जापानी इन्सेफेलाइटिस एक जानलेवा बीमारी है। हाल ही में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इस बीमारी के चलते अब तक 60 से ज्‍यादा लोगों की मृत्यु हो चुकी है| यह बीमारी ज्यादातर छोटे बच्चो को अपना शिकार बनाती है|

पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में हर वर्ष इस बीमारी से सैकड़ों बच्‍चों और वयस्‍कों की मौत हो जाती है। खासकर यह अगस्त, सितम्बर तथा अक्टूबर के महीनों में ज्यादा अधिक फैलती है|

इन्सेफेलाइटिस को लोग आमतौर पर बोलचाल की भाषा में जापानी बुखार कह रहे है| यह एक तरह का मस्तिष्क ज्वर या कहे दिमागी बुखार है| लोग इसके बारे में इंटरनेट तथा चिकित्‍सकों द्वारा जानकारी हासिल कर रहे है|

इन्सेफेलाइटिस के प्रकोप का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है की पिछले तीन दशकों में इस बीमारी से उत्तरी राज्यों में 50,000 से अधिक मौते हुई| इसलिए आज हम आपको Japanese Encephalitis के बारे में समस्त जानकारी दे रहे है|

Japanese Encephalitis Symptoms & Prevention: जापानी बुखार के लक्षण तथा अन्य जानकारी

Japanese Encephalitis

क्या है जापानी इन्सेफेलाइटिस?

  • यह एक दिमागी बुखार है जो कि वायरल संक्रमण की वजह से फैलता है।
  • सुअर इस बीमारी के फैलने की मुख्य वजह है| सुअर के ही शरीर में इस बीमारी के वायरस बनते और फलते-फूलते हैं|
  • फिर मच्छरों द्वारा यह वायरस सुअर से मानव शरीर में पहुंच जाता है और शरीर के सपंर्क में आते ही यह दिमाग की ओर चला जाता है।
  • इस वायरस के दिमाग में जाने के कारण व्यक्ति की सोचने, समझने तथा देखने तक की क्षमता खत्म हो जाती है।
  • बता दे की पालतू सूअर और जंगली पक्षी ही जापानी एनसेफेलिटिस वायरस को फैला सकते हैं। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं होता|

जापानी इन्सेफेलाइटिस के लक्षण

  • भूख की कमी
  • लकवा मारना
  • बुखार, सिरदर्द, उलटी
  • पागलपन के दौरे पड़ना
  • यदि कोई छोटा बच्चा ज्यादा देर रोता है
  • कुछ लोग कोमा तक पहुंच जाते है

ऐसे करें बचाव

  1. सितम्बर और अक्टूबर में इस बीमारी का कहर सबसे अधिक होता है इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरते|
  2. यह वायरस ज्‍यादा गंदगी वाली जगह पर भी पनपते है इसलिएकोशिश करें की आपके आसपास गंदगी न हो।
  3. इसके अलावा मच्छरों से बचाव के लिए उचित इंतजाम करे, समय से टीकाकरण कराएं|
  4. गंदे पानी के संपर्क में न आएं, बारिश के मौसम में खानपान का ज्यादा ध्यान रखें, साफ-सुथरा उबला पानी पिये|