Labour Pain in Hindi: गर्भावस्था के आखिरी दिनों में होने वाली प्रसव पीड़ा को पहचाने

मां बनना हर महिला का सपना होता है। महिलाएं चाहती है की उनका भी बच्चा हो और जिसकी परवरिश वो बड़े लाड-प्यार के साथ कर सके, उसका ख्याल रख सके, उसे बड़ा होता देख सके।

एक बच्चे को दुनिया में लाने के लिए एक माँ को बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है। उसे 9 महीनों तक अपने शिशु की अच्छे तरीके से देखभाल करनी पड़ती है। हर समय उसका ख्याल रखना पड़ता है। बच्चा स्वस्थ जन्म ले उसके लिए कई सावधानियां बरतनी पड़ती है। फिर नौवें महीने में डिलेवरी का बेसब्री से इंतजार रहता है।

जब आपकी डिलेवरी होने वाली होती है तो उससे कुछ समय पहले आपको लेबर पेन होने लगता है। बहुत सी महिलाओं को इसके बारे में बहुत कम जानकारी होती है, खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनती है।

लेबर पेन क्या होता है और इसके क्या लक्षण होते है इसके बारे में जानकारी रखना जरूरी होता है तभी आप अपनी डिलेवरी के लिए पूरी तरह से तैयार हो सकती है। जानते है Labour Pain in Hindi.

Labour Pain in Hindi: जाने गर्भावस्था में होने वाले लेबर पेन के बारे में

Labour Pain in Hindi

क्या होता है Labour Pain?

  • लेबर पेन को सामान्य भाषा में प्रसव पीड़ा भी कहा जाता है।
  • गर्भावस्था के अंतिम महीने में पेट में ऐठन और दर्द होता है जिसे लेबर पेन कहा जाता है।
  • कुछ महिलाओ को इसका दर्द कम समय के लिए होता है तो कुछ महिलाओं को यह दर्द लम्बे समय तक रहता है। लेकिन यह दर्द हर गर्भवती महिला को सहना पड़ता है।

लेबर पेन के लक्षण

लेबर पेन के लक्षणों को जानना भी ज़रुरी होता है तभी आप तय कर सकती है की यह सही वाला लेबर पेन है जिसमे आपको हॉस्पिटल जाने की तयारी करनी चाहिए या फिर यह फाल्स लेबर पेन है। इसके लिए जानते है इसके कुछ सामान्य लक्षणों के बारे में

शिशु का नीचे की तरफ आना

  • जब आपको प्रसव होने वाला होता है तो शिशु आपके कोख से नीचे की तरफ आने लगता है।
  • उस समय आपको छाती में दबाव कम लगेगा और साथ ही आपको साँस लेने में भी परेशानी नहीं होगी।

पानी का गिरना

  • माँ के गर्भ में एक पानी की थैली होती है जिसमे शिशु का विकास होता है जब शिशु बाहर आने वाला होता है तो यह थैली फट जाती है और पानी निकलने लगता है।
  • इसका मतलब होता है की आपका प्रसव नज़दीक है।

खून का बहना

  • लेबर पेन के लक्षणों में खून का बहना भी शामिल होता है।
  • यदि आपके योनि से भूरे रंग या फिर लाल रंग का पदार्थ निकल रहा है तो आपको हॉस्पिटल जाने में देरी नहीं करनी चाहिए।
  • इस समय आप अपने प्रसव का बहुत ही नजदीक होती है।

पेट में दर्द

  • पेट में दर्द होना लेबर पेन का सामान्य लक्षण होता है।
  • यह आपके प्रसव की शुरुआत होती है जिसके कारण आपको पेट में दर्द और ऐठन महसूस होने लगती है।
  • यह दर्द आपको वैसा ही लगेगा जैसा आपको मासिक धर्म के समय होता है।
  • यदि आप इस प्रकार का दर्द अनुभव कर रही है तो आपको हॉस्पिटल जाने की तैयारी कर लेनी चाहिए क्योंकि जल्दी ही आप एक नन्हे से शिशु को जन्म देने वाली है।

