Swine Flu Symptoms in Hindi: उचित जानकारी से करें स्वाइन फ्लू से बचाव

आज के दौर में बीमारियाँ बहुत तेजी से बढ़ रही है। जैसे जैसे हम बीमारियों की दवाएं ढूंढते जाते है वैसे वैसे हमारे सामने नयी नयी बीमारियाँ सामने आती जाती हैं। यह एक बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि ये नई नई बीमारियाँ गंभीर भी हो सकती है।

सबसे ज्यादा बीमारियाँ अलग अलग प्रकार के वायरस के संक्रमण की वजह से लोगों में फ़ैल रही हैं। आये दिन आप इसके नए नए नाम जरूर सुनते होंगे जैसे की चिकनगुनिया, रोटा वायरस आदि। इसी प्रकार का एक और वायरस तेजी के साथ दुनिया में फ़ैल रहा है जिसका नाम है स्वाइन फ्लू।

स्वाइन फ्लू के बारे में भी सभी को जानकारी होना ज़रूरी है ताकी आप अपना और अपने परिवार वालो का इस गंभीर और घातक बीमारी से बचाव कर सके। साथ ही अपने आस पड़ोस के लोगो को भी इसकी जानकारी दे सके और उनका भी बचाव कर सकें।

स्वाइन फ्लू  के चलते कई लोगो की मृत्यु भी हो चुकी है। इसलिए यह घातक भी हो सकती है। आइये आज के इस लेख में जानते है इस घातक बीमारी की पहचान हम किस प्रकार से कर सकते हैं और इसके बारे में कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य विस्तार से। पढ़िए Swine Flu Symptoms in Hindi.

Swine Flu Symptoms in Hindi: जानिए स्वाइन फ्लू के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय  

Swine Flu Symptoms in Hindi

क्या है स्वाइन फ्लू ?

  • स्वाइन फ्लू को H1N1 भी कहा जाता है।यह एक संक्रामक रोग है।
  • यह बीमारी सुअर के संपर्क में आने से फैलती है। इसलिए इसे स्वाइन फ्लू कहा जाता है।  
  • साल 2009 में इसे एक महामारी घोषित किया गया था।
  • यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल जाता है।
  • सर्दियों के मौसम में स्वाइन फ्लू से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ जाती है।

कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू ?

  • यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल जाता है।
  • यदि कोई व्यक्ति खाँसता है या फिर छीकता है तो उसके मुँह और नाक के द्वारा इसके वायरस भी बाहर आ जाते है जो किसी दूसरे स्वस्थ व्यक्ति के द्वारा साँस लेने पर आसानी से उसके अंदर प्रवेश कर जाते है।
  • यह संक्रमण सुअरो से आता है इसलिए जो लोग सुअरो के संपर्क में ज्यादा रहते है उन्हें यह संक्रमण होने की सम्भावना अधिक रहती है।
  • इस संक्रमण को फैलाने वाले वायरस हवा में काफी समय तक बने रहते है जैसे की किसी दरवाज़े के हेंडल पर, पकड़ने वाली चीजों पर या फिर एटीएम काउंटर के बटन्स पर और जब कोई व्यक्ति ऐसी चीजों को अपने हाथों से छूता है और फिर वह अपने उन्ही हाँथ से अपना मुँह, आंख और नाक को छूता है तो वह खुद भी इससे संक्रमित हो जाता है।

स्वाइन फ्लू  के लक्षण

ऐसा माना जाता है की स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते है। इनमें बहुत कम अंतर होता है, जिसके कारण इसका पता आराम से लगाया जा सकता है।

  • सिरदर्द का होना
  • ज्यादा थकान
  • ठंड लगना
  • कफ का होना
  • गले में खराश आना
  • बुखार
  • भूख की कमी
  • मांसपेशियों में अत्यधिक दर्द
  • सांस लेने में कठिनाई
  • पेट खराब हो जाना
  • उल्टी या दस्त होना
  • साँस फूलना
  • बुखार के साथ ठंड लगना
  • खांसी
  • नाक बहना
  • बदन में दर्द रहना
  • आँखों का लाल हो जाना

यदि किसी व्यक्ति के ऊपर यह संक्रमण बना रहता है तो उस व्यक्ति को निमोनिया भी हो सकता है। उपरोक्त लक्षण यदि ज्यादा दिन तक बने रहते हैं तो इस बारे में अपने डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करे। इस तरह आप समय रहते ही बीमारी का पता लगा सकते हैं और खुद को सुरक्षित कर सकते हैं।

