Pneumococcal Vaccine: निमोनिया से बचाव के लिए मासूम नवजात को जरूर लगवाएं

न्यूमोकॉकल का टिका इसलिए लगवाया जाता है क्योंकि यह स्ट्रैपटोकोकस निमोनिया होने से बचाता है। नवजात बच्चों को निमोनिया होने की शिकायत हो सकती है। न्यूमोकॉकल का टिका 5 साल से छोटे बच्चे के अंदर निमोनिया के संक्रमण को बढ़ने से रोकता है।

अमेरिका में बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस की समस्या का एक कारण इसी को माना जाता है। मेनिनजाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें दिमाग कमज़ोर हो जाता है और इसके आवरण को भी प्रभावित करता है।

न्यूमोकॉकल का टिका 4 बार बच्चों को अलग अलग लगाया जाता है। इसके लगने के बाद बच्चा निमोनिया की बीमारी के अलावा भी कई प्रकार की बीमारियों की जकड़ में आने से बच जाता है।

अगर आपको बचपन में यह टीका नहीं है है तो बाद में भी इसे लगवाया जा सकता है। इस लेख में हम आपको बता रहे कि न्यूमोकॉकल किस प्रकार का टिका है और यह लगवाना क्यों जरुरी होता है। जानिए Pneumococcal Vaccine.

Pneumococcal Vaccine: जाने न्यूमोकॉकल के टिके के बारे में

Pneumococcal Vaccine

न्यूमोकॉकल क्या है?

  • न्यूमोकॉकल एक तरह का संक्रमण होता है।
  • न्यूमोकॉकल का रोग स्ट्रैपटोकोकस निमोनिया के संक्रमणों के कारण होता है।
  • वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (डब्लूएचओ) के अनुमान के हिसाब से 2008 में न्यूमोकॉकल रोग के कारण 476,000 बच्चों की मौत हो गयी थी। यह सभी बच्चे 5 वर्ष से कम आयु के थे।
  • यह न्यूमोकॉकल दूसरी गंभीर बीमारियों को भी जन्म देता है।

न्यूमोकॉकल टिका लगवाना क्यों जरुरी है?

  • 5 साल से छोटे बच्चों में न्यूमोकॉकल के संक्रमण काफी ज्यादा गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते है।
  • न्यूमोकॉकल निमोनिया, बहरापन, और दिमाग की बीमारियों की वजह बनता है।
  • 2 साल के बच्चों में यह बीमारी होने का खतरा ज्यादा होता है।
  • न्यूमोकॉकल का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति पर जल्दी आक्रमण करते है।
  • इसका संक्रमण ज्यादातर नाक और मुँह से बूंदो के माध्यम से फैलता है।
  • इसका टिका लगाकर मध्य कान के संक्रमण से बच सकते है।

न्यूमोकॉकल टिका कब लगवाएं

  • छोटे बच्चों को न्यूमोकॉकल टिका 4 बार लगाया जाता है।
  • पहला 2 महीने, दूसरा 6 महीने, तीसरा 4 महीने और चौथा 12 से 15 महीने के बीच में लगाया जाता है।
  • जिन बच्चों को समय पर ये टिका न लगाया गया हो उन्हें बाद में भी यह टिका लगाया जा सकता है।

इन बच्चो को टिका नहीं लगवाना चाहिए

  • जिन बच्चों को सिकल सेल (Sickle Cell) की बीमारी होती है उन्हें न्यूमोकॉकल टिका नहीं लगवाना चाहिए।
  • यह टिका उन बच्चों को बिलकुल नहीं लगवाना चाहिए जिन्हें तिल्ली (Spleen) की समस्या हो।
  • यह टिका उन बच्चों के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है जो एचआईवी से ग्रसित होते है।
  • न्यूमोकॉकल टिका उन बच्चों को भी नहीं लगवाना चाहिए जो डायबिटीज, कैंसर जैसी बीमारियों से ग्रसित होते है। जो उनके इम्युनिटी सिस्टम पर प्रभाव डालती है।
  • उन बच्चों को भी न्यूमोकॉकल टिका नहीं लगवाना चाहिए जिन्हें दिल और फेफड़ों की बीमारी रहती हो।

