Gond Katira Ke Fayde: जानिए आयुर्वेदिक गुणों से परिपूर्ण गोंद कतीरा के गुणकारी फायदे

कतीरा, पेड़ से निकाला जाने वाला गोंद कहलाता है। यह कांटेदार वृक्ष भारत में गर्म पथरीले क्षेत्रों में आसानी से मिल जाता है। इसकी छाल और टहनियो को काटने से जो तरल पदार्थ निकलता है वही जम कर सफेद और पीले रंग का हो जाता है जिसे लोग पेड़ से निकलने वाला Gondh कहते है।

पेड़ से निकली गोंद के सूख जाने पर Gond Katira बनता है। इसमे भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फॉलिक एसिड जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। हमारे शरीर से जुड़ी कई समस्याओं से भी राहत दिलवाने में यह मदद करता है। इसका सेवन करने से गर्मियों में लू से बचा जा सकता है। साथ ही इसका प्रयोग हर मौसम में कर सकते है।

वृक्ष से निकलने वाले गोंद में उस वृक्ष के औषधीय गुण भी मिलते है है, जिस वृक्ष से यह निकाली जाती है। आयुर्वेदिक दवाओं में गोली या वटी बनाने के लिए भी पाउडर की बाइंडिंग के लिए गोंद का इस्तेमाल होता है। अलग-अलग वृक्ष की गोंद का इस्तेमाल अलग-अलग औषधियों को बनाने में किया जाता है।

कतिरा स्वाद में फीका होता है और तासीर में ठंडा तथा रूखा करने वाला होता है। इसका उपयोग बाह्य और आंतरिक दोनों रूप से दवा के रूप में किया जा सकता है। बाह्य रूप से इसके लेप का उपयोग किया जाता है तथा आंतरिक रूप से इसे 2 से 5 ग्राम की मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है। देसी कतिरा गोंद को इंग्लीश में हॉग-गम कहा जाता है। एक और गोंद “गम ट्रेगाकैंथ” एक विदेशी कतिरा है। जो एक अन्य पेड़ एस्ट्रागालुस गुम्मिफेर से प्राप्त होता है। यह ईरान, सीरिया, रूस आदि देशों में पाया जाता है। देसी कतिरा गोंद को कचलोसेपेरमम रेलिगिओसम, मैक्सीमिलिनेअ गॉसिपियम, कॉटन ट्री आदि से भी प्राप्त किया जाता है। आइए अब हम जानते हैं Gond Katira Ke Fayde.

Gond Katira Ke Fayde: जाने गोंद कतीरा के प्राकृतिक गुण और इनके फायदों को

Gond Katira Ke Fayde

कतिरा गोंद का उपयोग बहुत सारे बीमारियों से निजात पाने के लिए किया जाता है। इसमें बुखार को कम करने वाले विचेरक के गुण मौजूद होते है। इस गोंद को कब्ज, कफ, डायरिया, नींद न आने आदि की परेशानी होने पर उपयोग किया जाता है।

देसी कतिरा में मिश्री मिलाकर 1 से 1.5 लिटर पानी में भिगो दें। जब पानी कम रह जाए और यह जेली की तरह दिखे तब थोड़ा सा गुलाब जल या शहद स्वादानुसार मिला कर खाए। यह आपके बच्चों को बहुत स्वादिष्ट भी लगेगा और उन्हे अनेक बीमारियों से भी बचा कर रखेगा।

देसी कतिरा वृक्ष के अन्य भाषा में नाम

हिन्दी – पीली कपास

इंग्लीश – गोल्डन सिल्क ट्री, सिल्क कॉटन ट्री

यूनानी – समघ कतिरा

तमिल – तनकू

जानिए इसके लाभ: Gond Katira Benefits in Hindi

गोंद कतिरा का सेवन करने से हमारे शरीर को अनेक प्रकार के लाभ मिलते है और हम कई प्रकार के रोगों से बचे रह सकते हैं। आइए जानते है Gond Katira Benefits for Health in Hindi.