पीठ में दर्द होना

  • गर्भावस्था में पीठ में दर्द होना सामान्य बात होती है परन्तु यदि आपको अंतिम महीने में तेज पीठ दर्द हो रहा है और वह भी लम्बे समय के लिए तो यह लेबर पेन के लक्षण होते है।
  • ऐसे समय में आपको अपने डॉक्टर को दिखना ज़रुरी हो जाता है ताकि वह आपको प्रसव के लिए बता सके।

अन्य लक्षण

बार बार पेशाब के लिए जाना – महिला को लेबर पेन से पहले बार बार बाथरूम जाने का भी मन होता है। यदि महिला बार बार ऐसा करे करे तो समझ जाइये की हॉस्पिटल जाने का समय आ गया है।

कमर में दर्द – लेबर पेन शुरू होने से पूर्व आपके कमर में भी दर्द होना शुरू हो जाता है यदि कमर दर्द लगातार हो रहा है और ज्यादा दर्द हो रहा है तो आप समझ जाए की आपका प्रसव समय निकट आ गया है।

Normal Delivery Process: डिलेवरी दो प्रकार की होती है।

यह तीन चरणों में पूरी होती है

पहला चरण

पहले चरण में गर्भाशय का निचला भाग फ़ैल जाता है और वह खुलने भी लगता है। योनि से हलके रंग का पदार्थ भी निकलने लगता है। धीरे धीरे सिकुड़न होने लगती है और यह प्रक्रिया तेज गति से होने लगती है।

दूसरा चरण

यह वह चरण होता है जिसमे सर्विक्स पूर्ण रूप से खुल जाता है। इस अवस्था में आपको डॉक्टर की जरुरत होती है और वह आपके बच्चे को पुश करने में मदद करता है। इस प्रक्रिया में समय लगता है।

तीसरा और आखिरी चरण

इस चरण में शिशु जन्म ले चूका होता है और संकुचन की प्रक्रिया चलती रहती है। यह संकुचन पहले वाले संकुचन जैसा होता है परन्तु इसमें दर्द कम होता है। इसमें कम समय भी लगता है या फिर 15 से 20 मिनट तक भी लग सकते है।

Normal delivery के कुछ उपाय

यदि आप नार्मल डिलेवरी चाहती है तो उसके लिए आपको कुछ उपाय करने होंगे जो की इस प्रकार है।

  • इसके लिए गर्भवती महिला को ज्यादा तनाव में नहीं रहना चाहिए। हमेशा खुश रहना चाहिए। तनाव जितना कम हो प्रसव में उतनी कम कठिनाई आती है।
  • गर्भवती महिला को कुछ विशेष व्यायाम करने चाहिए यह डिलेवरी को नार्मल बनाने के लिए अच्छा होता है। इसके लिए आप चाहे तो अपने डॉक्टर से भी सम्पर्क कर सकती है।
  • डॉक्टर हमेशा पैदल चलने और टहलने की सलाह देते है क्योंकि यह शिशु और माँ दोनों के लिए अच्छा होता है।
  • जितना हो सके पौष्टिक भोजन करना चाहिए ताकि आपके डिलेवरी में परेशानी न हो।
  • पानी पर्याप्त मात्रा में पीये। दिमाग को शांत रखने का प्रयास करे और रोने से बचे।
  • गर्भवती महिला को जो खाने का मन हो वह चीजे खा लेनी चाहिए बस इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप जो खा रही है वह घर पर ही बना हो।

उपरोक्त लक्षणों को पढ़ कर अब आप जान ही गयी होंगी की लेबर पेन के समय कैसा लगता है। यदि आपको भी ऐसे कोई लक्षण महसूस हो तो आपको हॉस्पिटल जाने में देरी नहीं करनी चाहिए।


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