आयुर्वेद में शरीर को स्वस्थ और निरोग रखने के लिए कई प्रकार की विधि का उपयोग किया जाता है। ऐसी ही एक पद्धति है आयल पुल्लिंग।

आयल पुल्लिंग एक आयुर्वेदिक पद्धिति है जिसका उपयोग 3 हजार सालों पूर्व से किया जाता आ रहा है। यह तकनीक बहुत ही सरल और साधारण होती है, इसमें ज्यादा समय नहीं लगता और यह बहुत ही असरकारक भी होती है।

आधुनिक परिवेश में तो इस थेरेपी के बारे में कम ही भारतीय लोग जानते हैं, परन्तु पश्चिमी देशों में इस पद्धति को लोगो ने बहुत ही उत्साह से साथ अपना लिया है और वह आयल पुल्लिंग थेरिपी के नाम से इसका इस्तेमाल करते हैं।

जरुरत है की हमारे पूर्वजों द्वारा अपनायी गयी इस पद्धति के बारे में जानकारी रखने की और इस पद्धति का पूर्ण लाभ लेने की ताकि शरीर को स्वस्थ और तंदरुस्त रखा जा सके वो भी बिना किसी नुकसान के। जानते है Oil Pulling Benefits के बारे में विस्तार से।

Oil Pulling Benefits: जानिए यह क्या होती है और कैसे है यह फायदेमंद?

Oil Pulling Benefits

आयल पुल्लिंग क्या होती है ?

  • इस पद्धति के द्वारा जीभ, दांत और मुंह के भीतरी हिस्से को स्वस्थ रखा जाता है।
  • आयल पुल्लिंग में तेल को मुँह में रखा जाता है, जिसमे जैतून, तिल या फिर नारियल के तेल आदि का इस्तेमाल किया जाता है।
  • तेल को 10-15 मिनट तक मुँह में रखा जाता है जब तक की तेल पतला न हो जाए।
  • तेल के पतला हो जाने पर इसे थूक के मुँह को अच्छे से साफ किया जाता है।
  • तेल का कुल्ला करने से मुँह के बेक्टेरिया मर जाते हैं।
  • मसूड़े और दाँत दोनों ही स्वास्थ्य हो जाते हैं।

आयल पुल्लिंग को करने की विधि

  • आयल पुल्लिंग को सुबह के समय किया जाता है।
  • इसे करने के लिए सुबह बिना ब्रश किये और बिना कुछ खाये अपने मुँह में 1 से 2 चम्मच अपनी सुबिधानुसार तेल को मुँह में डाल लें।
  • इसके बाद इस तेल को अपने मुँह में चारो ओर घुमाएं। दांतों और मसूड़ों के पास भी अच्छे से घुमाएं।
  • इसके बाद 10 से 20 मिनट तक मुँह में बने लार और तेल के मिश्रण को धीरे धीरे करके कुल्ले जैसा करें।
  • इसके बाद इस मिश्रण को थूक देना है।
  • इस बात का ध्यान रखे की मिश्रण को निगलना नहीं है इसे थूकना है।
  • इसमें कुल्ला धीरे धीरे करना होता है इसलिए इसे तेजी से ना करें।
  • इसके बाद साफ़ पानी से कुल्ला कर ले और यदि पानी हल्का गर्म होगा तो ज्यादा अच्छा होगा।
  • कुल्ला करने के बाद आप चाहे तो रोज की तरह दांतों में ब्रश कर सकते है।

आयल पुल्लिंग किस तरह करता है कार्य

  • आयल पुल्लिंग करते समय जब मुँह में तेल-लार के मिश्रण को दांतों, मुंह के अंदर की त्वचा और मसूड़ों पर कुल्ला करते हुए घुमाया जाता है तो मुँह में मौजूद आमा जैसे विषैले तत्व मुंह व त्वचा से बाहर निकल जाते हैं ।
  • आयुर्वेद के मुताबिक ऐसा माना जाता है की यह आमा बहुत से रोगों को उत्पन्न करता है। जिसका तेल के द्वारा निवारण किया जाता है।

कैसे है आयल पुल्लिंग बेहतर

  • आपको बता दे की वैसे तो बाजार में माउथवाश केमिकल भी उपलब्ध रहते है परन्तु यह कीटाणुओं को तो नष्ट करते है साथ ही अच्छे बैक्टीरिया को भी ख़त्म कर देते है।
  • आयल पुल्लिंग में ऐसा नहीं होता है इसके कोई भी दुष्प्रभाव नहीं होते है।
  • एक अच्छे गुणवत्ता के तेल का उपयोग आयल पुल्लिंग में करने से फायदा होता है।

आयल पुल्लिंग के फायदे

आयल पुल्लिंग केवल दाँतों और मुँह के लिए लाभकारी नहीं होता है बल्कि यह अन्य बीमारियों से भी बचाता है जैसे की – मधुमेह, साँस से सम्बंधित बीमारी, अनिंद्रा की समस्या, सिरदर्द आदि। जानते है इसके अन्य फायदों के बारे में।

त्‍वचा में चमक लाये

  • आयल पुल्लिंग करने से त्‍वचा में दमक आ जाती है।
  • खून के साथ मिलकर वायरस, बैक्‍टीरिया और कवक त्वचा को नुक्सान पहुंचते हैं, जिसके कारण त्वचा कांतिहीन हो जाती है।
  • आयल पुल्लिंग करने से वायरस, बैक्‍टीरिया और कवक नष्ट हो जाते है जिससे त्वचा में चमक आ जाती है।

सिरदर्द को दूर करे

  • वायरस और बैक्टीरिया के मौजूद होने से सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या होती है।
  • आयल पुल्लिंग से यह समस्याएं दूर हो जाती है क्योंकि इस पद्धति में वायरस और बैक्टीरिया ख़त्म हो जाते हैं।

अनिंद्रा से राहत

  • आयल पुल्लिंग करने से नींद नहीं आने की समस्या से भी मुक्ति मिल जाती है।

डिटॉक्‍स में सहायक

  • बैक्टीरिया और विषाक्‍त पदार्थों की वजह से शरीर में कई बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती है।
  • खासकर मुँह के द्वारा भी यह बैक्टीरिया और विषाक्‍त पदार्थ अंदर प्रवेश करते है।
  • आयल पुल्लिंग बैक्टीरिया और विषाक्‍त पदार्थ के प्रवेश द्वारा को साफ रखने में मदद करता है।
  • जिसके कारण बीमारिया नहीं हो पाती है, इस तरह यह पूरे शरीर को डिटॉक्‍स करता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली को करे मजबूत

  • शरीर की ऊर्जा कम होने से प्रतिरक्षा प्रणाली भी कमजोर पड़ जाती है और वह रोगों से लड़ने में समर्थ नहीं हो पाती है।
  • आयल पुल्लिंग की मदद से शरीर की ऊर्जा में वृद्धि होती है।
  • जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती मिलती है।

इसके अतिरिक्त

  • आयल पुल्लिंग करने से किडनी और लीवर को सुचारू रूप से कार्य करने में सहायता मिलती है।
  • मोटापे से भी राहत देने का कार्य आयल पुल्लिंग से हो जाता है।
  • पाचन क्षमता अच्छी होती है और स्मरणशक्ति मजबूत भी हो जाती है।
  • आयल पुल्लिंग से अस्थिरोग, जिगर के रोग, चर्मरोग, स्नायु रोग, पक्षाघात रोग ठीक हो जाते हैं।
  • हार्मोनल संतुलन को बनाये रखने में भी आयल पुल्लिंग का महत्वपूर्ण योगदान होता है।