जानुशीर्षासन थोड़ा थोड़ा पश्चिमोत्तानासन की तरह लगता है| इससे वो सारे लाभ मिलते है जो पश्चिमोत्तानासन को करने से मिलते है| यह पुरे शरीर के लिए एक अच्छा व्यायाम है|

इस आसन को खाली पेट किये जाता है| इस आसन की खासियत की बात करे तो इसे करने से ना इलाज बीमारी जैसे की अस्थमा आदि में भी फायदा मिलता है| जो लोग सांस सम्‍बंधी रोगों में राहत पाना चाहते है उन्हें इस आसन का अभ्यास जरूर करना चाहिए|यह आपके मन और ह्रदय दोनों को शांत करता है|

इस आसन को करने से सोई हुई कुंडलिनी शक्ति जाग जाती है| किन्तु यदि आप गर्भवती है तो जान से की गर्भावस्था के तीन महीने बाद इस आसन को नहीं करना होता है| शुरुवाती तीन महीने में भी आप इसे डॉक्टर के राय से ही करे| आइये आज के लेख में और विस्तार से जानते है Janu Sirsasana Yoga.

Janu Sirsasana Yoga क्या है और इसके लाभ तथा सावधानियां

Janu Sirsasana Yoga

जानुशीर्षासन को करने की विधि

  • जानुशीर्षासन को करने के लिए अपने पैरों को सामने की और से सीधे फैलाकर बैठ जाये, लेकिन एक बात का ख्याल रखे की रीढ़ की हड्डी एकदम सीधी हो|
  • इसके पश्चात अपने बाएँ घुटने को मोडले और इसके तलवे को दाहिनी जांघ के पास रखें, बायाँ घुटना ज़मीन पर रहने दे|
  • अब सांस भरे, दोनों हाथो को सर से ऊपर उठाये, इनमे खिंचाव बने तब तक आपको उठाना है|
  • अपनी कमर को दाहिनी और घुमाएँ, सांस को छोड़ते हुए आगे की और बढे और अपनी ठुड्डी को पंजों से पकड़ने की कोशिश करे| इस दौरान अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी रखे|
  • यदि आप कर पाए तो अपने पैरो के अंगूठों को पकड़ने की कोशिश करे| अपनी कोहनियो को आराम देने के लिए जमीन पर टिकाये|
  • साँसों को रोककर इसी स्तिथि में बने रहे| फिर सांस भरे और इसे छोड़ते हुए धीरे धीरे ऊपर उठे, अपने हाथो को भी बगल के निचे ले आये|
  • इस पूरी प्रक्रिया को आपको दाये पैर के साथ भी दोहराना है|

 

Janu Sirsasana Benefits in Hindi: इसको करने के फायदे

  1. इसको करने से पीठ के निचले हिस्से का अच्छा व्यायाम हो जाता है|
  2. इसे करने से पेट की अतिरिक्‍त चर्बी दूर हो जाती है और आपको मिलता है सपाट पेट|
  3. कमर दर्द की समस्या में इससे राहत मिलती है| महिलाओ को इसका अभ्यास जरूर करना चाहिए|
  4. जानुशीर्षासन को करने से पाचन क्रिया दुरूस्‍त रहती है और आप स्वस्थ रहते है|
  5. इस योगासन का अभ्यास करने से उदर के अंगों व कन्धों का व्यायाम हो जाता है|
  6. अस्‍थमा और साइनस जैसे श्वास संबंधी बीमारियों में यह फायदा करता है|
  7. इसके नियमित अभ्यास से किडनी और लिवर के कार्य सुचारू रूप से होने लगते है|
  8. इसे करने से रक्त का संचार सुधरता है और शरीर के अंगो में लचीलापन आता है|
  9. यह स्त्रियों में योनि से संबंधित विकारो को दूर करता है|
  10. जिन लोगो को हर्निया की शिकायत है, उन्हें जानुशीर्षासन का अभ्यास जरूर करना चाहिए|
  11. इसके अलावा जो लोग जानुशीर्षासन का अभ्यास करते है उनमे तनाव दूर होता है और उनके दिमाग को भी शांति मिलती है।

 

जानुशीर्षासन के पहले किये जाने वाले आसन

  • उत्तानासन
  • बद्ध कोणासन
  • अधोमुख शवासन
  • वृक्षासन
  • बालासन
  • सुप्त पादंगुष्ठासन

 

जानुशीर्षासन के बाद किये जाने वाले आसन

  • फॉरवर्ड बेंड
  • सीटेड

ऊपर आपने जाना Janu Sirsasana Yoga के बारे में| यदि आप योग के लिए नए है तो योग गुरु के निर्देशो में ही इस आसन का अभ्यास करे| ह्रदय रोग और उच्च रक्तचाप से पीढित रोगियों को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए|