Trigeminal Neuralgia: दुनिया की सबसे दर्दनाक बीमारियों में से एक है ट्राईजेमिनल न्यूरलजिया

ट्राईजेमिनल न्यूरलजिया नामक इस बीमारी का नाम बहुत कम लोगो ने सुना होगा। यह बीमारी तंत्रिका तंत्र के विक़ार के कारण उत्पन्न होती है। इस बीमारी का चेहरे पर बहुत प्रभाव पड़ता है।

मेडिकल साइंस के अनुसार इस बीमारी को दुनिया की सबसे दर्दनाक बीमारियों में से एक गिना गया है। इसमें शरीर की मांसपेशियों में गंभीर दर्द और ऐंठन होती है। नसों को प्रभावित करने वाली यह बीमारी 15000 में से एक व्यक्ति को होती है।

कपालीय 12 नसों में से एक नस ट्राइजेमिनल होती है। इस नस का प्रभाव आँखों की पलक से लेकर ठुड्डी तक होता है। जब इस नस में खराबी आ जाये तो उसके कारण चेहरे और सर में भयानक दर्द होता है। इसे ही ट्राईजेमिनल न्यूरलजिया कहते है।

यह नर्व डिसआर्डर से संबंधित रोग है। इसे टिक ड्यूलोरेक्स के नाम से भी जाना जाता है। आप शायद नहीं जानते होंगे लेकिन टंग पियर्सिंग यानी जिहृ छेदन से भी यह रोग हो सकता है। आइए विस्तार से Trigeminal Neuralgia के बारे में जानते है।

Trigeminal Neuralgia: क्या है ट्राईजेमिनल न्यूरलजिया और इसके लक्षण क्या है?

Trigeminal Neuralgia

ट्राईजेमिनल न्यूरलजिया बीमारी होने के कारण

  • कुछ किये गए अध्यनो में यह बात सामने आयी है की यदि कोई रक्त वाहिका अस्वभाविक रूप से बढ़ जाती है।
  • तो वो ट्राइजेमिनल नर्व पर दबाव डालती है और इसके चलते नर्व में शॉट सर्किट बन जाता है, और रोगी को दर्द होने लगता है।
  • यदि किसी बीमारी या किसी दुर्घटना के चलते नर्व दब गयी हो तब भी ये रोग हो सकता है। इसके अलावा कई बार इस बीमारी के कारण को पता लगाना ना मुनकिन भी होता है।

ट्राईजेमिनल न्यूरलजिया के लक्षण: Trigeminal Neuralgia Symptoms

  • इस बीमारी में शरीर के नसों में बेहद दर्द और ऐंठन होती है और इसका सबसे ज्यादा प्रभाव सिर, जबड़ों और गालों पर होता है।
  • यह खासकर उम्रदराज लोगो को होती है, इससे पीड़ित व्यक्ति को जहां दर्द हो रहा वो स्थान आराम से नजर आता है।
  • यह दर्द कभी भी और कही भी हो सकता है। यह खाना खाते समय, बात करते समय चलते फिरते समय कभी भी हो सकता जय ।
  • कभी कभार यदि हवा का तेज झोंका चेहरे के हिस्से को छू जाये तो चेहरे के उस हिस्से में भीषण Trigeminal Nerve Pain होने लगता है।

दो प्रकार का होता है ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया

ट्राइजेमिनल Neuralgia दो प्रकार का होता है पहला टाइप 1 या और दूसरा टाइप 2 या T2 होता है।

  • T1 -> इसमें अचानक थोड़ी-थोड़ी देर में तेज दर्द और जलन होती है।
  • T2 -> इसमें लगातार दर्द, जलन और चुभन का अहसास होता है।

सलमान खान को भी है यह बीमारी

  • मालूम हो की अभिनेता सलमान खान को भी यह बीमारी है। यह बात उन्होंने फिल्म ट्यूबलाइट के प्रमोशन ईवेंट के दौरान कही थी।
  • सलमान ने बताया की यह बीमारी इतनी खतरनाक है की इसे सुसाइडल डिजीज भी कहा जाता है।
  • सलमान ने कहा इसमें इतना भयानक दर्द होता है जो असहनीय होता है। इसलिए इस बीमारी के चलते कई बार सलमान ने सुसाइड करने का विचार बना लिया था।

ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया के जोखिम कारक

कुछ करने से भी इस बीमारी में होने वाले दर्द की समस्या बढ़ सकती है जो की निम्न है

ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया के निदान: Trigeminal Neuralgia Treatment

  • ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया के निदान के लिए डॉक्टर को दर्द के बारे में पता करना होता है।
  • जिस प्रकार का दर्द होता है वह उसी अनुसार जाँच शुरू करता है। वह आपसे चहरे के दर्द के बारे में पूछ सकते है।
  • इसलिए सारी परिस्थिति के बारे में अपने डॉक्टर को ज़रुर बताएं ताकि आपकी बीमारी का सही उपचार किया जा सके।
  • आपका डॉक्टर ट्राइगेमिनल न्यूरेलिया का निदान करने और आपकी हालत के अंतर्निहित कारणों को निर्धारित करने के लिए कई परीक्षण कर सकता है, जिनमें निम्न शामिल हैं:
  1. Neurological Examination- इस टेस्ट के जरिये आपके डॉक्टर को आपके चेहरे के हिस्सों को छूने और जांचने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि दर्द कहां हो रहा है और यदि ट्राइगेमिनल न्यूरेलिया के लक्षण दिखाई दे रहे है तो यह जानने में मदद मिलती है की ट्राइगेमिनल न्यूरेलिया होने का कारण क्या है।
  2. Magnetic Resonance Imaging (MRI)- इस टेस्ट के द्वारा आपके सर को स्कैन किया जाता है ताकि यह पता किया जा सके की स्क्लेरोसिस या ट्यूमर है की नहीं। इसके लिए आपका डॉक्टर आपको एमआरआई स्केन करने को कह सकता है। कुछ मामलों में, धमनियों और नसों को देखने और रक्त प्रवाह को देखने के लिए आपका डॉक्टर रक्त वाहिका में डाई(Dye) लगा सकता है।

इन चीजों से करे परहेज

  • कैफीन का सेवन ना करे
  • वसायुक्त आहार न खाये
  • जंक फ़ूड का सेवन ना करे
  • शक्कर युक्त आहार कम मात्रा में खाये

खाने युक्त आहार

  • खाने में विटामिन सी से भरपूर आहारों का सेवन करे जैसे संतरे, ग्रेपफ्रूट, ब्रोकोली, टमाटर अदि। यह दर्द को कम करने में मदद करता है।
  • ओमेगा 3 वसीय अम्ल वाले आहारों का सेवन करना भी अच्छा होता है। यह आपको मछली, अखरोट, सोयाबीन, कद्दू के बीज आदि से भरपूर मात्रा में मिलता है।
  • पानी ज्यादा मात्रा में पिए।

अन्य उपाय

  • रोगी को प्रतिदिन नियमित रूप से पैदल चलना चाहिए यह भी स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अच्छा होता है। साथ ही नियमित रूप से व्यायामों को किया जा सकता है।
  • आप किसी प्रशिक्षक की देखरेख में व्यायाम कर सकते है, यह भी बहुत ही असरकारी होता है।
  • यदि आपको व्यायाम के समय कोई समस्या आ रही है अपने डॉक्टर से भी संपर्क कर सकते है।
  • अर्द्धकटि चक्रासन, अर्द्ध चक्रासन, भुजंगासन, कपालभाति आदि योग भी किया जा सकता है। यह भी इस बीमारी के लिए लाभकारी होते है। इसलिए इसका अभ्यास भी किया जा सकता है।
  • आप संगीत का भी सहारा ले सकते है यह भी दर्द को दूर करने के लिए अच्छा उपाय होता है।
  • रात को सोते समय अपने चेहरे और सर को ढक कर सोये।
  • जिस हिस्से में दर्द हो रहा है उस तरफ ना सोये। ऐसा करने से सुबह के समय दर्द में वृद्धि हो सकती है।
  • गर्दन की मांसपेशियों में यदि दर्द हो रहा है तो आप सिकाई भी कर सकते है।

उपरोक्त लक्षणों के दिखने पर आप अपने डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करे ताकि आपका सही से उपचार हो सके। साथ ही अपने खानपान और रहन सहन पर ध्यान दे।


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