की रौशनी को कम करे देती है। जिसकी वजह से इंसान अंधा हो सकता है।
  • इसमें व्यक्ति को रंग दिखना बंद हो जाते है। इसका इलाज बस ऑपरेशन ही होता है।

आँखों में फोले होना:

  • अक्सर आँख में फोले होने, चोट लगने और जख्म होने की समस्या हो जाती है जो विटामिन ए की कमी की वजह से होता है।
  • जिसके कारण में आँखों में दर्द होता है, लाल हो जाती है और बार बार पानी आता है।
  • इसके इलाज के लिए चश्मा, ऑपरेशन या पुतली बदलाने की जरूरत पड़ती है।

आंख पर जोर: Eyestrain

  • कोई भी जो बहुत ज्यादा समय लगातार पढ़ता रहता है, कंप्यूटर पर काम करता रहता है, या लंबी दूरी का सफर तय करता है, इस समस्या के बारे में जानता है।
  • ऐसा तब होता है जब आप अपनी आंखों का ज्यादा उपयोग करते हैं। यदि आपकी आंखें तनावग्रस्त महसूस करती हैं, तो उन्हें थोड़ा आराम दे।

आँखों को स्वस्थ कैसे रखें?

  • जब भी बाहर जा रहे हों तो हमेशा चश्मे का उपयोग करें।
  • जहाँ तक हो सके कांटेक्ट लेंस लगाने से बचे।
  • आँखों के नीचे काले धब्बे से बचने के लिए भरपूर नींद लें।
  • कभी भी कम रौशनी में काम नहीं करें और कंप्यूटर पर काम करते समय 20 -25 इंच की दूरी रखें।
  • आँखों की देखभाल के लिए योग काफी मददगार होता है।
  • दिन 3 से 4 बार अपनी आँखें ठंडे पानी से धोएं ताकि धूल नहीं जमे आँखों पर।

तो ये थे आँखों से जुड़े बीमारियों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य। इसे पढ़ कर आप अपने आँखों का ख्याल ज़रुर रखें।


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