हमारे पूर्वज रोगों के निदान घरेलू नुस्खों की सहायता से किया करते थे। वह घरेलू नुस्खों के द्वारा लोगो का इलाज भी किया करते थे।

घरेलू नुस्खों की खासियत यह होती है की इसका उपयोग करने से कोई नुकसान नहीं होता है। यह पूरी तरह से सुरक्षित रहते है। इसी तरह से एक प्राकृतिक हर्ब है जो कई प्रकार के गुणों से भरपूर है।

आज हम आपको ओशा की जड़ के बारे में बता रहे है। इसे बीयर रूट भी कहा जाता है। इस हर्ब का उपयोग पुराने ज़माने से किया जाता आ रहा है। जो की इस आधुनिक युग तक भी चलता आरहा है।

ओशा की जड़ के कई फायदे होते है। यह फेफड़ो और साँस की बीमारियों के लिए बहुत ही लाभकारी है। एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होने के कारण भी इसका उपयोग किया जाता है। तो चलिए आज हम विस्तार से Osha Root Benefits के बारे में जानते है|

Osha Root Benefits: अनेक फायदों से भरपूर जड़ी बूटी

Osha Root Benefits in Hindi

ओशा की जड़ के फायदे

  1. यह सांस संबंधी समस्याओ को ठीक करता है। साथ ही बलगम को बाहर निकालने में सहायक होता है।
  2. स्टैमिना बढ़ाने, ऊंचाई पर चढ़ने और आराम से सांस लेने के लिए भी ओशा की जड़ का सेवन किया जाता है।
  3. साइनस के मरीजों के लिए भी यह बेहद फायदेमंद है|
  4. जिन लोगो को अस्थमा, वातस्फीति, एलर्जी और निमोनिया आदि की समस्या हैं उनको ओशा की जड़ का उपयोग करने से बहुत फायदा मिलता है।
  5. ओशा की जड़े फेफड़ों के लिए भी किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह फेफड़ों की सूजन को दूर करती है|
  6. इससे फेफड़ों में ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है जिससे फेफड़ो में सकुंचन की समस्या उत्पन्न नहीं होती है।

यहाँ पाए जाते है ओशा

ओशा ज्यादातर रॉकी माउंटेन में पाया जाता है। और इसका सबसे पहले इस्तेमाल उत्तरी अमेरीकियों द्वारा उनके भोजन के रूप में किया गया था। इसके उपरांत इन पत्तियों का उपयोग अगली पीढ़ी में बुरी आत्माओं से बचाने के लिए जलाकर किया जाने लगा।

साथ ही इस जड़ का उपयोग हर्ब के रूप में किया जाने गया। जो एंटीबैक्टीरियल, वाणुरोधी और जलन व सूजन दूर  करने में भी सहायक होती थी।   उत्तरी अमेरिका की घाटियों के अधिकांश मूल निवासी अमेरिकी जनजातियों द्वारा ओशा की जड़ को प्रतिदिन  कई तरीकों से उपयोग किया जाता रहा है।

प्राचीन काल में इस तरह करते थे उपयोग

  • बता दे की चिकित्सा कार्यों हेतु अमेरिका के मूल निवासी भी ओशा की जड़ का उपयोग किया करते थे।
  • वहां के जो मूल निवासी थे विशेषकर धावक और शिकारी, वो इस जड़ का उपयोग शारीरिक सहन शक्ति को बढ़ाने के लिए इसे चबा कर करते थे।
  • इस ओशा की जड़ का उपयोग माताए भी करती थी वह ओशा की जड़ को अपने कपड़े में बांध देती थी|
  • फिर उसे अपने नवजात बच्चों के ऊपर बांध दिया करती थीं। जिससे की उन्हें सांस लेते समय शुद्ध हवा मिल सके।

आधुनिक युग में इसलिए करते है इसका उपयोग

  • आज ओशा की जड़ को इसके एंटीबैक्टीरियल गुणों के लिए उपयोग किया जाता है।
  • यदि फ्लू, कफ या आम सर्दी के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देते है तो आज भी ओशा की जड़ उपयोग किया जाता है।
  • यदि इसकी जड़ को शहद के साथ मिलाकर लिया जाता है तो यह एक कफ सीरप की तरह कार्य करता है।
  • ओशा की जड़ साइनस, गले में खराश और फेफड़ों में होने वाले सूजन का उपचार करने में बहुत ही लाभकारी होती है।