  • इसका सेवन शरीर में बन रहे खून को गाढ़ा करने में मदद करता है तथा छाती और फेफड़ों के ज़ख्म तथा आँतो की खराश को ठीक करता है।
  • इसके सेवन से गर्मी में लू नही लगती है साथ ही यह शरीर को ठंडा रखता है।
  • पेशाब में जलन या पेशाब का रुक-रुक कर आने की समस्या हो तो इसका सेवन लाभदायक होता है।
  • महिलाओ के लिए Gond Katira Benefits बहुत फायदेमंद होता है। महिलाओं की समस्या जैसे बच्चा होने के बाद की कमज़ोरी, मासिक धर्म की गड़बड़ी तथा सफेद पानी से होने वाली परेशानी को यह ठीक करता है।
  • यह कमज़ोरी और उससे होने वाली शारीरिक अनियमितताओं को भी दूर करता है। इसके लिए कतिरा गोंद को पानी में भिगो दे और इससे फूल जाने पर खाए।
  • कतिरा गोंद को बकरी के दूध के साथ लेने से ब्लीडिंग डिसॉर्डर की समस्या दूर होती है।
  • हाथ-पैरो या शरीर के किसी भी हिस्से में हो रही जलन, खुजली या जल जाने पर कतिरा को गंधक के साथ मिला कर लेप बनाकर इस्तेमाल करे लाभ मिलेगा।
  • Katira Gond का लेप चेहरे पर लगाने से झाइयां भी ठीक होती है।
  • पेचिस या दस्त हो जाने पर गोंद को दही के साथ लेने से आराम मिलता है।
  • स्वप्नदोष से संबंधित रोगो के लिए, रात के समय 6 ग्राम कतिरा गोंद को 1 कप पानी में भिगोकर रख दे।
  • रातभर में यह अच्छी तरह फूल जाएगी, अब इसमे 12 ग्राम मिश्री मिलाकर नियमित 15 से 20 दिन तक सेवन करने से नाइटफॉल की समस्या से मुक्ति मिलती है और यह वीर्य को बढ़ाने में भी मदद करता है।
  • हृदय संबंधित रोगों में भी यह Gond Benefits फ़ायदेमंद साबित होता है।
  • सांस लेने में तकलीफ़ या अधिक खाँसी हो जाने पर या अधिक पसीना आने और माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति को कतिरा के सेवन से बहुत लाभ मिलता है।

गोंद के औषधिय गुण: Gond ke Fayde

जैसा की हमने आपको पहले भी बताया की अलग-अलग पेड़ो की गोंद का उपयोग अलग-अलग बीमारियों और रोगों में किया जाता है। अब हम आपको बताने जा रहे है कि किस वृक्ष की गोंद को किस रोग में इस्तेमाल करना चाहिए।

नीम की गोद

  • नीम के पेड़ से निकली गोंद रक्त की गति को बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ होता है।
  • इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहा जाता है। इसमे नीम के औषधीय गुण भी होते है।

पलाश की गोंद

  • पलाश की गोंद के सेवन से हड्डियों में मज़बूती आती है।
  • इसकी 1 से 3 ग्राम गोंद को मिश्रीनुमा दूध या आमले के रस में मिलाकर लेने से शारीरिक बल और वीर्य में वृद्धि होती है तथा अस्थि मजबूत होती है।
  • इसकी गोंद को गर्म पानी में मिलाकर लेने से दस्त में भी आराम मिलता है।

आम की गोंद

  • आम के पेड़ से निकलने वाली गोंद स्तंभक और रक्त प्रदरक होती है।
  • इस गोंद को गर्म कर के फोड़े-फुंसियो पर लगाने से फोड़े पक कर पस को बाहर निकाल देते है और आसानी से उसे भर भी देते हैं।
  • आम की गोंद में नींबू का रस मिलाकर चर्म रोगों पर लगाने से भी आराम मिलता है।

