Vitamin E in Pregnancy: जानिए गर्भावस्था में विटामिन ई क्यों महत्वपूर्ण होता है?

शरीर को सेहतपूर्ण बनाने में विटामिन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वैसे तो शरीर को सारे विटामिन्स की जरुरत होती है लेकिन विटामिन ई का एक खास महत्व होता है।

विटामिन ई की कमी से शरीर में कई प्रकार के दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैंI गर्भवती महिलाओं में यदि विटामिन ई की कमी होती है तो बच्चों में मानसिक कौशल संबंधी विकार व उपापचय में समस्या की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

विटामिन ई की कमी होने से भ्रूण में कोलीन और ग्लूकोज की कमी रह जाती है जिसके कारणवश उसका सही तरीके से विकास नहीं हो पाता। इसलिए Vitamin E in Pregnancy ज़रुरी होती है। विटामिन ई झुर्रियों को रोकने में भी मददगार है।

एक अध्ययन में पाया गया है कि इस विटामिन की कमी को जन्म के बाद पूरा करने से बेहतर है कि बच्चा जब गर्भ में हो तभी पूरा किया जाए। विटामिन ई महिला के प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करता है। आइये आज के लेख में इसी विषय पर विस्तार में चर्चा करते हैं।

Vitamin E in Pregnancy: गर्भावस्था में विटामिन ई के फलकारी फायदे

Vitamin E in Pregnancy

क्यों है ज़रुरी विटामिन ई

  • विटामिन ई शरीर के लिए बहुत ही जरूरी होता है। यदि शरीर में इसकी कमी हो जाती है तो इससे कई तरह की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती है।
  • गर्भवती महिला को विटामिन ई का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसकी कमी होने से गर्भ में पल रहे शिशु पर भी असर पड़ता है। जो महिला और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • विटामिन ई गर्भवती महिलाओ के लिए भी बहुत ही आवश्यक होता है। यदि गर्भवती महिला विटामिन ई की सही खुराक लेती हैं तो शिशु को उपापचय में समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है साथ ही बच्चे के मानसिक विकार के लिए भी यह बहुत अच्छा होता है।
  • यदि विटामिन ई की कमी होती है तो उसके कारण भ्रूण में ग्लूकोज और कोलीन की कमी हो जाती है जिसकी वजह से बच्चे का विकास सही ढंग से नहीं हो पाता है। इसलिए विटामिन ई की खुराक को गर्भवती महिला को ज़रुर लेना चाहिए।

गर्भावस्था में विटामिन ई लेने से महिला और बच्चे को कई तरह के फायदे होते है जानते है वह कौन कौन से फायदे होते हैं।

विटामिन ई के फायदे: Vitamin E Ke Fayde

  • डीएचए की कमी रोके: विटामिन ई का पर्याप्त स्तर भ्रूण में डीएचए की कमी को रोकने में महत्वपूर्ण है
  • भ्रूण का मानसिक विकास: विटामिन ई की कमी से भ्रूण का मानसिक विकास प्रभावित होता है साथ ही शारीरिक असामान्यताएं होने का भी खतरा बना रहता हैI
  • एनीमिया से बचाव: विटामिन ई की कमी से नवजात शिशु को एनीमिया जैसी ही कई बीमारियाँ हो सकती हैं। इसलिए विटामिन ई इन बीमारियों से बच्चे की रक्षा करता है।
  • प्रतिरोधक क्षमता का विकास: शरीर में विटामिन ई की कमी से कई रोगों के होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। उदहारण के लिए बांझपन, गंजापन, पीलिया और हृदय रोग। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करके वायरस और बैक्टीरिया के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करने में भी मदद करता है।
  • लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण: विटामिन ई खून में लाल रक्त कोशिकाओं का गठन करता है। यह रक्त वाहिकाओं के अंदर रक्त के थक्के को जमने से रोकने में मदद करता है।
  • मानसिक समस्याओं से निजात: विटामिन ई की कमी से मानसिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है।
  • संक्रमण से बचाव: शरीर में विटामिन ई होने से किसी भी रोग का संक्रमण जल्दी नहीं लग सकता है।
  • फैटी एसिड के संतुलन में मदद: विटामिन ई का काम शरीर के फैटी एसिड को संतुलित करना होता है।
  • हार्मोंस संतुलन: विटामिन ई का महत्वपूर्ण योगदान हार्मोंस संतुलन के लिए भी होता है।
  • अंगों को सामान्य रूप में रखने: शरीर में अनेक अंगों को सामान्य रूप में बनाये रखने में विटामिन ई ही सहायता करता है। जैसे- मांसपेशियां और अन्य टिश्यू।
  • ग्लैण्ड की रक्षा: थायराइड ग्लैण्ड तथा पिट्यूटरी ग्लैण्ड की कार्यशैली में विटामिन ई की कमी से बाधा उत्पन्न हो जाती है। इसलिए विटामिन ई का सेवन ज़रूरी होता हैI
  • वसा को बनाये रखने में मददगार – विटामिन ई आपके शरीर में वसा (लिपिड) की संरचना को बनाए रखता है।
  • स्ट्रेच मार्क के लिए लाभकारी – गर्भवस्था के दौरान त्वचा में खिचाव होने से निशान बन जाते है यदि आप इसके लिए विटामिन ई युक्त तेल का उपयोग करती है तो यह लाभकारी होता है।