स्वाइन फ्लू का उपचार

  • उपरोक्त लक्षणों के होने पर मरीज की जाँच की जाती है।
  • फिर फ्लू होने पर मरीज को डॉक्टर की निगरानी में रखा जाता है।
  • उपचार के लिए मरीज को उसके वजन और उम्र के मुताबिक Tamiflu नामक दवा दी जाती है।
  • जब तक रोगी पूरी तरह से स्वथ्य नहीं हो जाता है उसे अस्पताल में ही रखा जाता है।

डॉक्टर द्वारा कराई जाने वाली जांचे

  • चेस्ट x-ray: यदि किसी व्यक्ति को निमोनिया हो जाता है तो उसे चेस्ट के एक्स रे करवाने की सलाह दी जाती है।
  • खून की जाँच
  • नोज एंड थ्रोट Swab Test – स्वाइन फ्लू होने पर नाक और गले के लिए Swab टेस्ट किया जाता है। इसके द्वारा 15 मिनट के अंदर ही यह पता लगा लिया जाता है की व्यक्ति के अंदर आखिर यह किस प्रकार का इन्फ्लुएंजा है और व्यक्ति  संक्रमित है की नहीं।

स्वाइन फ्लू  का इलाज

रोगी को निम्न सलाह दी जाती है ताकि उसकी शक्ति को वापस लाया जा सके। जैसे –

  • तरल पदार्थ का ज्यादा सेवन करना
  • खांसी को कम करने वाली दवा का इस्तेमाल करना
  • मांसपेशियों के दर्द और बुखार को कम करने वाली दवा का सेवन
  • बेड रेस्ट
  • कुछ लोगो का कहना है की इसका इलाज संभव नहीं है। आपको बता दे की ऐसा नहीं है। यदि 48 घंटे के अंदर इसकी दवा ले ली जाए तो इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।

किसे हो सकता है स्वाइन फ्लू?

  • गर्भवती महिलायें
  • 5 साल से कम उम्र के बच्चे
  • 50 साल से अधिक के व्यक्ति
  • जिन लोगो को मधुमेह, रक्तचाप जैसी बीमारी है
  • जिन लोगो में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी हो

स्वाइन फ्लू के बचाव

  • स्वाइन फ्लू  से बचाव के लिए वैक्सीन लेना अच्छा होता है। इससे आपको काफी हद तक सुरक्षा मिल जाती है।
  • यदि कोई व्यक्ति खांस रहा हो या फिर छींक रहा है तो उससे दूरी बनाये रखे। साथ ही खुद के खांसने और छीकते समय मुँह पर रुमाल या कपड़ा का उपयोग करे।
  • जब भी बाहर जाए चहरे पर मास्क पहने।
  • जितना हो सके अपने आस पास जैसे घर और काम करने वाली जगह को साफ सुथरा रखे।
  • जब भी खाना खाये अपने हाथों को अच्छी तरह से धोये। बाहर जाते वक्त अपने साथ हैंड सेनिटाइजर ज़रूर रखे।
  • ज्यादा भीड़ भाड़ वाली जगह पर जितना हो सके कम ही जाए।
  • यदि आपकी रोग प्रतिरोघक क्षमता कम है तो उसे बढ़ाने का प्रयास करे।
  • यदि आपको उपरोक्त लक्षण नजर आते है तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाए।
  • लोगो से जितना हो सके कम हाथ मिलाने का प्रयास करे।
  • जिन लोगो को सर्दी जुकाम हो उन लोगो से दूर रहे। साथ ही अपने आँख, नाक और मुँह को कम से कम छुए।
  • ऐसा माना जाता है की जो लोग सूअर का मांस खाते है उन्हें भी यह संक्रमण होता है आपको बता दे की 71 डिग्री सेल्सियस ताप पर पके सूअर का मांस खाने से इस संक्रमण से संक्रमित नहीं होते है।

ऊपर दी गयी जानकारी को ध्यान में रखे और इस जानकारी को अपने परिवार व अपने मित्रों  को ज़रूर बताये ताकि वह भी इस प्रकार के संक्रमण से अपना बचाव कर सके और सुरक्षित रह सके। धीरे धीरे यह बीमारी अब कम हो गयी है। लेकिन उपरोक्त बचाव को हमेशा ध्यान में रखे ताकि किसी भी प्रकार का संक्रमण ना हो सके।


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