5 साल से कम बच्चे जिन्हे न्यूमोकॉकल टिका लगवाना चाहिए।

  • 3 साल से छोटे बच्चों के लिए ये टिका है जरुरी होता है।
  • जो बच्चे डे केयर में जाते हो।

न्यूमोकॉकल टिका जोखिम

पीकेवी न्यूमोकॉकल टिका

  • इस वैक्सीन के बाद त्वचा का लाल हो जाना या फिर सूजन आना जैसी समस्या होती है।
  • कभी कभी बच्चों को इस टीके के बाद बुखार होने की समस्या भी होती है।
  • इसके टिके के बाद बच्चों की भूख कम हो जाती है।
  • कभी कबार ऐसी नौबत तक आ जाती है कि बुखार को कम करने के लिए पेरासिटामोल का उपयोग करना पड़ता है।
  • कभी कभी जहाँ इंजेक्शन वाले स्थान पर लाल चकते हो जाते है।

पीपीएसवी न्यूमोकॉकल टिका

  • इस टिके में ज्यादातर इंजेक्शन लगने वाले पार्ट पर दर्द होता है और वह पार्ट पूरा लाल हो जाता है।
  • इस टिके में बुखार कम ही आता है और मांसपेशियों में भी दर्द कम ही होता है।
  • इसमें एलर्जी होने की समस्या हो सकती है।
  • इस टिके के इंजेक्शन जहाँ लगाया जाता है वहां की त्वचा मुलायम होने की भी संभावना होती है।

पीसीवी टिका के प्रकार

  • आज कल बाजार में 3 प्रकार के पीसीवी न्यूमोकॉकल टिका उपलब्ध है।
  • पहला प्रकार प्रेवनार (Prevnar) है जिसे पीसीवी 7 के नाम से भी जाना जाता है।
  • यह एक प्रकार हेपटावलेंट (Heptavalent) वैक्सीन है।
  • इसका दूसरा प्रकार Synflorix है।
  • प्रेवनार 13 इसका तीसरा प्रकार है।

न्यूमोकॉकल के लक्षण

  • अगर अचानक से कोई एलर्जी हो जाए।
  • तेज़ बुखार और व्यवहार में कोई बदलाव आना।
  • साँस लेने में कोई तकलीफ होना।
  • शरीर में थकान।
  • शरीर पर पित्त का हो जाना।
  • गले में दर्द और गले का बैठ जाना।
  • गले में सूजन का होना।
  • एकदम से दिल की धड़कन का बढ़ना।
  • चक्कर आना।

सावधानियाँ

  • न्यूमोकॉकल की दवाइयों का इस्तेमाल करने से पहले अपने अपने डॉक्टर की राय जरूर लें।
  • अपने डॉक्टर को अपनी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जरूर बताएं।
  • आप कौन से उत्पादनों का इस्तेमाल करते है ये जरूर बताएं जैसे विटामिन, हर्बल सप्लीमेंट्स आदि।
  • अगर पहले से कोई बीमारी हो तो जरूर अपने डॉक्टर को बताएं।
  • आप जो पहले से दवाई ले रहे है उन दवाइयों के बारे में डॉक्टर को बताएं वरना हो सकता है दवाइयाँ बॉडी पर उल्टा प्रभाव डालना शुरू कर दें।
  • आपको न्यूमोकॉकल की कितनी खुराक लेना है या आपकी समस्या की स्थिति पर डिपेंड करती है।
  • अगर न्यूमोकॉकल की दवाइयाँ लेने पर भी आपकी हालत में कोई सुधार नहीं होता है तो आपको डॉक्टर को बताना चाहिए।

यहाँ आपने जाना न्यूमोकॉकल का टिका क्यों लगवाना चाहिए और यह लगवाना क्यों जरुरी है। अगर आपको न्यूमोकॉकल के लक्षण दिखे दे तो जल्द ही डॉक्टर से संपर्क करें और इसका सही समय पर पूरा इलाज करवाएं।


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