माँ बनना एक सुखद अनुभव होता है। साथ ही जब माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहे तो खुशी में चार चाँद लग जाते है। इसके लिए जरुरी है की जब कभी आप माँ बनने की प्लानिंग कर रहे है तो कुछ टेस्ट करवा ले।

यदि महिला हर तरह से स्वस्थ है तो गर्भधारण करने या डिलिवरी के समय परेशानियां भी कम होती है।

वही यदि माँ को किसी तरह की समस्या है तो इस प्रोसेस में दिक्कत भी आती है और तो और बच्चे पर भी इसका प्रभाव पढता है| इसलिए बेहद जरुरी है कि यदि आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं तो पहले डॉक्टर से मिलकर कुछ आवश्यक मेडिकल टेस्ट करवा ले।

क्यूंकि इन टेस्ट के द्वारा ही पता चल पायेगा की आपका शरीर माँ बनने के लिए सक्षम है या नहीं। तो आइये जानते है Medical Tests before Getting Pregnant कौनसे है|

Medical Tests before Getting Pregnant: प्रेग्नेंट होने से पहले यह टेस्ट जरूर करवाएं

Medical Tests before Getting Pregnant

क्रोनिक डिजीज टेस्ट

इस टेस्ट के जरिये यह पता किया जाता है की महिला  डायबिटीज, अस्थमा या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से प्रभावित तो नहीं हैं।

ब्लड टेस्ट

इस टेस्ट द्वारा एनीमिया की जांच, थैलेसिमिया, प्लेटलेट्स की मात्रा आदि का टेस्ट किया जाता है। ब्लड टेस्ट के द्वारा  आपके रक्त से सम्बंधित हर नकारात्मकता को जांचा जाता है|

हेपेटाइटिस बी: हेपेटाइटिस बी एक ऐसा वायरस होता है जो लिवर को संक्रमित करता है। कभी-कभी वायरस दीर्घकालिक संक्रमण का कारण बनता है|

मेडिकल विशेषज्ञों का सुझाव है कि सभी गर्भवती महिलाओं को हेपेटाइटिस बी का परीक्षण किया जाए। क्योंकि यह वायरस माँ से बच्चे में भी पास हो सकता है| लेकिन पहले से जानकारी की स्तिथि में संक्रमण को रोकने के लिए आपके बच्चे को शॉट्स दिए जा सकते है|

एसडीआईएस स्क्रीनिंग टेस्ट

आप किसी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन की शिकार तो नहीं है यह देखने के लिए एसडीआईएस स्क्रीनिंग टेस्ट किये जाते है। इसमें हेपेटाइटिस बी, क्लमाइडिय, सिफलिस और एच आई वी की जांच की जाती है।

रूबेला

रूबेला एक प्रकार की संक्रमित बीमारी है, इसके होने से कोई गंभीर समस्या नहीं होती परन्तु भ्रूण को इसके होने से हानि पहुंच सकती है।

इस बीमारी के होने पर हल्का बुखार और शरीर पर दाने हो जाते हैं जो चेहरे से लेकर पूरे शरीर पर फैल जाते हैं। इसके इलाज के लिए महिला को वैक्सीन दिया जाता है।

वैक्सीन देने के एक महीने तक माँ बनने के लिए रोक होती है। इसके बचाव के लिए बचपन में ही एम. एम. आर. का वैक्सीन दिया जाता है।

जेनिटल हर्पीस

यह एक आम और अत्यधिक संक्रामक संक्रमण है जो आमतौर पर सेक्स के माध्यम से फैलता है।

यह संक्रमण आमतौर पर हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस -2 (एचएसवी -2) या हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस -1 (एचएसवी -1) के कारण होता है, जो आमतौर पर ठंडे घावों के लिए जिम्मेदार वायरस होता है।

इसके उपचार में दवाओं का इस्तेमाल होता है जिससे कि घावों को तेजी से ठीक करने और प्रकोपों को रोकने में मदद मिलती है।

थाइरॉइड टेस्ट

थाइरॉइड की जांच करना भी जरुरी होता है। अगर थाइरॉइड हार्मोन का प्रोडक्शन ज्यादा हो तो यह स्थिति हाइपरथाईरोइडिस्म होती है।

वहीं यदि हार्मोन का स्तर कम है तो यह डिसऑर्डर हाइपोथाईरोइडिस्म कहलाता है।दोनों ही परिस्थितियों में माँ बनने पर रोक होती है जब तक ट्रीटमेंट नहीं होता है।