सेमल की गोंद

  • सेमल की गोंद को मोचरस भी कहा जाता है।
  • अतिसार की समस्या होने पर आप 1 से 3 ग्राम मोचरस चूर्ण को दही के साथ प्रयोग करेंगे तो इससे राहत प्राप्त हो जायेगा।
  • वहीं श्वेत प्रदर की परेशानी होने पर मोचरस और चीनी को समान मात्रा में मिलाकर लेने से लाभ मिलता है।
  • दाँत मंजन बनाने में भी इस मोचरस का उपयोग किया जाता है।

हींग

  • हींग भी एक प्रकार की गोंद है, जो फेरूला कुल के तीन पौधों की जड़ों से निकलने वाला यह सुगंधित रेज्जिनानुमा होता है।
  • हींग दो किस्म की होती है एक जो पानी में घुलनशील होती है तथा दूसरी जो तेल में घुलनशील होती है।
  • किसान खेतो में पौधों के आसपास की मिट्टी हटाकर उसकी गाजरनुमा जड़ के ऊपर एक चीरा लगा देते है। इस स्थान से अगले तीन माह तक दूधिया रेगिन निकलता है।
  • इस अवधि में लगभग 1 किलोग्राम रेगिन निकलता है। हवा के संपर्क में आने से यह सख्त हो जाता है। जो बाद में हींग के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

गुग्गल की गोंद

  • यह एक झाड़ीनुमा वृक्ष होता है। जिसके तने और शाखाओं में से गोंद का स्राव होता है।
  • जो थक्के की तरह और साथ ही गाढ़ा होता है।
  • यह जोड़ों के दर्द एवं अगरबत्ती बनाने में इस्तेमाल होता है।

ग्वार फली

  • ग्वार फली के बीजो में गैलाक्टोमेनन नाम का गोंद होता है। इस गोंद का उपयोग दूध से बने पदार्थ जैसे आइसक्रीम, पनीर आदि में किया जाता है।
  • इसके अलावा अन्य कई व्यंजनो में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीजो से बनाया जाने वाला पेस्ट भोजन, औषधि और उद्योगों में उपयोग किया जाता है।

कबीट की गोंद

  • बारिश के मौसम के बाद कबीट के वृक्ष से गोंद निकलता है।
  • जो गुणवत्ता में बबूल के पेड़ की गोंद के समान होता है।
  • कीकर या बबूल की जड़ बहुत ही पौष्टिक होती है।

प्रपोलिश

  • यह पेड़ – पौधों द्वारा श्रावित गोंद है जो मधुमक्खियां एकत्र करती है।
  • इसका उपयोग डेन्डसेमबु तथा पैराबैंगनी किरणों से बचने के लिए किया जाता है।

इसके अलावा सहजन, पीपल, अर्जुन आदि के वृक्षो से निकालने वाली गोंद भी हमारे शरीर के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद होती है। सभी प्रकार के पेड़ो से प्राप्त गोंद का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं के साथ साथ अन्य पदार्थों को बनाने में भी किया जाता है।

एक समय था जब हमारा देश लाखों करोड़ो वृक्षो से भरा हुआ था लेकिन वक्त के साथ उनमे कमी होती जा रही है। जिसके लिए हम लोग ही ज़िम्मेदार है। हर वृक्ष का अपना महत्व होता है वो किसी न किसी प्रकार से मनुष्य जीवन की रक्षा और स्वस्थ शरीर के लिए उपयोग में लाये जाते रहे है। इसलिए वृक्षो की शाखा में हो रही कमी को रोकना बहुत आवश्यक है।

ऊपर आपने जाना Gond Katira Ke Fayde इसके औषधीय गुण और शारीरिक लाभ को जानकर आप भी हैरान होंगे। आप भी पेड़ो से प्राप्त इन औषधीय गोंद का इस्तेमाल करे और अपने शरीर को स्वस्थ बनाए।


You may also like...