विटामिन ई युक्त आहार: Vitamin E Food

  • पालक, ब्रोकोली, गोभी, आदि पत्तेदार हरी सब्जियां विटामिन ई का एक बहुत अच्छा स्रोत हैं।
  • मूंगफली और बादाम भी विटामिन ई का अच्छा स्रोत हैं।
  • सूरजमुखी, कॉर्न आयल और सोया बीन जैसे तेल भी इसके अच्छे स्रोत हैं।
  • सूरजमुखी के बीज में भी भरपूर मात्रा में विटामिन ई होता है। इसके लिए खाने में सलाद के तौर पर इसके बीज का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • गेंहू, वनस्पति तेल, हरे साग, जौ, चना, खजूर, मक्खन-मलाई, शकरकन्द, अंकुरित अनाज, बीज और फलों में विटामिन ई पाया जाता है।
  • उबले अंडे में भी विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

उपरोक्त आहारों का सेवन करने से आपको विटामिन ई पर्याप्त मात्रा में प्राप्त हो जाता है।

सेवन से पहले चिकित्सक से परामर्श करे

विटामिन ई का ज्यादा सेवन भी गर्भवती महिला के लिए हानिकारक हो सकता है इसके लिए आप अपने डॉक्टर से कंसल्ट कर सकते है।

आवश्यक जानकारी

  • विटामिन ई की अधिक खुराक लेना हानिकारक हो सकता है इसकी अधिकता होने से जन्म दोषों की संभावना बढ़ जाती है।
  • इसके अतिरिक्त मस्तिष्क में गंभीर रक्तस्राव भी हो सकता है। साथ ही इसका अधिक सेवन करने से होने वाले बच्चे को दिल से सम्बंधित समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए इनका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करे।
  • गर्भवती महिला को खुराक के साथ साथ खानपान पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए क्योंकि पौष्टिक खाने से भी बच्चे को विटामिन प्राप्त होते है जो की बच्चे के लिए फ़ायदेमंद होते है। इसलिए घर का पौष्टिक भोजन करे साथ ही बाहर का खाना जितना हो सके कम ही खाये।
  • महिला को गर्भावस्था के दौरान खुद का ख्याल रखने की जरुरत होती है ताकि बच्चा स्वस्थ्य रह सके इसके लिए पर्याप्त आराम भी करे साथ ही पानी भी पर्यात मात्रा में पीये। समय समय पर डॉक्टर से चेकअप करवाती रहे ताकि महिला और बच्चे दोनों के सही स्वास्थ्य की जानकारी मिलती रहे और डॉक्टर की सलाह को सही से फॉलो करे।

आज के लेख में आपने गर्भावस्था के दौरान विटामिन ई के सेवन से मिलने वाले फ़ायदों के बारे में पढ़ा, आशा है की आप इसका लाभ ज़रूर उठाएंगे।


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