Premature Baby Problems: समय से पूर्व जन्मे बच्चोंं को होती हैं ये समस्याएं

कुछ महिलाओं में प्रेगनेंसी के दौरान कुछ ऐसी अनचाही स्थितियाँ बन जाती हैं की उन्हें शिशु को जन्म देने की सही समय से पहले ही प्रसूति (डिलीवरी) करवानी पड़ जाती है।

वैसे तो शिशु का माँ की कोख में रहने का पूरा समय लगभग 40 सप्ताह का होता है। परन्तु जब शिशु का जन्म 37वे सप्ताह से पहले होता है तब उसे प्रीमैच्योर डिलेवरी कहते है और उस बेबी को प्रीमैच्योर बेबी कहते है।

एक आंकड़े के अनुसार 13 बच्चोंं में से हर एक बच्चा डिलेवरी के असल समय से पहले प्रीमैच्योर अवस्था में पैदा होता है। समय से पहले होने के कारणवश उसका मानसिक विकास समय पर जन्में बच्चोंं के मुकाबले काफी धीमा होता है।

जब भी गर्भाशय में समय से पहले संकुचन होने लगता है साथ ही यदि गर्भाशय का मुँह सामान्य से अधिक खुल जाता है तो शिशु माँ की कोख से बाहर आ जाता है। इस कारण शिशु प्रीमैच्योर होता है। आज के लेख में हम आपको Common Premature Baby Problems के बारे में बता रहे है।

Common Premature Baby Problems: प्रीमैच्योर डिलीवरी में बच्चोंं को होने वाली परेशानियां

Premature Baby Problems

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता

  • जिन बच्चों का जन्म डिलीवरी की अनुमानित समय से पहले हो जाता है उन बच्चों में दूसरे बच्‍चों के अपेक्षा स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलें ज्यादा आती है।
  • Premature Birth को इम्यून सिस्टम अंडर डेवलप होता है इसलिए वे अधिक बीमार पढ़ते है।
  • इसलिए प्रीमैच्योर बच्चों का विशेष ख्याल रखना होता है क्योंकि मौसम में थोड़ा भी बदलाव उन्हें बीमार बना देता है।

दिमागी क्षमता का कम होना

  • समय से पहले जन्में बच्चोंं के स्वास्थ्य ही नहीं दिमाग के विकास पर भी असर रहता है।
  • प्रीमैच्योर बच्चोंं की दिमागी क्षमता अन्य बच्चोंं के मुकाबले थोड़ी कम हो सकती है।
  • साथ ही ऐसे केसेज में बच्चोंं की स्मरण शक्ति तथा दिमागी क्षमता का पता भी बच्चे के करीब आठ वर्ष की आयु के होने के बाद ही चलता है।

मेटाबोलिक समस्याएं

  • समयपूर्व जन्मे बच्चोंं के साथ अक्सर मेटाबोलिक समस्याएं होती है।
  • कुछ बच्चों में रक्त शर्करा (हाइपोग्लाइसीमिया) का विकास असामान्य तौर पर कम हो सकता है।
  • इसके कारणों की बात करे तो प्रीमैच्योर शिशुओं में, सामान्य शिशुओं की तुलना में ग्लाइकोन (संग्रहीत ग्लूकोज) के छोटे स्टोर होते हैं।
  • क्योंकि प्रीमीज़ के अपरिपक्व यकृतों (लिवर) को संग्रहित ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में परिवर्तित करने में परेशानी होती है।

तापमान से जुड़ी समस्याएं

  • प्रीमैच्योर बच्चोंं में तापमान बेहद तेजी से गिरने की संभावना रहती है।
  • इन बच्चों के शरीर पर अन्य बच्चों की तरह वसा का जमाव नहीं होता जिसके चलते यह बच्चे शरीर में गर्मी को इकठ्ठा नहीं कर पाते।
  • यदि प्रीमैच्योर बच्चोंं का तापमान सामान्य से ज्यादा गिर जाए तो उन्हें हाइपोथिमिया की समस्या हो सकती है।
  • हाइपोथिमिया की समस्या होने पर बच्चे को सांस लेने में दिक्कत और रक्त शर्करा के स्तर में कमी आ सकती है।
  • ऐसी स्थिति में बच्चे का शरीर गर्मी उत्पन्न करने के लिए ही आहार से मिली पूरी एनर्जी को खत्म कर देता है जिससे उसके शरीर का विकास अच्छे से नहीं होता है।

मानसिक बीमारी होने की संभावनाएं

  • इस प्रकार के बच्चे को मानसिक बीमारी का भी खतरा रहता है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है तो उसे किसी प्रकार की मानसिक बीमारी भी हो सकती है।
  • शोध के दौरान यह भी देखा गया है की Premature Baby में मानसिक अवसाद, मनोविकार की बीमारी जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती है।
  • इस प्रकार के बच्चों में मानसिक विकार होने का भी खतरा बना रहता है। इसलिए शिशु की नियमित रूप से जाँच करवाना अच्छा होता है।

Premature Baby Care

जन्म से पूर्व जन्मे बच्चे की देखभाल भी बहुत अच्छे से और सावधानी पूर्वक करनी चाहिए। जानते है इसे करने के तरीके के बारे में।

शिशु को पर्याप्त मात्रा में दूध पिलाये

  • माँ का दूध शिशु के लिए सबसे अच्छा होता है क्योंकि इससे शिशु को सारे पोषक तत्व मिल जाते है।
  • इसलिए अपने प्रीमेच्योर शिशु को समय समय पर दूध पिलाये। यदि वह स्तन से दूध पीने में असमर्थ है तो उसे अपना दूध निकालकर चम्मच या फिर बोतल की सहायता से पिलाये।
  • बाजार में दूध पिलाने के और भी तारीके उपलब्ध है आप उन्हें भी इस्तेमाल कर सकती है। इस बात का पूरा ध्यान दे की शिशु ज्यादा अंतराल के लिए भूखा न रहे।
  • शिशु को अपना ही दूध पिलाये।

शिशु को ठंड से बचाये

  • प्रीमैचोर शिशु को गर्म रखने की आवश्यकता सबसे ज्यादा होती है जो की केवल उसे उसकी माँ के पास ही मिल सकती है।
  • जितना हो सके माँ को अपने शिशु को छाती से लगा कर रखना चाहिए ऐसा करने से शिशु में गर्माहट बनी रहती है।
  • ऐसा करने से शिशु अपने माँ की धड़कनो को सुन सकता है साथ ही वह खुद को सुरक्षित भी महसूस करता है।
  • ऐसा करने से शिशु का विकास भी अच्छे से होता है।

इन्फेक्शन से सुरक्षित रखे

  • प्रीमैच्योर बेबी में इंफेक्शन की सम्भावना अधिक होती है इसलिए उन्हें इंफेक्शन से बचाना बहुत जरूरी होता है।
  • इसलिए बच्चों को बहुत कम लोगों के हाथों में देना चाहिए क्योंकि बाहरी लोगो के हाथों से बच्चे को संक्रमण हो सकता है।
  • आपको बता दे की बच्चे में प्रतिरोधक क्षमता का विकास अंतिम तीन महीनों में होता है। जो की जल्दी जन्म लेने पर विकसित नहीं हो पाता है।

नियमित रूप से जाँच करवाए

  • प्रीमेच्योर शिशु में कई चीजे विकसित नहीं हो पाती है जिसके कारण श्वसन संबंधी समस्याएं और आँखों की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
  • इसलिए नियमित जाँच करने से उनका सही तरीके से उपचार किया जा सकता है साथ ही शिशु के स्वास्थ्य पर ध्यान भी रखा जा सकता है।

इस तरह आप कुछ चीजों का ध्यान रख कर अपने शिशु को सुरक्षित रख सकती है साथ ही उसे स्वस्थ्य भी रख सकती हैं। अधिक से अधिक समय अपने शिशु को साथ बिठाये ऐसा करने से शिशु का विकास बहुत अच्छे से होता है साथ ही वह आपके पास सुरक्षित भी महसूस करते है और इससे दोनों के बीच प्रेम भी बढ़ता है।

उपरोक्त सामान्य समस्याओं के अलावा समय से पूर्व जन्मे बच्चोंं में ऐसफिक्सिया, श्वास समस्या, हृदय में समस्याएं, गैस्ट्रोइंटैस्टाइनिल समस्याएं, रक्त सम्बंधित समस्याएं जैसी गंभीर समस्याएं देखने को मिलती है। समय से पूर्व प्रसव को रोकना तो मुमकिन नहीं है किंतु एक स्वस्थ व पूर्ण गर्भावस्था को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती पर ध्यान दिया जा सकता है।


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